देसी दारू पर पाबंदी के बाद उड़ने लगे गांजा के छल्लेजा

Published at :05 Apr 2016 2:07 AM (IST)
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देसी दारू पर पाबंदी के बाद उड़ने लगे गांजा के छल्लेजा

मछली बाजार, कचहरी में होता है गांजा का थोक कारोबार स्टेशन के समीप जमने लगी गंजेड़ियों की चौकड़ी नेपाल से सहरसा पहुंचता है गांजा सहरसा नगर : राज्य सरकार द्वारा देसी शराब व ताड़ी की बंदी से गांजा की मांग बढ़ने लगी है. इस कारोबार में शामिल लोगों की अब बल्ले-बल्ले है. यूं तो गांजा […]

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मछली बाजार, कचहरी में होता है गांजा का थोक कारोबार

स्टेशन के समीप जमने लगी गंजेड़ियों की चौकड़ी
नेपाल से सहरसा पहुंचता है गांजा
सहरसा नगर : राज्य सरकार द्वारा देसी शराब व ताड़ी की बंदी से गांजा की मांग बढ़ने लगी है. इस कारोबार में शामिल लोगों की अब बल्ले-बल्ले है. यूं तो गांजा का कारोबार यहां पुराना है, पर मद्य निषेध की नयी व्यवस्था में गांजा की मांग बढ़ने लगी है और शेयर के संशेक्स की तरह इसने ऊंची छलांग लगायी है.
शराब के आदी लोग गांजा बेचने वाले अड्डे पर दिखने लगे हैं. दरअसल जब से शराबबंदी हुई है, लोग शराब के विकल्प की तलाश में गली-गली की खाक छान रहे हैं. चूंकि विदेशी शराब महंगा होता है, ऐसे में नशे के लिए गांजा नशेड़ियों को मुफीद साबित हो रहा है. पुलिस द्वारा कई जगहों पर छापेमारी भी की जाती है लेकिन पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में कारोबारी जल्द ही गिरफ्त से बाहर हो जाता है.
मछली बाजार में होता है सर्वाधिक कारोबार
गांजा की बिक्री मछली बाजार के इलाके में सर्वाधिक बतायी जा रही है. मिली जानकारी अनुसार थाना क्षेत्र के भारतीय नगर, कचहरी चौक, रिफ्यूजी चौक के निकट गंजेड़ियों का जमावड़ा प्रतिदिन संध्या के समय देखा जा सकता है. देशी शराब पर पाबंदी और विदेशी शराब की बिक्री पर सरकारी व्यवस्था लगाये जाने के बाद उक्त गांजा बेचने वालों की अब चांदी कट रही है.
नेपाल व सुपौल के रास्ते पहुंचता है गांजा
नेपाल गांजा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. लिहाजा कोसी और सीमांचल में नेपाल से ही गांजा पहुंचता है. नेपाल का गांजा ही बस के रास्ते देश के अन्य हिस्सों में पहुंचाया जाता है. इसके अलावा जोगबनी बॉर्डर के रास्ते भी सहरसा तक गांजा पहुंचता है. ज्ञात हो कि नेपाल से नदी के रास्ते सुपौल तक गांजा पहुंचाना आसान है. सुपौल में सरायगढ़ और किशनपुर को गांजा बिक्री का थोक केंद्र माना जाता है.
वहां से सड़क के रास्ते सहरसा तक गांजा की खेप पहुंचती है. खास बात यह है कि दशकों से चल रहे इस कारोबार में सब कुछ और हर कोई मैनेज है. वर्तमान में गांजा की कीमत 120 रुपये भरी बेचा जा रहा है. एक रुपये के पुराने सिक्के को एक भरी वजन माना जाता है. इस प्रकार सिक्के के वजन के बराबर गांजा को एक भरी कहा जाता है. हालांकि ग्राहकों की सुविधा के लिए छोटे पैक में भी गांजा की सुविधा उपलब्ध है. इस पैक की कीमत 20 रुपये है.
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