मिलाद-उन-नबी पर्व को लेकर विधि-व्यवस्था, शांति व व्यवस्था को लेकर डीएम ने की समीक्षा बैठक
पदाधिकारी के साथ बैठक करते जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव
Milad-un-Nabi Festival : मिलाद-उन-नबी पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए छपरा में जिला प्रशासन ने कमर कस ली है. जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने वरीय अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और विशेष दिशा-निर्देश जारी किए.
Milad-un-Nabi Festival : छपरा में मिलाद-उन-नबी पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने वरीय प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर विधि-व्यवस्था की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को पूरी सतर्कता और आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया. जुलूस के रूट, समय, लाइसेंस और आयोजकों की जिम्मेदारी को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए.
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शांति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डीएम ने की समीक्षा
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में मिलाद-उन-नबी पर्व को लेकर जिले की विधि-व्यवस्था, शांति और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई. बैठक में वरीय प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों के साथ विधि-व्यवस्था से जुड़े सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे.
शांति समिति के सदस्यों से पहले लिया गया फीडबैक
प्रशासनिक बैठक से पहले डीएम ने विभिन्न थाना क्षेत्रों की शांति समितियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. उन्होंने स्थानीय स्तर पर पर्व की तैयारियों, जुलूस के प्रस्तावित मार्ग, संवेदनशील स्थलों और संभावित चुनौतियों की जानकारी ली. शांति समिति के सदस्यों से प्रशासन और पुलिस के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने की अपील की गई.
शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने पर जोर
डीएम ने शांति समिति के सदस्यों से पर्व के दौरान सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारा बनाए रखने में सक्रिय सहयोग की अपील की. उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर संवाद मजबूत रहने से संभावित समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सकता है.
अनुमंडल से थाना स्तर तक शांति समिति की बैठक अनिवार्य
डीएम ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अनुमंडल से लेकर थाना स्तर तक शांति समिति की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित कराने का निर्देश दिया. इन बैठकों में शांति समिति के सदस्यों के साथ जुलूस आयोजकों और जिम्मेदार लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने को कहा गया.
आयोजकों के साथ लगातार संवाद रखने का निर्देश
प्रशासन ने जुलूस के आयोजकों के साथ स्थानीय स्तर पर निरंतर संवाद बनाए रखने पर जोर दिया. अधिकारियों को जुलूस को व्यवस्थित, अनुशासित और शांतिपूर्ण रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया. थाना अध्यक्षों को स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों, शांति समिति के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा गया.
जुलूस के लाइसेंस और रूट सत्यापन पर विशेष जोर
डीएम ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जुलूस के लिए नियमानुसार लाइसेंस का आवेदन लिया जाए. आवेदन में जुलूस का निर्धारित रूट, समय, अनुमानित संख्या और जुलूस में शामिल होने वाले घोड़े, हाथी, ऊंट समेत अन्य आवश्यक विवरण दर्ज कराया जाए. प्रशासन को रूट का सत्यापन भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.
आयोजकों और वालंटियरों की जानकारी रखी जाएगी
जुलूस के आयोजकों और उनके सहयोगियों की पहचान संबंधी आवश्यक जानकारी का विधिवत संधारण करने को कहा गया. इसमें आधार कार्ड और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी शामिल है. साथ ही जुलूस के साथ पर्याप्त संख्या में जिम्मेदार वालंटियरों की मौजूदगी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि भीड़ को नियंत्रित और व्यवस्थित रखने में मदद मिल सके.
जुलूस में डीजे पर पूरी तरह रोक
डीएम ने स्पष्ट किया कि जुलूस में डीजे का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस निर्देश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने को कहा. किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
तय समय से अलग नहीं निकलेगा जुलूस
प्रशासन ने जुलूस के निर्धारित समय को लेकर भी सख्ती दिखाई है. आवेदन में दर्ज समय और जुलूस के वास्तविक संचालन के समय में किसी तरह का अंतर स्वीकार्य नहीं होगा. निर्धारित समय का उल्लंघन होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
विधि-व्यवस्था को रूटीन मैटर न समझें
बैठक के अंत में डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मिलाद-उन-नबी के दौरान विधि-व्यवस्था को केवल रूटीन मैटर के तौर पर नहीं लिया जाए. स्थानीय परिस्थितियों और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पहले से व्यावहारिक और ठोस तैयारी करने की जरूरत है.
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कम्युनिटी के साथ ट्रस्ट बिल्डिंग पर जोर
डीएम ने कम्युनिटी के साथ ट्रस्ट बिल्डिंग पर विशेष ध्यान देने को कहा. स्थानीय लोगों के साथ निरंतर संवाद के जरिए सकारात्मक माहौल बनाने, आपसी विश्वास बढ़ाने और संभावित समस्याओं का समय रहते बातचीत के माध्यम से समाधान करने पर जोर दिया गया.
नए जुलूस रूट को लेकर भी स्पष्ट निर्देश
जिलाधिकारी ने मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में किसी नए रूट का निर्धारण नहीं करने का निर्देश दिया. निर्धारित रूट में ऐसा कोई बदलाव या विभाजन नहीं किया जाए, जिससे अनावश्यक व्यवधान की स्थिति पैदा हो. स्थानीय संवेदनशीलता के आकलन के बाद जरूरत पड़ने पर जुलूस के रूट को छोटा किया जा सकता है.
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