आदती शराबी दुख भरे लफ्जों में बयां कर रहे दर्द

Updated at : 04 Apr 2016 1:57 AM (IST)
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आदती शराबी दुख भरे लफ्जों में बयां कर रहे दर्द

बिक्री बंद होते ही छायी मायूसीबढ़ी ताड़ी की बिक्री गोरौल : शराब की बिक्री बंद होते ही शराबियों में मायूसी छा गयी. शराब पीनेवाले लोग सुबह से ही इधर-उधर घूम कर शराब की जुगाड़ लगाते देखे गये. हालांकि प्रशासन द्वारा शराब बिक्री पर कड़ी नजर रखने के कारण उन्हें शराब नहीं मिल सकी. कई लोग […]

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बिक्री बंद होते ही छायी मायूसीबढ़ी ताड़ी की बिक्री

गोरौल : शराब की बिक्री बंद होते ही शराबियों में मायूसी छा गयी. शराब पीनेवाले लोग सुबह से ही इधर-उधर घूम कर शराब की जुगाड़ लगाते देखे गये. हालांकि प्रशासन द्वारा शराब बिक्री पर कड़ी नजर रखने के कारण उन्हें शराब नहीं मिल सकी. कई लोग क्षेत्र में ऐसे मिले, जो कह रहे थे कि आज देशी शराब नहीं पी है, जिस कारण पूरे शरीर में कंपन महसूस हो रही है. चलने-फिरने में भी कठिनाइयां हो रही हैं. लगता है कि शराब नहीं मिलेगी,
तो शरीर बेकार हो जायेगा. वहीं, मजदूरों ने भी शराब नहीं मिलने के कारण कार्य के दौरान शरीर में ताकत नहीं मिलने का रोना रोया. अपनी बातें कहते हुए ये भी कहने से नहीं चुके कि दिन भर मेहनत के बाद रात्रि में शराब पीकर सो जाते थे, तो पूरी थकान समाप्त हो जाती थी, लेकिन अब शरीर में ताकत ही महसूस नहीं हो रही है और नहीं काम करने का जी कर रहा है. वहीं, इस शराबबंदी से महिलाएं काफी खुश दिख रही हैं. उनका कहना है कि रात दिन के जिल्लत भरी जिंदगी से उन्हें मुक्ति मिलेगी. शराब पीने से जिनके पुत्र, पति, भाई, पिता की मृत्यु हो गयी है,
वे लोग शराब की लत से अपनों को खोकर भी, शराब के चलते मरने के गम के बीच भी इस शराबबंदी से काफी प्रसन्न दिखाई दे रहे हैं. उनका सारा दु:ख दूर हो गया है. उन्हें लगता है कि जिस तरह उनके घर को शराब ने बरबाद कर दिया, अब उनका अगली पीढ़ी और अन्य किसी का घर बरबाद नहीं होगा. शराब बंद होते ही ताड़ी विक्रेताओं की बिक्री बढ़ गयी है. ताड़ी की दुकानों पर भारी भीड़ दिनों भर लगी रहती है और दुकानदार इसका फायदा उठाते हुए ग्राहकों से दोगुने दाम पर ताड़ी बेच रहे हैं.
सामुदायिक स्थलों पर खुलेआम इन दुकानों से भी महिलाओं, राहगीर तथा विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. स्थानीय लोगों ने ऐसे चलाये जा रहे ताड़ी के अड्डों पर भी नकेल कसने की मांग की है. अगर प्रशासन द्वारा ऐसा ही कड़ा रुख रखा गया, तो लोगों को पहले जैसी देशी-शराब, विदेशी शराब नहीं मिल पायेगी और शराब के आशिक धीरे-धीरे सामान्य हो जायेंगे. नशाखोरी की जिंदगी से काफी खुशनुमा जिंदगी जीने लगेंगे.
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