...मुझे खुशी मिली इतनी कि मन में ना समाये

Published at :02 Apr 2016 2:36 AM (IST)
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...मुझे खुशी मिली इतनी कि मन में ना समाये

दिघवारा : शराबबंदी के पहले दिन शुक्रवार को जहां मुख्य बाजार में बंद पड़ी शराब दुकानों के पास वीरानगी दिखी व मयखाने में सन्नाटा दिखा, वहीं दूसरी तरफ दिघवारा नगर पंचायत के वार्ड 10 के राईपट्टी मुहल्ले में उषा व शिवकुमारी देवी के घरों के पास उत्सवी व गहमागहमी का नजारा दिखा और लोगों की […]

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दिघवारा : शराबबंदी के पहले दिन शुक्रवार को जहां मुख्य बाजार में बंद पड़ी शराब दुकानों के पास वीरानगी दिखी व मयखाने में सन्नाटा दिखा, वहीं दूसरी तरफ दिघवारा नगर पंचायत के वार्ड 10 के राईपट्टी मुहल्ले में उषा व शिवकुमारी देवी के घरों के पास उत्सवी व गहमागहमी का नजारा दिखा और लोगों की जुबान पर दोनों महिलाओं के अनोखे उपवास की चर्चा सुनाई दी.
महिलाओं को यह कहते सुना गया कि विभिन्न पर्वों में उपवास की चर्चा तो सुनी थी, पर पहली बार पतियों की शराब छोड़ने की उम्मीद व घरों में खुशी लौटने की कामना के साथ उपवास कर मुहल्ले की इन दोनों महिलाओं ने न केवल अनूठा काम किया है, बल्कि समाज की महिलाओं को एक सकारात्मक संदेश भी दिया है.दोनों की घरों के पास से गुजरने वाली अधिकतर परिचित महिलाओं ने दोनों महिलाओं के उपवास को सही बताते हुए उठाये गये अनोखे कदम की प्रशंसा की एवं हर महिलाओं को इससे सबक लेने की बात कही.
आमी में गंगा में किया स्नान व पूजा : एक ही उद्देश्य के साथ उपवास करने वाली दोनों महिलाओं ने बताया कि वे लोग शुक्रवार की सुबह एक साथ अंबिका भवानी घाट आमी पहुंच कर आस्था भाव के साथ गंगा में डुबकी लगायी फिर मां अंबिका की पूजा-अर्चना की एवं अपने पतियों की शराब की बुरी लत के छूट जाने की मन्नत भी मांगी.
दिन भर रखा उपवास और शाम में घरों में की पूजा : दोनों ने आमी मंदिर से लौट कर घरेलू कार्यों को उपवास अवस्था में ही पूरा किया एवं शाम में घरों के देवता की पूजा कर प्रसाद के रूप में साबूदाना ग्रहण किया एवं मुहल्ले के लोगों के बीच प्रसाद बांटा.उपवास कर रही उषा देवी की बेटी करिश्मा ने दिन भर मां के कार्यों में हाथ बंटाया.वहीं शिवकुमारी देवी को भी पड़ोसी एवं बेटों ने हरसंभव सहयोग दिया.
पतियों ने भी शराब न पीने की ली शपथ : उपवास करनेवाली महिलाओं की खुशी शुक्रवार को उस समय दुगुनी हो गयी जब गांव वालों के समझाने पर पति पारस प्रसाद व अवधेश प्रसाद ने शराब न छूने की शपथ भी ली.
इतना ही नहीं उपवास करने वाली महिलाएं पतियों के स्वभाव को लेकर सशंकित थीं, मगर उनकी आशंका उस समय दूर हो गयी जब पतियों को खुद पूजा के लिए फल व अन्य सामान खरीद कर लाते देखा.
गांव की महिलाओं ने बताया अनुकरणीय कदम : गांव की महिलाओं ने भी उषा व शिवकुमारी के कार्यों की प्रशंसा की एवं इसे अनुकरणीय कदम बताया. राजकुमारी देवी, बिभा देवी, इंदू देवी, सुशीला देवी, रिंकी देवी, माया देवी व मंजू देवी ने कहा कि अपने पतियों की शराब छुड़ाने व घरों की.
ख़ुशी लौटाने के लिए उषा व शिवकुमारी ने जिस उपवास का सहारा लिया, उसकी जितनी प्रशंसा की जाये, वह कम है.
दिन भर बजती रहीं घंटियां : खबर छपने के बाद दोनों महिलाओं के मोबाइल की घंटियां दिन भर घनघनाती दिखीं, क्योंकि बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल में रहने वाले दर्जनों रिश्तेदारों ने समाचार पत्र में खबर व तसवीर देखने के बाद कॉल कर अपनी शुभकामनाएं दी और खुशी का इजहार कर इसे गर्व का विषय बताया.
सबसे ज्यादा कॉल कोलकाता में रहनेवाले रिश्तेदारों ने किये. समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, सीवान, गोपालगंज व मुजफ्फरपुर से भी संबंधियों ने कॉल कर उपवास कार्य को सराहा.
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