सजदे में सिर झुकता, अरदास में भी नमन

Published at :22 Dec 2015 6:40 PM (IST)
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सजदे में सिर झुकता, अरदास में भी नमन

सजदे में सिर झुकता, अरदास में भी नमनप्रभात शख्सीयत………………………-सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं चौथम राज फरकिया के राजा मुरारी चौथमफोटो :संजीव, भागलपुर’हम पूरी तरह हिंदू हैं. मां दुर्गा का मंदिर बनवाये हैं. मंदिर में 116 प्रकार का प्रसाद चढ़ाते हैं. लेकिन ऐसा भी है कि हमारा सिर सजदे में झुकता है, तो […]

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सजदे में सिर झुकता, अरदास में भी नमनप्रभात शख्सीयत………………………-सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं चौथम राज फरकिया के राजा मुरारी चौथमफोटो :संजीव, भागलपुर’हम पूरी तरह हिंदू हैं. मां दुर्गा का मंदिर बनवाये हैं. मंदिर में 116 प्रकार का प्रसाद चढ़ाते हैं. लेकिन ऐसा भी है कि हमारा सिर सजदे में झुकता है, तो अरदास में भी नमन किये बिना नहीं रह सकते. हम चाहते हैं कि दुनिया अपने मजहब में रहते हुए बाकी सभी मजहब की कद्र करे.’ चौथम राज फरकिया (खगड़िया) के राजा मुरारी चौथम अपने पास आनेवाले लोगों से न सिर्फ सभी धर्मों पर बात करते हैं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी पेश कर रहे हैं. वे अपनी रौ में कहते हैं कि क्यों न कोई अन्य धर्मों की भी ईज्जत करे. आखिर सभी धर्म तो इनसानियत के ही लक्ष्य को पाने को कहता है. वे जहां भी जाते हैं, रास्ते में आनेवाले खानकाह, मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च में सिर झुकाने के बाद ही आगे बढ़ते हैं. इनकी इसी आस्था की बदौलत अब तक इन्हें कई सनद से सम्मानित किया जा चुका है. सभी का करते हैं बराबर सम्मानराजा मुरारी चौथम के प्रजा महल में आनेवाले चाहे कोई भी धर्म के या जाति के हों, उनके सम्मान में कोई कमी नहीं करते. वे कहते हैं कि उनकी रियासत से हिंदू, मुसलिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के लोगों का जुड़ाव परंपरागत रहा है. 15-16 पीढ़ी पहले के पूर्वज राजा कंचन सिंह का नाता पृथ्वी राज चौहान से रहा. 02 सितंबर 1595 को परिवार को मुगल बादशाह अकबर ने सनद से सम्मानित किया था. मुक्ति मार्ग यूनिवर्सल अभियान की शुरुआत कीउनका कहना है कि मुंगेर के गजेटियर को पढ़ कर, अपने बुजुर्गों से हर जाति-मजहब के लोगों से जुड़ाव की बात सुन कर मन में हमेशा हर किसी के प्रति दिल में सम्मान रहा. सम्मान देता भी रहा. बहुत सोचने के बाद मन में ख्याल आया कि बिना माता-पिता के दुनिया में कोई हो नहीं सकते, तो पहला ईश्वर माता-पिता को ही क्यों न स्वीकारा जाये. तभी एक अभियान शुरू किया और धर्म के रूप में आत्मसात करने के लिए प्रचारित करना शुरू किया, जिसका नाम मुक्ति मार्ग यूनिवर्सल रखा. आज भी मुक्ति मार्ग यूनिवर्सल से लोग जुड़ते हैं और पहला ईश्वर माता-पिता को बनाते हैं. दिग्गजों से भी मिली प्रशंसाआपके बाद इस कड़ी को आगे ले जानेवाला कौन होगा के सवाल पर वे कहते हैं कि अपने पुत्र युवराज शंभु चौथम को इस रास्ते पर चलने को प्रेरित कर दिया है. एमए (बीएल) की शैक्षणिक योग्यता वाले राजा मुरारी चौथम हिंदी और अंगरेजी में फर्राटेदार बात तो करते ही हैं, मैथिली भाषा पर भी अच्छी पकड़ है. हिंदी में कविता और कहानी भी लिखते हैं. अब तक इनकी खासीयत का उल्लेख प्रजा महल के आगंतुक रजिस्टर पर न्याय सेवा, पुलिस सेवा, प्रशासनिक सेवा और राजनीति से जुड़े देश भर के कई लोग कर चुके हैं. राजा मुरारी चौथम को मिले सनद-इमारत शरिया ने इन्हें भद्र पुरुष बताया, तो तख्त श्री हरिमंदिरजी की कमेटी कर चुकी है पवित्र सनद से सम्मानित-गोवर्धन मठ के शंकराचार्य प्रदान कर चुके हैं ‘मनीषी सतपुरुष’ का मानद अलंकरण से विभूषित

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