नहर व नलकूप हुए बेकार

Published at :18 Jan 2016 6:37 PM (IST)
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नहर व नलकूप हुए बेकार

नहर व नलकूप हुए बेकार किसान भगवान भरोसे करते हैं सिंचाई संवाददाता, मांझीमांझी प्रखंड की सिंचाई व्यवस्था पूर्ण रूपेण चरमरा गयी है. इससे किसान परेशान व लाचार हैं. प्रखंड में 16 राजकीय नलकूप हैं. इनमें से ज्यादातर नलकूप खराब पड़े हैं. महम्मदपुर, मांझी पूर्वी, मांझी पश्चिमी, घोरहट, डुमरी, नसीरा के राजकीय नलकूप वर्षों से खराब […]

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नहर व नलकूप हुए बेकार किसान भगवान भरोसे करते हैं सिंचाई संवाददाता, मांझीमांझी प्रखंड की सिंचाई व्यवस्था पूर्ण रूपेण चरमरा गयी है. इससे किसान परेशान व लाचार हैं. प्रखंड में 16 राजकीय नलकूप हैं. इनमें से ज्यादातर नलकूप खराब पड़े हैं. महम्मदपुर, मांझी पूर्वी, मांझी पश्चिमी, घोरहट, डुमरी, नसीरा के राजकीय नलकूप वर्षों से खराब पड़े हैं. खराब नलकूप जीर्णोद्धार की बाट जोह रहे हैं. जहां के नलकूप ठीक हैं, वहां नाले या तो है ही नहीं व जहां हैं वह ध्वस्त हो गये हैं. इस कारण खेतों को पानी नहीं मिल रहा है. राजकीय नलकूप में कहीं बिजली, तो कहीं ऑपरेटर के अभाव में आधे से अधिक नलकूप बंद हैं. जहां के नलकूप ठीक हैं, वहां ऑपरेटर और बिजली नहीं है. इस दिशा में कोई ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जा रहा है. इधर, बंगरा, मदनसाठ, महुआ, गोबरही मुख्य नहर है, जिनसे कई उपनहरें निकली हुई हैं. वर्षों से नहर या उपनहर में आज तक पानी ही नहीं आया है. कहीं-कहीं उपनहरों का नामोंनिशान भी मिट रहा है. नहर, पइन की उगाही के नाम पर राशि की बंदरबांट होती है. प्रखंड में सिंचाई के नाम पर राजकीय नलकूप या नहर की सुविधा है ही नहीं. यहां के किसान भगवान भरोसे खेती करते हैं. सिंचाई के नाम पर और पंपिंग सेट से महंगी दरों पर पानी खरीद कर रबी की सिंचाई को विवश हैं. 25 पंचायतों में 129 राजस्व गांवों वाला यह क्षेत्र सिंचाई व्यवस्था के अभाव में कृषि से विमुख हो रहा है. परती खेतों का रकबा बढ़ता जा रहा है. ताजपुर में करोड़ों की लागत से बना पंप नहर योजना बन कर तैयार तो है, लेकिन आज तक बिजली की सुविधा से वंचित है. इस पंप नहर के चालू होने का इंतजार किसान कर रहे हैं.

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