दिल्ली के दौरे कई, राघोपुर में कब-कब पहुंचे तेजस्वी? 13 बच्चों की मौत के बाद अपने ही विधायक को खोज रहे लोग
तेजस्वी यादव की तस्वीर
Vaishali Boat Accident: दिल्ली की यात्राओं के बीच राघोपुर में तेजस्वी यादव की मौजूदगी अब चर्चा में है. गंगा में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत के बाद सवाल उठ रहा है कि बाढ़ और बदहाल व्यवस्था से जूझ रहे अपने क्षेत्र के लोगों के बीच तेजस्वी कितनी बार पहुंचे? हादसे के बाद स्थानीय लोगों की नाराजगी ने इस सवाल को और तीखा कर दिया है.
Vaishali Boat Accident: गंगा में नाव पलटी तो 13 बच्चों की मौत हो गई. पीछे रह गए रोते-बिलखते परिवार और कई सवाल. वैशाली के राघोपुर में हुए इस हादसे ने नाव की सुरक्षा और प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं. साथ ही, स्थानीय विधायक और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. कुछ स्थानीय लोगों की नाराजगी है कि संकट के समय उनका विधायक उनके बीच क्यों नहीं दिखता.
तेजस्वी यादव 2025 के विधानसभा चुनाव में राघोपुर से जीतकर आए थे. इसके बाद उनकी दिल्ली यात्राएं भी चर्चा में रहीं. 13 अक्टूबर 2026 को नाव हादसे के समय वह दिल्ली में थे. अब उन्होंने 14 अक्टूबर की शाम पटना पहुंचने और इसके बाद राघोपुर जाने की बात कही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चुनाव जीतने के बाद तेजस्वी कितनी बार दिल्ली गए और अपने विधानसभा क्षेत्र राघोपुर में कितनी बार पहुंचे?
चुनाव के बाद दिल्ली के कई दौरे, राघोपुर में कितनी बार पहुंचे तेजस्वी?
14 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे. इसके बाद तेजस्वी यादव की दिल्ली यात्रा की खबरें सामने आईं. 27 नवंबर 2025 को वह पटना एयरपोर्ट से दिल्ली रवाना हुए. इससे पहले 16 नवंबर के आसपास राहुल गांधी के बुलावे पर उनके दिल्ली जाने की खबरें भी आई थीं. 29-30 नवंबर को दिल्ली से लौटने के बाद वह महागठबंधन के विधायकों की बैठक में शामिल हुए, जहां उन्हें नेता प्रतिपक्ष चुना गया.
इसके बाद 27-28 अगस्त 2026 को तेजस्वी परिवार के साथ दिल्ली पहुंचे. वहां उन्होंने अपनी बहनों से राखी बंधवाई. फिर 3 अक्टूबर 2026 को वह IRCTC होटल टेंडर और लारा प्रोजेक्ट्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए. इस मामले में आरोप तय करने की कार्रवाई टल गई और अगली तारीख 30 अक्टूबर निर्धारित हुई.
13-14 अक्टूबर 2026 को वैशाली नाव हादसे के समय भी उनके दिल्ली में होने की जानकारी सामने आई. इस दौरान वे दिल्ली कई बार गए. लेकिन चुनाव जीतने के बाद तेजस्वी यादव राघोपुर सितंबर 2026 के आसपास गए थे. जहां उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की थी.
राघोपुर में बाढ़, नदी पार करने की मजबूरी और सुरक्षा का सवाल
राघोपुर का दियारा इलाका गंगा से घिरा है. यहां नदी पार करना कई लोगों की जरूरत है. ऐसे में नाव केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा भी है. लेकिन जब नाव की हालत खराब हो, क्षमता से अधिक लोग सवार हों और रात में परिचालन हो, तो जोखिम बढ़ जाता है.
13 अक्टूबर की रात रामपुर श्यामचंद के पास नाव पर सवार लोग गंगा पार कर एक भोज में जा रहे थे. नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत हो गई. हादसे के बाद नाव की हालत और उसके परिचालन को लेकर भी सवाल उठे.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर नाव जर्जर थी, तो उस पर इतने लोग कैसे सवार हुए? सूर्यास्त के बाद परिचालन पर प्रतिबंध के बावजूद नाव नदी में कैसे चल रही थी? क्या नाव की नियमित जांच होती थी? क्या यात्रियों की संख्या पर नजर रखी जा रही थी?
इन सवालों के जवाब सिर्फ मुआवजे से नहीं मिलेंगे. इसके लिए नाव परिचालन की व्यवस्था, सुरक्षा नियमों और निगरानी की जिम्मेदारी की जांच जरूरी है.
बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
‘हमारे विधायक नहीं आते’, स्थानीय लोगों की नाराजगी
हादसे के बाद इलाके में मातम है. कई परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है. ऐसे समय में स्थानीय लोगों का गुस्सा भी सामने आ रहा है. लोगों की शिकायत है कि संकट के समय उनका विधायक उनके बीच मौजूद नहीं रहता.
हालांकि, किसी जनप्रतिनिधि की भूमिका का आकलन केवल एक घटना के दिन उसकी मौजूदगी से नहीं किया जा सकता. यह भी देखना होगा कि वह क्षेत्र की समस्याओं को कितनी नियमितता से उठाता है, अधिकारियों से क्या कार्रवाई कराता है और बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए क्या पहल करता है.
तेजस्वी यादव ने हादसे के बाद प्रशासन से संपर्क किया और राहत-बचाव में तेजी लाने की बात कही. लेकिन अब स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि वह खुद राघोपुर पहुंचें, पीड़ित परिवारों से मिलें और इलाके में नाव परिचालन तथा बाढ़ से जुड़ी समस्याओं पर ठोस पहल करें.
हादसे के बाद कार्रवाई की बात, लेकिन जवाबदेही कौन तय करेगा?
वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने नाव के मालिक, परिचालक और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही है. प्रशासन के अनुसार, संबंधित नाव पहले से चल रही थी, जबकि सूर्यास्त के बाद नाव परिचालन प्रतिबंधित है.
अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि नाव की हालत कैसी थी, उस पर कितने लोग सवार थे और नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ. अगर निगरानी में लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी जरूरी है.
साथ ही, राघोपुर जैसे नदी और बाढ़ प्रभावित इलाके में सुरक्षित आवागमन का स्थायी इंतजाम भी अहम है. लोगों को हर बार हादसे के बाद राहत और मुआवजे का इंतजार न करना पड़े, इसके लिए प्रशासन को नियमित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी.
Also Read: वैशाली नाव हादसा: जब नाव जर्जर थी, तो बच्चे उस पर कैसे सवार हुए, 13 मौतों की जवाबदेही किसकी?
आपके शहर में
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए