सीवान नगर परिषद में 6 महीने में हुए भुगतानों का क्या है राज? मुख्य पार्षद ने जांच तक रोक की मांग की
फोटो : नगर परिषद की तस्वीर.
Siwan Nagar Parishad: सीवान नगर परिषद में पिछले छह महीनों में किए गए विभागीय भुगतानों पर मुख्य पार्षद सेंपी देवी ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने नगर विकास विभाग से इन भुगतानों की उच्चस्तरीय जांच और जांच पूरी होने तक रोक लगाने की मांग की है.
Siwan Nagar Parishad: नगर परिषद सीवान में विभागीय कार्यों के नाम पर पिछले छह माह में किये गये भुगतानों को लेकर मुख्य पार्षद सेंपी देवी ने सवाल उठाये हैं. उन्होंने नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर इन भुगतानों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
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मुख्य पार्षद ने जांच पूरी होने तक विभागीय कार्यों के नाम पर होने वाले भुगतानों पर रोक लगाने का भी अनुरोध किया है. उनका कहना है कि सार्वजनिक राशि से जुड़े मामलों में पूरी प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे भुगतान किया जाना चाहिए.
छह महीने के सभी भुगतानों की जांच की मांग
मुख्य पार्षद ने अपने पत्र में पिछले छह माह में किये गये सभी विभागीय भुगतानों की योजना और काम के अनुसार जांच कराने की मांग की है. उन्होंने यह जानने की मांग की है कि जिन कार्यों के लिए भुगतान किया गया, उनके लिए स्वीकृत प्राक्कलन, तकनीकी मंजूरी, कार्यादेश, मापी पुस्तिका, काम पूरा होने का प्रमाण, गुणवत्ता जांच, बिल-वाउचर और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गयी थी या नहीं.
उन्होंने कहा कि किसी काम का भुगतान केवल स्थल निरीक्षण के आधार पर किया गया या मौके पर हुए काम का संबंधित कागजात से भी मिलान किया गया, इसकी भी जांच जरूरी है. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं.
पहले बनी जांच टीम की रिपोर्ट पर भी सवाल
मुख्य पार्षद ने पत्र में तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा नगर परिषद के विभागीय कार्यों की जांच के लिए गठित जांच टीम का भी उल्लेख किया है. उनके अनुसार, जांच टीम ने कुछ स्थानों का निरीक्षण किया था.
उन्होंने विभाग से यह स्पष्ट कराने की मांग की है कि जांच केवल स्थल निरीक्षण तक सीमित रही थी या प्रत्येक योजना से जुड़े तकनीकी और वित्तीय कागजात की भी जांच की गयी थी. यदि जांच पूरी हुई थी तो उसका विस्तृत प्रतिवेदन जिला पदाधिकारी को सौंपा गया था या नहीं, इसकी भी जांच कराने की मांग की गयी है.
मुख्य पार्षद ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि जांच टीम की रिपोर्ट के बाद विभागीय कार्यों के भुगतान की अनुमति दी गयी थी, तो इसकी जानकारी नगर परिषद के मुख्य पार्षद और उपमुख्य पार्षद को दी गयी थी या नहीं.
अधूरे काम और दोहरे भुगतान की भी जांच हो
मुख्य पार्षद ने स्वीकृत प्राक्कलन और मौके पर हुए काम में अंतर, काम पूरा होने से पहले भुगतान, अमानक निर्माण, एक ही काम के नाम पर दोबारा भुगतान, गलत मापी अथवा अन्य वित्तीय अनियमितता की आशंका वाले मामलों की जांच कराने की मांग की है.
उन्होंने संबंधित योजनाओं की मूल मापी पुस्तिका, बिल-वाउचर, तकनीकी कागजात और भुगतान से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है.
गड़बड़ी मिली तो तय हो जिम्मेदारी
पत्र में कहा गया है कि जांच के दौरान किसी काम में अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार पदाधिकारी, कर्मचारी, एजेंसी या अन्य संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. इसके बाद नियम के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.
साथ ही पूर्व में गठित जांच टीम की जांच की भी स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की गयी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पहले हुई जांच में सभी जरूरी पहलुओं की पड़ताल की गयी थी या नहीं.
सक्षम अधिकारियों की समिति बनाने का अनुरोध
मुख्य पार्षद सेंपी देवी ने नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से पूरे मामले की जांच के लिए सक्षम अधिकारियों की समिति गठित करने का अनुरोध किया है. उन्होंने जांच पूरी होने तक विभागीय कार्यों के नाम पर होने वाले भुगतानों पर रोक लगाने की मांग दोहरायी है.
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