मिथिलांचल के एकीकरण की जगी उम्मीद
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Jun 2016 5:55 AM
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महासेतु पर रेल पटरी िबछाने का काम शुरू सरायगढ़-निर्मली रेलखंड में मिट्टी भराई व अमान परिवर्तन का काम अब भी लंबित सरायगढ़ : कोसी नदी पर करोड़ों की लागत से निर्मित रेल महासेतु के ऊपर पटरी बिछाने का काम प्रारंभ हो गया है. इससे सरायगढ़ व निर्मली रेल स्टेशन के बीच रेलखंड निर्माण की उम्मीद […]
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महासेतु पर रेल पटरी िबछाने का काम शुरू
सरायगढ़-निर्मली रेलखंड में मिट्टी भराई व अमान परिवर्तन का काम अब भी लंबित
सरायगढ़ : कोसी नदी पर करोड़ों की लागत से निर्मित रेल महासेतु के ऊपर पटरी बिछाने का काम प्रारंभ हो गया है. इससे सरायगढ़ व निर्मली रेल स्टेशन के बीच रेलखंड निर्माण की उम्मीद एक बार फिर से बंध गयी है. इस रेलखंड के निर्माण से मिथिलांचल के पूर्वी व पश्चिमी हिस्से का मिलन हो जायेगा, जिसके कारण सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया आदि जिलों के लोगों को मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर आदि स्थानों तक रेल यात्रा की सुविधा उपलब्ध हो जायेगी. महासेतु पर गत एक माह से पटरी बिछाने का काम शुरू किया गया है.
हालांकि महासेतु के दोनों ओर बड़ी रेल लाइन निर्माण का काम अब भी विभागीय उदासीनता व जमीन संबंधी विवाद को लेकर अधर में लटका है. इसके कारण महासेतु पर पटरी बिछ जाने के बाद भी इस रेलखंड में बड़ी रेल लाइन संचालन की उम्मीद फिलहाल नहीं की जा सकती है. ज्ञात हो कि 76 साल पूर्व इस रेलखंड में छोटी रेल लाइन की स्थापना की गयी थी. 1919 में स्थापित इस रेलखंड के बीच 1934 में आये भीषण भूकंप व कोसी की बाढ़ की वजह से यह रेलखंड ध्वस्त हो गया था. सरायगढ़ व निर्मली के बीच मझारी के समीप आज भी उक्त रेलखंड का अवशेष मौजूद है.
13 वर्ष पूर्व हुआ था शिलान्यास
गौरतलब है कि जिले में बड़ी रेल लाइन की स्थापना अब तक नहीं की जा सकी है. वर्ष 2003 में छह जून को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा सहरसा-फारबिसगंज व सरायगढ़-निर्मली रेलखंड के बीच अमान परिवर्तन व कोसी नदी पर रेल महासेतु के निर्माण की नींव रखी गयी. मौके पर निर्मली कॉलेज परिसर में आयोजित समारोह के दौरान लाखों की भीड़ उमड़ी थी. लोग इस बात को लेकर आशान्वित थे कि कुछ ही दिनों बाद अमान परिवर्तन का कार्य पूरा हो जाने से ना सिर्फ लोगों के बड़ी रेल लाइन की ट्रेन पर सफर करने का सपना पूरा हो जायेगा, बल्कि वर्षों से विखंडित मिथिलांचल का एकीकरण भी संभव होगा. यह दीगर बात है कि दिल्ली का शासन बदलने के बाद अमान परिवर्तन का कार्य वर्षों तक अधर में लटक गया. हाल के दिनों में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पुन: इस रेल खंड को राशि उपलब्ध कराने से लोगों की आशाएं एक बार फिर से बलवती हुई है.
जय मंगला कंपनी बिछा रही लाइन
मालूम हो कि रेल महासेतु के शिलान्यास के बाद इसके निर्माण की जिम्मेदारी सरकार द्वारा तांतिया कंस्ट्रक्सन कंपनी को सौंपी गयी थी. कंपनी द्वारा कोसी नदी में पुल बनाने के लिए 40 पायों का निर्माण 40 करोड़ की लागत से किया गया. जिसके बाद जीपीटी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी द्वारा 60 करोड़ की लागत से गार्टर बिछाने का काम पूरा किया गया. वर्तमान में निर्मित रेल महासेतु पर पटरी बिछाने की जिम्मेवारी जय मंगला कंस्ट्रक्सन कंपनी को सौंपी गयी है. कंपनी द्वारा अब तक पुल की आधी दूरी तक पटरी बिछाने का काम पूर्ण किया गया है. शेष स्थानों पर यह कार्य तीव्र गति से जारी है. वर्क सुपरवाइजर हरिलाल साह ने बताया कि पटरी बिछाने का काम पूरा होने के बाद इसका दोहरी करण भी किया जायेगा.
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