मानव सेवा ही है इश्वर की सेवा: आनंद मार्ग

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मानव सेवा ही है इश्वर की सेवा: आनंद मार्ग फोटो – 1कैप्सन – कंबल वितरण करते आचार्यप्रतिनिधि, त्रिवेणीगंज प्रखंड क्षेत्र के योगियाचाही गांव स्थित वार्ड नंबर आठ में आयोजित दो दिवसीय बाबा नाम केवलम अखंड संकीर्तन का समापन सोमवार को किया गया. रविवार से आयोजित बाबा नाम केवलम संकीर्तन से आस पास का वातावरण भक्ति […]

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मानव सेवा ही है इश्वर की सेवा: आनंद मार्ग फोटो – 1कैप्सन – कंबल वितरण करते आचार्यप्रतिनिधि, त्रिवेणीगंज प्रखंड क्षेत्र के योगियाचाही गांव स्थित वार्ड नंबर आठ में आयोजित दो दिवसीय बाबा नाम केवलम अखंड संकीर्तन का समापन सोमवार को किया गया. रविवार से आयोजित बाबा नाम केवलम संकीर्तन से आस पास का वातावरण भक्ति मय बना रहा. संगीत मय संकीर्तन की प्रस्तुति पर भक्त जन झूमते रहे. कीर्तन के उपरांत प्रवचन देने आये आनंदमार्ग के शिक्षा विभाग के केंद्रीय सचिव आचार्य स्वरूपानंद अवधूत ने कहा कि ‘आत्म मोक्षार्थ जगत हिताय च’ यानी प्राणियों को अपनी मुक्ति के लिए साधना तथा जगत के हित के लिए भक्ति या जन सेवा करना निहायत जरूरी है. आचार्य अवधूत ने बताया कि साधना व भक्ति दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माता – पिता को खुश करने के लिए उनके बच्चों को प्यार जताना पड़ता है. ठीक उसी प्रकार परमात्मा को खुश करने के लिए सृष्टि की सेवा करना आवश्यक है. उन्होंने सच्ची भक्ति परमात्मा को खुश करना बताया. सेवा धर्म मिशन के केंद्रीय सचिव आचार्य सवितानंद अवधूत ने कहा कि संस्कृत शब्द के कृत धातु से ही संकीर्तन शब्द बना है. जिसका तात्पर्य होता है जोर से पुकारना. कहा कि कीर्तन में परमात्मा को भक्त पुकारते हैं. उदाहरण देते उन्होंने बताया कि जिस प्रकार प्राणी किसी व्यक्ति हो आवाज लगाते हैं तो वे प्राणी उनके सन्मुख आते हैं. इसी तरीके से जब कीर्तन के माध्यम से भक्त परमात्मा का नाम जपते हैं तो परमात्मा भी भक्त के मानस तरंग के करीब आकर भक्त को अपनी उपस्थिति का अनुभूति करवाते हैं. बाबा नाम केवलम संकीर्तन है सिद्ध मंत्र आचार्य अवधूत ने बताया कि आनंद मार्ग के संस्थापक सदगुरु श्री श्री आनंनमूर्ति जी ने आठ अक्टूबर 1970 को बाबा नाम केवलम कीर्तन को सिद्ध मंत्र के रूप में स्वीकृति प्रदान किया था. कहा कि प्रकृति सृष्ट या मनुष्य सृष्ट ही क्यों ना हो. सम्मिलित कीर्तन के फलस्वरूप सभी बाधा व विपत्तियां मिट जाती है. बताया कि बाढ़, सुखाड़, दुर्भिक्ष, महामारी सहित अन्य कठिनाई निष्ठा पूर्वक कीर्तन करने से खत्म हो जाता है. आनंद मार्ग सेवा दल के सचिव आचार्य नाभातितानंद अवधूत ने बताया कि आनंद मार्ग प्रचारक संघ के विभिन्न शाखाओं द्वारा विश्व के कई देशों में सेवा मूलक कार्य किया जा रहा है. बताया कि कृत मानवता की सेवा के लिए आनंद मार्ग हमेशा से तत्पर रहा है. मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है. समापन के मौके पर कंबल का वितरण संचालन कर्ता जय प्रकाश जी ने बताया कि दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन के मौके पर गरीब व निसहायों के बीच कंबल का वितरण किया गया. इस आयोजन में जय प्रकाश जी, ज्योति प्रकाश जी, आनंद कुमार, राजेश कुमार, प्रभाष कुमार, प्रदीप कुमार सहित अन्य आनंद मार्गियों का सराहनीय योगदान रहा.

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