''सहरसा-मधेपुरा की पुरानी रेल लाइन शुरू हो, तो पूर्वोत्तर की राह होगी आसान''
Updated at : 09 May 2019 5:10 AM (IST)
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सहरसा : ‘सहरसा-मधेपुरा की पुरानी रेल लाइन शुरू हो तो पूर्वोत्तर की राह होगी आसान’. लगभग दो वर्ष पूर्व प्रभात खबर ने इसी शीर्षक से एक रिपोर्ट को प्रमुखता से प्रकाशित किया था. रिपोर्ट के माध्यम से बताया गया था कि लगभग छह दशक पूर्व सहरसा से मधेपुरा की रेललाइन गंगजला-पंचवटी के रास्ते गुजरती थी. […]
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सहरसा : ‘सहरसा-मधेपुरा की पुरानी रेल लाइन शुरू हो तो पूर्वोत्तर की राह होगी आसान’. लगभग दो वर्ष पूर्व प्रभात खबर ने इसी शीर्षक से एक रिपोर्ट को प्रमुखता से प्रकाशित किया था. रिपोर्ट के माध्यम से बताया गया था कि लगभग छह दशक पूर्व सहरसा से मधेपुरा की रेललाइन गंगजला-पंचवटी के रास्ते गुजरती थी. यह कटिहार, पूर्णिया को सहरसा जंक्शन से सीधा मिलाती थी.
बाद में कतिपय कारणों से इस रेलखंड को बंद कर चार किलोमीटर के घुमावदार रास्ते से गुजारा गया. इस घुमावदार रास्ते से ट्रेने को आने-जाने में कई परेशानियां होती है. स्टेशन तक पहुंचने के लिए यू आकार के मोड़ पर ट्रेन को अपनी स्पीड बिल्कुल कम कर देनी होती है.
सहरसा पहुंचने के बाद उस ट्रेन को कहीं और जाने के लिए इंजन को शंटिंग करने की आवश्यकता होती है. इंजन की शंटिंग और यू आकार के मोड़ के कारण ही लंबी दूरी की ट्रेन नहीं दी जा पा रही है. सहरसा-मधेपुरा के पुराने रूट में अभी भी रेलवे की पर्याप्त जमीन चिह्नित व उपलब्ध है. लेकिन रेलवे की लापरवाही से वह पूरी तरह से अतिक्रमित हो चुकी है.
गौहाटी और डिब्रूगढ़ से जुड़ जायेगा सहरसा : रिपोर्ट के माध्यम से रेलवे को बताया गया था कि यदि सहरसा-मधेपुरा की इस पुराने रेलखंड को फिर से शुरू किया जाता है तो पूर्वोत्तर भारत की राह आसान हो जायेगी. सहरसा से पूर्णिया के बाद अररिया, किशनगंज के अलावे सिलीगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुर द्वार, कोकराझार, गौहाटी और डिब्रूगढ़ सीधा जुड़ जायेगा.
दिल्ली अथवा देश के अन्य महानगरों से गौहाटी व डिब्रूगढ़ तक चलने वाली राजधानी, शताब्दी सहित अन्य ट्रेनों को सहरसा से होकर गुजारा जा सकेगा. इस पुराने रूट का फायदा यह है कि यह पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिए रेलवे को विकल्प मिल जायेगा. अभी मानसी-कटिहार एक मात्र रेलरूट ही इसे जोड़ रही है.
मानसी-कटिहार रेलखंड के बीच पसराहा में हर साल रेलट्रैक का धंसना लगा रहता है. विकट परिस्थितियों में एक-दो बार राजधानी, बांद्रा एक्सप्रेस को सहरसा जंक्शन से गुजारा जा चुका है. रिपोर्ट में यह भी बताया था कि सहरसा जंक्शन से कारू खिरहर हॉल्ट तक दो किलोमीटर के इस पुराने खंड को शुरू करने के लिए रेलवे को कोई पुल भी नहीं बनाने होंगे.
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