लहलहाती फसल हो रही बर्बाद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Sep 2017 3:58 AM (IST)
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परेशानी. किसानों के लिए असली और नकली खाद की पहचान सिरदर्द जिले के कई जगहों पर मिलावटी खाद बनाने का काम धड़ल्ले से चल रहा है. इस कारण मिलावटी खाद के उपयोग से किसानों के खेतों में लहलहाती फसल बर्बाद हो रही है जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होती जा रही है. सुपौल […]
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परेशानी. किसानों के लिए असली और नकली खाद की पहचान सिरदर्द
जिले के कई जगहों पर मिलावटी खाद बनाने का काम धड़ल्ले से चल रहा है. इस कारण मिलावटी खाद के उपयोग से किसानों के खेतों में लहलहाती फसल बर्बाद हो रही है जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होती जा रही है.
सुपौल : जिले के अधिकांश आबादी का आर्थिक आधार कृषि जनित कार्य ही रहा है. आधुनिक दौर में उन्नत पैदावार पाने के लिए किसानों की खेती रासायनिक खाद पर ही निर्भर है. नकली खाद और कीटनाशक दवा साल-दर-साल से बाजार में उपलब्ध है, लेकिन प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है. एक तरफ जहां कालाबाजारियों की बल्ले-बल्ले हो रही है. वहीं रबी हो या खरीफ या फिर गरमा की फसल खाद की किल्लत से जूझना किसानों की नियति बन गयी है. जिले के कई जगहों पर मिलावटी खाद बनाने का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है. जिस कारण मिलावटी खाद के उपयोग से किसानों के खेतों में लहलहाते फसल बर्बाद हो रहे हैं.
किसानों की आम शिकायत रहती है कि फसल में समुचित मात्रा में खाद देने के बावजूद उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं हो पाता है. किसानों का कहना है कि मिलावटी खाद के कारण ही संभवत: फसल की उपज कम होती है. बाजार क्षेत्र में गिने चुने खाद बीज की दुकान संचालित है. जहां उक्त दुकानदारों द्वारा जिस तरह के खाद किसानों को उपलब्ध कराये जाते हैं. किसान बिना जांच परख किये अपने फसल में डाल देते हैं. किसानों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या यह है कि असली और नकली खाद की पहचान उनसबों के लिए आसान नहीं है.
पटना की प्रयोगशाला में ही संभव है जांच
यह केवल रासायनिक जांच से ही संभव हो पाता है कि कौन सी खाद असली है और कौन नकली. इसके लिए पटना की प्रयोगशाला में ही जांच संभव है. पुराने एवं अनुभवी किसान बड़ी मुश्किल से असली और नकली में फर्क समझते हैं. जिले से नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में खाद की तस्करी होने की बात लगातार सामने आ रही है. जिसका मुख्य केंद्र जिले के सिमराही बाजार, भीमनगर व कुनौली है, जो खाद का अंतरराष्ट्रीय बाजार भी कहलाता है. नेपाल भेजी जाने वाली खाद में यूरिया की सर्वाधिक मात्रा होती है. स्थानीय स्तर पर भी रिपैकिंग होने की चर्चा है. कई बार तस्करी के खाद सहित तस्कर को भी गिरफ्तार किया गया था.
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खाद दुकानों की जांच निरंतर जारी है. खाद के नमूने लेकर लैब भेजा जा रहा है. लैब से रिपोर्ट आने के बाद जहां नकली की पुष्टि होगी वहां संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई की जायेगी. जबकि सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी को भी निर्देश दिया गया है कि प्रखंड क्षेत्र के सभी दुकानों की ससमय जांच करें.
पीके झा, जिला कृषि पदाधिकारी, सुपौल
नकली खाद और कीटनाशक बाजार में उपलब्ध है. इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है. यह महज एक संयोग ही है कि जिले में सीजन की शुरुआत होने के बावजूद गड़बड़ी का कोई मामला सामने नहीं आया है. आसपास के जिलों में मिलावटी खाद की चर्चा सामने आ चुकी है. सबसे अधिक छेड़छाड़ डीएपी खाद में की जाती है.
डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन, 46 प्रतिशत फास्फोरस होना चाहिए. फर्टिलाइजर से जुड़े माफिया द्वारा डीएपी के बोरे में एनपीके की पैकिंग कर दी जाती है. जिसकी संरचना 20:20:00 की होती है. जानकारों के अनुसार इस गोरखधंधा का सबसे बड़ा बाजार गुलाबबाग और बिहारीगंज है. यहां से कोसी एवं पूर्णिया के इलाके में नकली खादी की खेप भेजी जाती है.
अंकित मूल्य से अधिक पर खाद खरीदकर भी जब उत्पादन में बढ़ोतरी नहीं होती है तो किसान खुद को ठगा महसूस करते हैं. दूसरी ओर ईमानदारी से खाद का व्यवसाय करने वाले व्यापारियों की भी मुश्किलें कम नहीं हो रही है. मांग की तुलना में खाद की उपलब्धता कम रहती है, जिससे उन्हें बेवजह किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ता है. कुनौली पंचायत के किसान लखन शर्मा कहते हैं कि जिस दिन से रासायनिक उर्वरक की बिक्री पर नियंत्रण सरकार द्वारा हटा लिया गया है.
तब से इसकी कीमतें बेलगाम हो गयी है. वहीं गीता प्रसाद सिंह कहते हैं कि अधिकृत विक्रेता से खरीदी गयी खाद की गारंटी विक्रेता भी नहीं देते हैं कि यह खाद असली है या नकली. कृषि विभाग द्वारा निगरानी व रासायनिक उर्वरक की जांच की व्यवस्था नहीं रहने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में नकली खाद का कारोबार फल-फूल रहा है. किसान सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि एक तो डीएपी की आसमान छूती कीमत, उस पर से असली और नकली के चक्कर में फंस कर किसान धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं.
कमलपुर पंचात के किसान गुलाब सिंह ने कहा कि हम तो अनपढ़ हैं, नहीं जानते कि अधिकृत विक्रेता कौन सी खाद दे रहे हैं. जब पैदावार अच्छी नहीं होती तब पता चलता है कि दी गयी खाद नकली थी. किसान रतन सिंह ने बताया कि सरकार मात्र घोषणा करती है लेकिन हर तरफ से किसानों का ही शोषण हो रहा है. खाद, बीज सभी नकली होते हैं. जिसका खामियाजा भुगत कर किसान गरीबी के बोझ तले दबते जा रहे हैं.
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