ऊपर से िदखता चकाचक लेकिन भीतर खस्ताहाल

सदर : अस्पतलाल में इमरजेंसी की दशा नहीं सुधर पा रही. यहां आनेवाले मरीजों का इलाज राम भरोसे है. इमरजेंसी वार्ड में कम-से-कम एक सर्जन और एक फीजिशियन की तैनाती आवश्यक बतायी जाती हैं, जबकि यहां महज एक चिकित्सक के भरोसे गंभीर मरीजों का इलाज होता है. यहां नियमित और ट्रेंड स्वास्थ्यकर्मियों की जगह कुछ […]
सदर : अस्पतलाल में इमरजेंसी की दशा नहीं सुधर पा रही. यहां आनेवाले मरीजों का इलाज राम भरोसे है. इमरजेंसी वार्ड में कम-से-कम एक सर्जन और एक फीजिशियन की तैनाती आवश्यक बतायी जाती हैं, जबकि यहां महज एक चिकित्सक के भरोसे गंभीर मरीजों का इलाज होता है. यहां नियमित और ट्रेंड स्वास्थ्यकर्मियों की जगह कुछ नोसिखिए और अनट्रेंड लड़के ही मरीजों के इलाज में लगे नजर आते हैं. इमरजेंसी का ओटी रिपेयरिंग के नाम पर बंद हुआ,
सो अब तक बंद है. यहां का ड्रेसिंग रूम भी एक साल से ज्यादा समय से बंद है. मरीजों की देख-भाल के लिए एएनएम की तैनाती भी अभी तक नहीं की जा सकी. मरीजों को इलाज के नाम पर किसी तरह निबटाया जाता है. यहां डाॅक्टर एक मरीज को एक मिनट का समय भी शायद ही दे पाते हैं. रोगियों के इलाज में पेश आने वाली दिक्कतों के बारे में पूछे जाने पर अस्पताल के एक चिकित्सक कहते हैं कि जो व्यवस्था है, इसमें इलाज क्या होगा. बस समझिए कि हम लोग मरीजों का डिस्पोजल करते हैं.
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