....तो वह जिंदा निकली!

Updated at : 15 Jun 2014 7:58 AM (IST)
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....तो वह जिंदा निकली!

रांची: जिस युवती की हत्या के आरोप में पुलिस ने धुर्वा निवासी अजीत कुमार और अमरजीत कुमार को करीब चार माह तक जेल में रखा, वह जीवित निकली. इसी मामले में धुर्वा के ही अभिमन्यु कुमार भी एक माह से जेल में बंद है. पुलिस विकास कुमार नामक एक अन्य युवक की तलाश भी कर […]

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रांची: जिस युवती की हत्या के आरोप में पुलिस ने धुर्वा निवासी अजीत कुमार और अमरजीत कुमार को करीब चार माह तक जेल में रखा, वह जीवित निकली. इसी मामले में धुर्वा के ही अभिमन्यु कुमार भी एक माह से जेल में बंद है.

पुलिस विकास कुमार नामक एक अन्य युवक की तलाश भी कर रही थी. शनिवार को कुछ युवकों ने रिम्स के पास प्रीति नाम की उस युवती को देखा, जिसकी हत्या के आरोप में तीन युवक जेल में बंद थे. इसके बाद उसे पकड़ कर ग्रामीण एसपी एसके झा के पास ले गये. प्रीति ने ग्रामीण एसपी को बताया कि उसकी हत्या नहीं हुई थी. वह खुद भाग कर पलामू चली गयी थी. सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले वह पलामू से रांची आकर किसी गल्र्स हॉस्टल में रह रही थी. अब प्रीति के लौट जाने पर पुलिस के अनुसंधान पर सवाल उठ रहे हैं.

पिता ने की पहचान : प्रीति के जीवित मिलने के बाद ग्रामीण एसपी ने चुटिया स्थित साईं कॉलोनी निवासी उसके पिता सुरेश सिंह को इसकी जानकारी दी. पर सुरेश सिंह ने इसे मानने से इनकार कर दिया. कहा कि उनकी बेटी मर चुकी है. वह उसका दाह-संस्कार कर चुके हैं. इसके बाद एसपी प्रीति को लेकर सुरेश सिंह के पास पहुंचे, तो उन्होंने उसे अपनी बेटी के रूप में पहचाना.

उठ रहे सवाल

* प्रीति जिंदा है, तो बुंडू से मिला शव किस युवती का था

पुलिस ने सिर्फ शक के आधार पर केस डायरी कोर्ट में कैसे भेज दी

मिले शव से, जेल भेजे गये युवकों और प्रीति का क्या संबंध है

गिरफ्तार अजीत और अमरजीत के बयान पर पुलिस ने धुर्वा डैम से प्रीति के दुपट्टे और जूती बरामद किये थे. प्रीति ने दोनों चीजें धुर्वा डैम पर क्यों छोड़ी

जब प्रीति की हत्या ही नहीं हुई, तो अजीत और अमरजीत ने उसके दुपट्टे और जूती की बरामदगी कैसे करवायी. दोनों को कैसे पता कि ये चीजें धुर्वा डैम के पास हैं

* प्रीति, अजीत, अमरजीत सभीकिसी दूसरी बड़ी साजिश का हिस्सातो नहीं हैं

* जब शव जला हुआ था, तो पिता ने किस आधार पर 15 फरवरी को बुंडू से बरामद शव की पहचान अपनी बेटी प्रीति के रूप में की थी

क्या था मामला

15 फरवरी को बुंडू स्थित मांझी टोली से जली अवस्था में एक युवती का शव मिला था. चौकीदार सुखराम लोहरा के बयान पर बुंडू थाने में (कांड संख्या- 20/14) मामला दर्ज किया गया. अनुसंधान के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि हत्या से पहले युवती से दुष्कर्म किया गया था. अपराधियों ने साक्ष्य छुपाने के लिए युवती को जला कर मार डाला. बाद में सुरेश सिंह ने शव की पहचान अपनी बेटी प्रीति के रूप में की. उनके बयान पर पुलिस ने अजीत कुमार को अभियुक्त बनाया. फिर अजीत के बयान पर अमरजीत कुमार, अभिमन्यु उर्फ मोनू व विकास को भी अभियुक्त बनाया गया. पुलिस की केस डायरी के मुताबिक अजीत व अमरजीत को धुर्वा स्थित सिंचाई कॉलोनी में दोनों के घर से गिरफ्तार किया गया. उनकी निशानदेही पर पुलिस ने प्रीति का दुपट्टा और जूती धुर्वा डैम से बरामद किये. पुलिस ने परिजनों पर दबाव बना कर 15 मई को अभिमन्यु (क्वार्टर नं एसटी 702, धुर्वा) को सरेंडर करवाया.

जांच की दिशा बदली

प्रीति के मिलने के बाद रांची पुलिस अब यह पता लगाने में जुट गयी है कि बुंडू से बरामद शव किस युवती का था. यह पता लगाना पुलिस के समक्ष बड़ी चुनौती है, क्योंकि शव का दाह-संस्कार कर दिया गया है.

प्रीति को कहां ले गयी पुलिस : मिलने के बाद पुलिस ने प्रीति को पहले महिला थाने में रखा, फिर उसे कहां ले गयी, इसकी जानकारी नहीं दी गयी.

परिजनों का कुछ भी कहने से इनकार : प्रीति के पिता और परिवार के अन्य सदस्य मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं. प्रीति के चाचा पिंटू सिंह ने बताया, घर पर मौजूद लोगों को कुछ भी नहीं पता, वे कुछ नहीं बता सकते.

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