पीढ़ियों से मूर्ति बना कर छोड़ रहे हैं अमिट छाप

Updated at : 21 Dec 2016 4:32 AM (IST)
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पीढ़ियों से मूर्ति बना कर छोड़ रहे हैं अमिट छाप

मुख्यमंत्री से मिल चुका है राकेश को सम्मान महुआ : नगर पंचायत बाजार के महुआ सिंहराय गांव निवासी क्षेत्र के जाने माने शिल्पकार बांके लाल बिहारी के परिवार कई पीढ़ियों से मूर्ति बना कर क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ रहे हैं. बाजार के मूल निवासी होने के कारण इन परिवारों द्वारा बनायी जा रही विभिन्न […]

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मुख्यमंत्री से मिल चुका है राकेश को सम्मान

महुआ : नगर पंचायत बाजार के महुआ सिंहराय गांव निवासी क्षेत्र के जाने माने शिल्पकार बांके लाल बिहारी के परिवार कई पीढ़ियों से मूर्ति बना कर क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ रहे हैं. बाजार के मूल निवासी होने के कारण इन परिवारों द्वारा बनायी जा रही विभिन्न देवी देवताओं के साथ-साथ महापुरुषों के अलावा अन्य प्रकार की मूर्तियां काफी आकर्षक और मनमोहक होने के कारण दिन प्रतिदिन काफी प्रचलित होती जा रही है. जिससे इन परिवार का मूर्ति कला के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनती जा रही है. मालूम हो की वर्षों पूर्व बांके लाल बिहारी के पिता पहले छोटे-छोटे मूर्तियां बना गांव देहातों और हाटों में घूम-घूम कर बिक्री करते थे.
उसके बाद बांके लाल ने अपने पिता जी की कलाओं को जीवंत रखने के लिये खुद को इस क्षेत्र में कदम रख कई दशक तक इन कलाओं को जीवंत रख अपने बड़े पुत्र राकेश लाल बिहारी को आगे बढ़ाया. राकेश ने कड़ी मेहनत कर कलाओं को सीख अपने पिता एवं दादा का नाम गौरवान्वित कर इस क्षेत्र में सूबे के कई जिलों में एक अच्छे शिल्पकार के रूप में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. जिसे देख सूबे के कला संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम द्वारा कलाकार को पटना में आयोजित एक समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दिनकर पुरस्कार से सम्मानित करवाया. राकेश अब अपने पुत्र नौवीं कक्षा के छात्र राजेश लाल बिहारी को भी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी कलाओं का जादू दिखा उसे भी मूर्ति बनाने का काम सीखा रहे हैं. महज 13 वर्ष के बालक द्वारा अपने पिता द्वारा बनायी जा रही संत रविदास एवं महात्मा बुद्ध की सीमेंट से बनी मूर्ति में की जा रही कला को देख मूर्ति पूरी तरह से निर्माण होने के पहले ही आकर्षक लग रही है. इसके साथ ही राकेश बिहारी के छोटे भाई सत्यप्रकाश उर्फ जय प्रकाश बिहारी भी मूर्ति बनाने की कला में कई जिलों में अपना पहचान बना चुके हैं. बिहारी परिवारों द्वारा कई पीढ़ियों से बनायी जा रही मूर्तियों की मांग क्षेत्र के लोगो के लिये काफी चर्चित साबित होती जा रही है.
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