हाजिरी बना दे दी जाती छुट्टी
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :24 Jun 2015 7:51 AM
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हाल उत्क्रमित मध्य विद्यालय भानपुर का खानपुर : प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा के प्रति विभाग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लाख दावे कर ले लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रहा है़ चर्चा हो रही है उत्क्रमित मध्य विद्यालय भानपुर के जिसे प्रमोशन कर उच्च विद्यालय का दर्जा तो मिल गया लेकिन व्यवस्था […]
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हाल उत्क्रमित मध्य विद्यालय भानपुर का
खानपुर : प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा के प्रति विभाग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लाख दावे कर ले लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रहा है़ चर्चा हो रही है उत्क्रमित मध्य विद्यालय भानपुर के जिसे प्रमोशन कर उच्च विद्यालय का दर्जा तो मिल गया लेकिन व्यवस्था प्राथमिक स्कूल से बदतर है़
इस विद्यालय के कक्षा 9 में कुल 110 छात्र छात्राओं का नामांकन तो हो गया़ बच्चे प्रतिदिन स्कूल भी आते हैं. लेकिन इन्हें पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक की नियुक्ति या प्रतिनियुक्ति नहीं की गयी है और न ही इन्हें बैठने के लिए फर्नीचर व कमरे की व्यवस्था है.
बच्चे स्कूल आकर एक कमरे में दरी बिछाकर फर्श पर बैठने को मजबूर हैं. आलम यह है कि संसाधन व शिक्षक की घोर किल्लत के कारण उपस्थिति बनाकर बच्चों को छुट्टी दे दी जाती है़ अब आप सोच सकते हैं कि किस प्रकार की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को मिलती होगी़ मजबूरन बिन गुरू के ज्ञान पाये ही बच्चों को वापस घर की ओर रूख करना पड़ता है़ ऐसी व्यवस्था अपने आप में एक प्रश्न बनकर रेंग रहा है़ बताया गया कि तीन माह बीत जाने के बाद भी न तो संसाधन की व्यवस्था की गयी है और न ही इन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षकों की बहाली की गयी है.
भविष्य की चिंता में डूबे बच्चे
कक्षा नौवीं की छात्र सुष्मिता कुमारी, नेहा कुमारी, अंजली कुमारी, निभा कुमारी, मीनाक्षी कुमारी, कंचन कुमारी, ममता कुमारी, खुशबू कुमारी, जीनत प्रवीण आदि का बताना है कि हमलोग नामांकन तो करा लिए लेकिन यहां न तो बैठने की व्यवस्था है और न हीं पढ़ाने के लिए शिक्षक है़. बिना ज्ञान पाये ही उपस्थिति बनाकर छुट्टी दे दी जाती है़ हमलोगों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है़ इधर इसी विद्यालय के कक्षा 1 से 8 तक की व्यवस्था और चिंतनीय है.
वर्ग 1 से 8 में 800 बच्चों को पढ़ाने के लिए 9 शिक्षक तो हैं लेकिन इसमें 1 एचएम तो 1 शिक्षक सीआरसी कोर्डिनेटर हैं. वहीं एक शिक्षक लिपिक कार्य में रहते हैं इस तरह महज छह शिक्षकों के जिम्मे 800 बच्चों का भविष्य निर्भर है जबकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत 40 : 1 की व्यवस्था होनी चाहिए़ लेकिन यहां 150:1 है. इसी से आप सोचिए कि बच्चों का भविष्य क्या होगा.
शिक्षक संघ ने भी जतायी चिंता
शिक्षक व टीईटी एसटीईटी शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष अविनाश कुमार ने व्यवस्था के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है. शिक्षकों की कमी व अव्यवस्था के बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना बेमानी होगी जबकि एचएम द्वारा कई बार अधिकारी को समस्या से अवगत कराया जा चुका है़ कक्षा 6 से 8 में कुल 450 बच्चे नामांकित है़ और इन्हें पढ़ाने के लिए एक भी स्नातक ग्रेड के शिक्षक नहीं है. यह व्यवस्था विभाग का पोल खोल कर रख दिया है ज़बकि इसे माध्यमिक का दर्जा मिल चुका है.
कहते हैं एचएम
विद्यालय के एचएम मनोज कुमार ठाकुर ने बताया कि बच्चों की उपस्थिति के अनुसार न तो शिक्षक हैं न हीं बैठने की व्यवस्था है. कक्षा नौ में नामांकित बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं रहने के कारण हाजिरी बनाकर छुट्टी दे दी जाती है. इसकी शिकायत विभाग से की गयी है.
कहते हैं अधिकारी
बीइओ देवशरण प्रसाद से पूछने पर बताया कि हमें प्रतिनियोजन का निर्देश नहीं है. उसी विद्यालय के शिक्षकों को पढ़ाना है़ आदेश मिलने के बाद हीं प्रतिनियोजन किया जायेगा.
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