सहरसा में 4 लाख 278 महिलाओं को पहली किस्त का लाभ, 59 को ऋण मंजूर, सहरसा में ‘समृद्ध महिला’ अभियान की शुरुआत
फोटो - सहरसा - कार्यक्रम में भाग लेते डीएम, डीडीसी व अन्य | Prabhat Khabar Network
बिहार में समृद्ध महिला समृद्ध बिहार अभियान का शुभारंभ, जीविका दीदियों को मिला रोजगार और ऋण का लाभ। जानें कैसे बदल रही है ग्रामीण अर्थव्यवस्था।
Samriddh Mahila Samriddh Bihar: सहरसा में गांव की महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में गुरुवार को एक बड़ा कदम उठाया गया. ‘समृद्ध महिला, समृद्ध बिहार’ अभियान के राज्यस्तरीय शुभारंभ का सहरसा में सीधा प्रसारण किया गया. इस दौरान जिले की हजारों महिला लाभुकों के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना और जीविका निधि से जुड़ी कई घोषणाएं और वित्तीय सहायता सामने आयी.
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पटना के बापू सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जिला मुख्यालय स्थित एनआईसी सभागार में किया गया. जिलाधिकारी दीपेश कुमार की अध्यक्षता में जीविका दीदियों और संबंधित पदाधिकारियों ने कार्यक्रम देखा.
सहरसा की 2194 महिलाओं को मिली पहली किस्त
राज्यस्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पांच लाख महिला लाभुकों को पहली किस्त की राशि का अंतरण किया गया.
इसी क्रम में सहरसा जिले की 2194 महिला लाभुकों को भी योजना की पहली किस्त की राशि दी गयी. इससे पहले जिले के 3 लाख 98 हजार 84 लाभुकों को पहली किस्त की राशि मिल चुकी थी.
गुरुवार के अंतरण के बाद सहरसा में कुल 4 लाख 278 महिला लाभुक पहली किस्त से लाभान्वित हो चुकी हैं.
यह राशि महिलाओं को स्वरोजगार और रोजगार से जुड़ी गतिविधियां शुरू करने में आर्थिक आधार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी जा रही है.
2010 महिलाओं को दूसरी किस्त भी मिली
कार्यक्रम के दौरान जिले की 2010 महिला लाभुकों को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की दूसरी किस्त की राशि भी प्रदान की गयी.
पहली किस्त के बाद दूसरी किस्त का लाभ मिलने से इन महिलाओं को अपनी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है. योजना का उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें आय अर्जित करने वाली गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है.
जीविका निधि से 59 महिलाओं का ऋण मंजूर
महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए जीविका निधि के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी चल रही है.
सहरसा जिले में जीविका निधि से ऋण प्राप्त करने के लिए कुल 209 आवेदन मिले हैं. इनमें से 59 आवेदनों का ऋण अनुमोदित किया जा चुका है, जबकि 150 आवेदन अभी प्रक्रियाधीन हैं.
ऋण की सुविधा मिलने के बाद महिलाएं स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार और स्वरोजगार की गतिविधियां शुरू कर सकेंगी.
ग्रामीण हाट से गांव में ही बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
राज्यस्तरीय कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से 112 ग्रामीण हाट के निर्माण का कार्यारंभ भी किया गया.
ग्रामीण हाट स्थानीय महिलाओं, किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए अपने उत्पाद बेचने का बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. इससे गांवों में स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है.
सहरसा में जीविका दीदियों ने देखा सीधा प्रसारण
एनआईसी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जीविका दीदियों ने राज्यस्तरीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा. कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त गौरव कुमार और जीविका डीपीएम श्लोक कुमार मौजूद रहे.
कार्यक्रम की शुरुआत में जीविका दीदियों ने जिलाधिकारी दीपेश कुमार को बुके देकर सम्मानित किया.
डीएम ने कहा- अधिक महिलाओं तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने जीविका दीदियों को उद्यमिता और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
उन्होंने योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र महिलाओं तक पहुंचाने पर जोर दिया. उनका कहना था कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब जरूरतमंद और पात्र महिलाओं को समय पर इसका लाभ मिले और वे इसका इस्तेमाल अपनी आजीविका मजबूत करने के लिए कर सकें.
Samriddh Mahila Samriddh Bihar: महिला आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
‘समृद्ध महिला, समृद्ध बिहार’ अभियान को महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार, ऋण और बाजार से जोड़ने की कोशिश का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. यदि महिलाएं स्थानीय स्तर पर कारोबार शुरू करती हैं तो इससे परिवार की आय बढ़ने के साथ गांव में ही रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे.
अब चुनौती यह है कि पहली और दूसरी किस्त की राशि का उपयोग महिलाएं किस तरह अपनी आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में करती हैं और ऋण के लिए प्रक्रियाधीन 150 आवेदनों का निपटारा कितनी जल्दी होता है. योजनाओं का लाभ जमीन पर आर्थिक आत्मनिर्भरता में कितना बदलता है, इसकी तस्वीर आने वाले समय में सामने आयेगी.
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