मनमाने तरीके से स्कूलों में बांटे पैसे
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सुपौल : जिले का सर्व शिक्षा अभियान महज चार माह में दूसरी बार वित्तीय अनियमितता की वजह से सुर्खियों मे है. यूं तो यह विभाग हाल ही में सूबे में 37 वें पायदान पर रह कर सुर्खियों बटोर चुका है. पर, नयी खबर यह है कि राज्य के वित्त मंत्री के क्षेत्र में वित्तीय नियमों […]
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सुपौल : जिले का सर्व शिक्षा अभियान महज चार माह में दूसरी बार वित्तीय अनियमितता की वजह से सुर्खियों मे है. यूं तो यह विभाग हाल ही में सूबे में 37 वें पायदान पर रह कर सुर्खियों बटोर चुका है. पर, नयी खबर यह है कि राज्य के वित्त मंत्री के क्षेत्र में वित्तीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए तीन करोड़ 67 लाख 20 हजार रुपये की अनियमित निकासी की गयी और उसे मनमाने तरीके से बांट भी दिया गया.
अनियमित निकासी इसलिए की यह राशि वित्तीय वर्ष 2014-15 की थी और इसकी निकासी 2015-16 में की गयी है. पूरे मामले का खुलासा पब्लिक विजिलेंस कमेटी के सचिव अनिल कुमार सिंह ने करते हुए मामले की जांच शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों से करते हुए इसकी निगरानी जांच की भी मांग की है.
बजटीय व वित्तीय नियमों की हुई अवहेलना : राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री पोशाक योजना की वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 की बचत राशि दो अरब 06 करोड़ 70 लाख रुपये को बेंच-डेस्क की खरीद के लिए स्कूलों में बांटने का निर्णय लिया गया. इस राशि में से तीन करोड़ 67 लाख 20 हजार रुपये सुपौल के हिस्से में आया. इस राशि को वित्तीय वर्ष 2014-15 में ही बांटा जाना था. पर, इस राशि का वितरण वित्तीय वर्ष 2015-16 में किया जा रहा है, जो पूरी तरह अनियमित है. डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान ने सात अप्रैल को इस बाबत निर्देश जारी किया और विद्यालय के खातों में राशि 13-14 अप्रैल को भेजी गयी है.
बिहार कोषागार संहिता के नियम 176 एवं 77 के अनुसार अगर किसी कारण से राशि का व्यय निर्धारित वित्तीय वर्ष में संभव नहीं हो, तो 31 मार्च तक राशि कोषागार में जमा हो जानी चाहिए.
राशि वितरण में मनमानी : बेंच-डेस्क की राशि के वितरण के लिए निदेशक, बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा 23 जनवरी को ही दिशा- निर्देश दिये गये थे. इसमें स्पष्ट निर्देश था कि सभी विद्यालयों के बीच बराबर-बराबर राशि का वितरण किया जाये. एक बेंच अथवा डेस्क की कीमत तीन हजार निर्धारित की गयी. जिले के 623 मध्य विद्यालयों में इसे वितरित करना था.
इस प्रकार प्रति विद्यालय लगभग 60 हजार रुपये मिलना तय था. पर, विभाग ने मनमाने तरीके से स्कूलों के बीच राशि का वितरण किया. विभाग ने जिसे जितना चाहा, उतनी रकम आवंटित कर दी. उदाहरण के तौर पर आदर्श मध्य विद्यालय को 1.53 लाख, मिडिल स्कूल लाउढ़ को 96 हजार, मिडिल स्कूल बसबिट्टी को 1.62 लाख, तो मिडिल स्कूल लौकहा को 1.80 लाख आवंटित किया गया.
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