आलू, सूरजमुखी और मसूर की बोआई के लिए पूसा विश्वविद्यालय ने जारी की एडवाइजरी, जानें वैज्ञानिक तरीके
आलू, सूरजमुखी और मसूर की बोआई के लिए पूसा विश्वविद्यालय ने जारी की एडवाइजरी, जानें वैज्ञानिक तरीके
पूसा कृषि विश्वविद्यालय ने रबी फसलों की उन्नत खेती के लिए किसानों को विशेष एडवाइजरी जारी की है. आलू, सूरजमुखी, मसूर और फूलगोभी की बेहतर पैदावार के लिए वैज्ञानिक तरीके जानें.
किसान एडवाइजरी पूसा: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने किसानों के लिए समसामयिक कृषि परामर्श जारी किया है. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने रबी मौसम की मुख्य फसलों जैसे आलू, सूरजमुखी, मसूर तथा फूलगोभी की उन्नत खेती को लेकर किसानों को त्वरित कदम उठाने की सलाह दी है.
आलू की बोआई: उन्नत किस्में और खाद प्रबंधन
वैज्ञानिकों के अनुसार अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट ऊपरी भूमि आलू के लिए सबसे उपयुक्त है. खेत को 2-3 जुताई और हैरो चलाकर भुरभुरा बनाएं तथा मेड़-नाली पद्धति से बोआई करें.
- प्रमुख किस्में: कुफरी ख्याति, कुफरी पुखराज, कुफरी ज्योति, कुफरी लोहित एवं कुफरी नीलकंठ.
- बीज दर व उपचार: 30-40 ग्राम वजन के कंद 25 क्विंटल/हेक्टेयर तथा 40-50 ग्राम वाले कंद 30 क्विंटल/हेक्टेयर प्रयोग करें. कंदों को 2.5 ग्राम प्रति लीटर मैन्कोजेब के घोल से उपचारित करें.
- खाद व उर्वरक: 20-25 टन गोबर की खाद, 150 किग्रा नाइट्रोजन, 90 किग्रा फॉस्फोरस एवं 100 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर दें. आधी नाइट्रोजन, पूरी फास्फोरस व पोटाश बोआई के समय तथा शेष आधी नाइट्रोजन 30 दिन बाद मिट्टी चढ़ाते समय डालें.
सूरजमुखी की समय पर करें बोआई
किसान सूरजमुखी की बोआई जल्द पूरी कर लें. बीज को 18 घंटे पानी में भिगोकर 5-6 घंटे छाया में सुखाएं और थायरम या कैप्टान (2 ग्राम/किग्रा) से उपचारित करें.
- किस्में व बीज दर: कम्पोजिट किस्में (मोर्डेन, पराडेविक, डीआरएसएफ-108) हेतु 8 किग्रा/हेक्टेयर तथा संकर किस्में (बीएसएच-1, एमएसएफएच-8, एमएसएफएच-17, केबीएसएच-44) हेतु 5 किग्रा/हेक्टेयर बीज रखें.
- दूरी: कम्पोजिट के लिए 45 गुणा 20 सेमी तथा संकर के लिए 60 गुणा 30 सेमी की दूरी रखें. 4-6 सेमी गहराई पर 2-3 बीज डालें.
- उर्वरक: कम्पोजिट में 30:80:40 तथा संकर में 40:90:40 (एन:पी:के) आधार रूप में डालें. बाद में नाइट्रोजन का ऊपरिवेशन सिंचाई व फूल आने पर करें.
मसूर की खेती और बीज उपचार
उत्तर बिहार के लिए मल्लिका (के-15), अरुण (पीएल 77-12), केएलएस-218, एचयूएल-57, डब्ल्यूबीएल-17 एवं पीएल-5 किस्में उपयुक्त हैं. बोआई से पूर्व कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम/किग्रा) और क्लोरपायरीफॉस (2-4 मिली/किग्रा) से उपचार करें. बोआई के समय राइजोबियम कल्चर के 5 पैकेट प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें. छोटे दानों के लिए 30-35 किग्रा तथा बड़े दानों के लिए 40-45 किग्रा प्रति हेक्टेयर बीज दर रखें. 20 किग्रा नाइट्रोजन, 45 किग्रा फॉस्फोरस, 20 किग्रा पोटाश व 20 किग्रा सल्फर प्रति हेक्टेयर दें.
फूलगोभी की रोपाई व देखरेख
इस समय मध्यम अवधि वाली किस्मों (पूसा हिम ज्योति, डी-96, पंत शुभ्रा) की रोपाई करें तथा पछेती किस्मों (पूसा स्नोबॉल-1, पूसा हाइब्रिड-2) की बोआई करें. प्रति हेक्टेयर 350-400 ग्राम बीज पर्याप्त है. खेत में गोबर की खाद सहित संतुलित उर्वरक, 10-15 किग्रा बोरेक्स व 1-2 किग्रा अमोनियम मॉलिब्डेट डालें.
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