28 में से 13 विद्यालय भवन निर्माण कार्य पूर्ण

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Apr 2016 4:50 AM

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सुपौल जिला में 11 प्रखंड शामिल है. हम सदर प्रखंड स्थित संचालित विद्यालयों पर नजर डाले तो कई ऐसे विद्यालय भूमिहीन, भवनहीन व वर्ग कक्ष की कमी रहने के कारण नामांकित बच्चे समुचित सुविधाओं का दंश झेलना पड़ रहा था. विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 सदर प्रखंड के 28 विद्यालयों को आवश्यकता […]

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सुपौल जिला में 11 प्रखंड शामिल है. हम सदर प्रखंड स्थित संचालित विद्यालयों पर नजर डाले तो कई ऐसे विद्यालय भूमिहीन, भवनहीन व वर्ग कक्ष की कमी रहने के कारण नामांकित बच्चे समुचित सुविधाओं का दंश झेलना पड़ रहा था. विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 सदर प्रखंड के 28 विद्यालयों को आवश्यकता अनुसार एक से लेकर छह यूनिट तक के विद्यालय भवन निर्माण कराये जाने के लिए राशि उपलब्ध करायी गयी. जहां अब तक मात्र 13 विद्यालय के प्रधानों ने निर्माण कार्य पूर्ण कर एनओसी प्राप्त किया है.

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव किया गया. यहां तक कि सभी बच्चों को नि:शुल्क प्राथमिक शिक्षा के साथ- साथ गुणवत्ता युक्त भोजन सहित लाखों – करोड़ों की लागत से विद्यालय भवन निर्माण कार्य कराने की दिशा में व्यापक पहल किया जा रहा है. साथ ही विद्यालयों को अत्याधुनिक सुविधा से लैस भी कराया जा रहा है. इस बीच 15 विद्यालयों में कुल 79 यूनिट भवन निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाना था. लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी भवन निर्माण कार्य को पूर्ण नहीं कराया गया है.
सुपौल : वो गुजरे जमाने की बात थी जब शिक्षा प्राप्त करने के लिए बच्चों को गुरुकुल में दाखिला कराया जाता था. साथ ही विद्यार्थियों को गुरु द्वारा दान के रूप में शिक्षा उपलब्ध होता था. लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदली और लोगों के सोच में भी बदलाव आया. जिस कारण शिक्षा व्यवस्था का परिदृश्य भी बदल गया. कई दशकों पूर्व गांव घरों में ऊंची इमारत को देख लोग समझ बैठते थे कि कोई जमींदार का घर होगा.
लेकिन सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों को शिक्षा उपलब्ध करायी जा सके. इसे लेकर वर्तमान शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव किया गया. यहां तक कि सभी बच्चों को नि:शुल्क प्राथमिक शिक्षा के साथ- साथ गुणवत्ता युक्त भोजन सहित लाखों – करोड़ों की लागत से विद्यालय भवन निर्माण कार्य कराने की दिशा में व्यापक पहल किया जा रहा है. साथ ही विद्यालयों को अत्याधुनिक सुविधा से लैस भी कराया जा रहा है. लेकिन विद्यालय प्रबंधन की शिथिलता के कारण कई विद्यालय भवन निर्माण कार्य अधर में लटका पड़ा है.
क्या है प्रावधान
विभाग की माने तो जिन विद्यालयों में भूमि उपलब्ध है. साथ ही नामांकित बच्चे के अनुरूप वर्ग कक्ष की कमी है ऐसे सभी विद्यालयों में भवन निर्माण कार्य पूर्ण कराये जाने का जिम्मा संबंधित विद्यालय के प्रभारी व प्रधान को दिया जाता है. साथ ही राशि के आवंटन के समय से छह माह के भीतर भवन निर्माण कार्य को पूर्ण कराये जाने का निर्देश भी दिया जाता है. वहीं ससमय भवन निर्माण कार्य पूर्ण नहीं कराये जाने की स्थिति में विभाग द्वारा तीन बार नोटिस भेज निर्माण कार्य पूर्ण कराने का अनुरोध भी किया जाता है. इसके उपरांत विभाग द्वारा कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाने का कार्य प्रारंभ किया जाता है.
इस प्रावधान के बावजूद भवन निर्माण की दिशा में कुछ विद्यालय प्रधान द्वारा पहल नहीं किया जा रहा है. इसका कारण जो भी रहा हो, आखिरकार इसका खामियाजा बच्चों को ही उठाना पड़ता है.
मालूम हो कि 15 विद्यालयों में कुल 79 यूनिट भवन निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाना था. लेकिन विद्यालय प्रधानों के मनमानी के कारण महज 13 विद्यालय में 30 यूनिट वर्ग कक्ष का निर्माण कार्य पूर्ण कर संबंधित विद्यालय प्रधानों को विभाग द्वारा एनओसी दिया गया है. विभाग द्वारा उक्त सभी विद्यालयों के विद्यालय प्रधानों के द्वारा निर्धारित समयवधि के काफी समय बीत जाने के बाद भी भवन निर्माण कार्य को पूर्ण नहीं कराया गया है.
इस बाबत पूछने पर एई विनोद कुमार ने बताया कि भवन निर्माण को लेकर संबंधितों को राशि उपलब्ध करा दी गयी है. जांच के दौरान आधे – अधूरे भवन निर्माण कार्य कर छोड़ने वाले प्रधानों को नोटिस भेजा जा चुका है. श्री कुमार ने कहा कि नोटिस मिलने के बाद भी यदि कार्य को पूर्ण नहीं कराया जाता है तो संबंधितों के ऊपर समुचित कार्रवाई की जायेगी.
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