नवजात को मिला आशियाना, अब दत्तक ग्रहण में पलेगी बच्ची
Updated at : 04 Dec 2017 9:00 AM (IST)
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15 दिनों से सदर अस्पताल के एसएनसीयू में लावारिस रूप से पल रही थी नवजात सहरसा : सदर अस्पताल के एसएनसीयू में बीते 15 दिन पूर्व नवजात को लावारिस छोड़ कर फरार हुई मां के नहीं आने के बाद शनिवार की देर शाम को बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से अस्पताल प्रशासन ने नवजात को […]
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15 दिनों से सदर अस्पताल के एसएनसीयू में लावारिस रूप से पल रही थी नवजात
सहरसा : सदर अस्पताल के एसएनसीयू में बीते 15 दिन पूर्व नवजात को लावारिस छोड़ कर फरार हुई मां के नहीं आने के बाद शनिवार की देर शाम को बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से अस्पताल प्रशासन ने नवजात को दत्तक ग्रहण को सौंप दिया.
मामले की जानकारी मिलने के बाद सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई भाष्कर प्रियदर्शी ने मामले की जानकारी लेकर चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर भाष्कर कश्यप व दत्तक ग्रहण संस्थान की प्रबंधक श्वेता झा को अविलंब समुचित कार्रवाई का निर्देश देकर बच्ची को संस्थान में लाने को कहा ताकि उसकी अच्छी देखभाल हो सके. जिसके बाद सभी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनिल कुमार ने बच्ची को सौंपा. मामला सामने आने के बाद कई तरह की चर्चा शुरू हो गयी. कोई महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात, तो कोई अन्य कारण की बात कर आपस में चर्चा कर रहे थे.
कभी अपने से दूर नहीं करें बच्चे को : इन बच्चों के लिए पालोना नाम से कैंपेन चलाने वाली मोनिका आर्य ने कहा कि किसी भी सूरत में बच्चों को अपने से अलग न करें. यदि विषम परिस्थिति में आप बच्चों को रखने में असमर्थ है तो बच्चों को कहीं फेंके नहीं. बल्कि किसी सुरक्षित हाथों में सौंप दे या दत्तक गृह को सौंप दें. उन्होंने कहा कि शिशु परित्याग एक सामाजिक समस्या है.
दत्तक ग्रहण की प्रबंधक ने कहा कि शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों को सभी सुविधा के साथ रहने की व्यवस्था है. उन्होंने बताया कि यदि किसी कारणवश कोई अपना बच्चा को संस्थान को सुपुर्द करते हैं तो उनका नाम गोपनीय रखा जायेगा. वहीं कहीं यदि कोई बच्चा कहीं भटक रहा है, तो उसे भी कोई व्यक्ति संस्थान को सूचना देकर सुपुर्द कर सकता है. सभी थानाध्यक्ष बाल कल्याण पदाधिकारी होते हैं. वह भी ऐसे बच्चों को संस्थान में भर्ती करा सकता है.
32 बच्चों को लिया जा चुका है गोद : जिला मुख्यालय में दत्तक ग्रहण संस्थान खुलने के बाद से अभी तक 32 बच्चों को इच्छुक दंपति द्वारा गोद लिया जा चुका है. जानकारी के अनुसार, जिसमें आधा दर्जन बच्ची भारत से बाहर विदेश गयी है. प्रबंधक ने बताया कि एक बच्ची बेल्जियम, एक बच्ची माल्टा, एक बच्ची यूएसए जा चुकी है. एक बच्ची जो कनाडा जायेगी, उसका सभी प्रक्रिया पूर्ण है. जल्द ही दंपति को सुपुर्द किया जायेगा. वही दो बच्ची, जिसे स्पेन व यूएसए जाना है, की कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
एकल माता-पिता भी ले सकते हैं गोद
दत्तक गृह संस्थान से लोग बच्चे को गोद भी ले सकते हैं. किसी बच्चे को परिवार प्रदान करने के इच्छुक दंपति उसे गोद ले सकते हैं. किशोर न्याय अधिनियम 2000 के अंतर्गत भी अनाथ बच्चों को गोद लिया जा सकता है.
इसके लिए गोद लेने वाले माता पिता की आय का उचित और नियमित श्रोत होना चाहिए. दंपति में किसी को भी गंभीर बीमारी न हो, आपराधिक रिकार्ड नहीं हो. एकल माता-पिता भी बच्चा गोद ले सकते हैं. प्रबंधक श्वेता ने बताया कि गोद लेने के लिए डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट एडोप इंडिया डॉट एनआइसी डॉट इन पर पंजीकरण कराये. दत्तक ग्रहण एजेंसी ग्रहण की पूर्ण जानकारी देकर आपकी आशंकाओं को दूर करेगी.
एजेंसी के कार्यकर्ता आपके घर जाकर आपकी सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि का आकलन करेंगे. जिसके बाद एजेंसी एक योग्य बच्चे को चिन्हित कर आपको स्वीकृति के लिए देगी. यदि आपको बच्चा पसंद हो गया तो आप अपने पसंद के चिकित्सक से चिकित्सीय परीक्षण करा सकते हैं. कानूनी कार्रवाई प्रारंभ होने के साथ ही आप बच्चे को प्री एडप्सन में ले जा सकते है.
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