प्रशासनिक मिलीभगत से जारी है अतक्रिमण का खेल
प्रशासनिक मिलीभगत से जारी है अतिक्रमण का खेल फोटो-09कैप्सन- बाजार में व्याप्त अतिक्रमण प्रतिनिधि, जदिया अतिक्रमण के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय का रवैया भले ही सख्त है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण जदिया बाजार स्थित एसएच 76 व एसएच 91 की जमीन पर आज भी अतिक्रमणकारियों का ही कब्जा बरकरार है. अतिक्रमण की […]
प्रशासनिक मिलीभगत से जारी है अतिक्रमण का खेल फोटो-09कैप्सन- बाजार में व्याप्त अतिक्रमण प्रतिनिधि, जदिया अतिक्रमण के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय का रवैया भले ही सख्त है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण जदिया बाजार स्थित एसएच 76 व एसएच 91 की जमीन पर आज भी अतिक्रमणकारियों का ही कब्जा बरकरार है. अतिक्रमण की चपेट में आ कर उक्त दोनों मुख्य सड़क का स्वरूप ग्रामीण सड़कों में तब्दील हो गया है. स्थिति यह है कि बड़े वाहनों की बात कौन करे लोगों को पांव-पैदल भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.जबकि प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि लोगों की इस समस्या से अनजान बने हुए हैं. जदिया बाजार का हृदय स्थली कहे जाने वाले हनुमान मंदिर चौक से लेकर पेट्रोल पंप तक सड़क को ही अवैध रूप से ऑटो स्टैंड के रूप में तब्दील कर दिया गया है. ऑटो चालकों द्वारा सड़क पर ही यात्रियों को चढ़ाने व उतारने का काम किया जाता है. इस वजह से हमेशा यहां जाम की समस्या बनी रहती है. वहीं दूसरी ओर एसएच 91 पर भी सब्जी, फलों एवं अन्य छोटे-छोटे दुकानदारों ने अवैध तरीके से कब्जा जमा लिया है.जिससे आम लोगों को आवागमन में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.नहीं है बस व ऑटो पड़ाव जदिया बाजार में काफी लंबे समय से बस पड़ाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है.वहीं एसएच 76 एवं एसएच 91 के निर्माण के बाद लंबी दूरी के यात्री बसों का परिचालन प्रारंभ होने से यहां बस पड़ाव की नितांत आवश्यकता है.वहीं ऑटो खड़ी करने के लिए निर्धारित स्थल नहीं रहने के कारण चालकों को बीच सड़क पर ऑटो खड़ी कर यात्रियों को चढ़ाने की विवशता बनी हुई है.यही वजह है कि ऑटो चालक द्वारा बाजार में यत्र-तत्र ऑटो लगा कर यात्रियों को बिठाया जाता है.जिसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ता है. मूकदर्शक बना प्रशासन जदिया बाजार को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं किये जाने का नतीजा है कि इन अतिक्रमणकारियों का मनोबल काफी बढ़ गया है.सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जिस हनुमान मंदिर की तीनों ओर अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया है, वहां अक्सर पुलिस की गश्ती गाड़ी लगी रहती है. इस वाहन पर पुलिस के अधिकारी व जवान मौजूद रहते हैं.लेकिन अतिक्रमण के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं किया जाना प्रशासनिक मिलीभगत को दरशाता है.
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