जनवरी में 22 दिनों तक कोमा में थे डीएसओ
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Aug 2016 8:23 AM (IST)
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बोले डीएम- हमेशा तनाव में रहते थे अविनाश कुमार सासाराम (नगर) : डीएसओ अविनाश कुमार इसी वर्ष जनवरी में 22 दिनों तक कोमा में रहे थे. दिमागी बीमारी के कारण वह हमेशा तनाव में रहते थे. डीएम अनिमेष कुमार पराशर ने बताया कि उनके स्वास्थ्य को देखते हुए अतिरिक्त कार्य नहीं सौंपा जाता था. कई […]
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बोले डीएम- हमेशा तनाव में रहते थे अविनाश कुमार
सासाराम (नगर) : डीएसओ अविनाश कुमार इसी वर्ष जनवरी में 22 दिनों तक कोमा में रहे थे. दिमागी बीमारी के कारण वह हमेशा तनाव में रहते थे. डीएम अनिमेष कुमार पराशर ने बताया कि उनके स्वास्थ्य को देखते हुए अतिरिक्त कार्य नहीं सौंपा जाता था. कई बार तो विभागीय कार्य में मुख्यालय से बाहर उनकी जगह अन्य अधिकारी को भेजा जाता था. उनकी मौत से जिले के अधिकारी मर्माहत हैं. ऐसा लग रहा है जैसे समाहरणालय परिवार का एक सदस्य सभी को छोड़ कर हमेशा के लिए चला गया. डीएम ने कहा कि अगर कोई समस्या व परेशानी थी, तो हमलोग से कहना चाहिए था. दुनिया में हर समस्या का हल है.
इस तरह का कदम उठाना दुःखद होता है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि अविनाश बाबू को ऐसा कदम उठाना पड़ा है. इसकी जांच करायी जायेगी. इसके लिए एसपी को निर्देश दिया गया है. शव का पोस्टमार्टम व उसे पटना भेजे जाने तक डीएम सदर अस्पताल में मौजूद रहे. डीएसओ के शव का पोस्टमार्टम हो रहा था. डीएम पोस्टमार्टम हाउस के बाहर अधिकारियों के साथ बाहर खड़े थे. पोस्टमार्टम के बाद डीएस कार्यालय में डीएसओ की पत्नी बेबी देवी व भाभी कविता देवी को सांत्वना देते देखे गये. अपनी देख-रेख में सारी प्रक्रिया पूरी करा शव को एंबुलेंस से पटना रवाना कराया. डीएसओ का शव देखते ही डीटीओ जय कुमार द्विवेदी व अपर समाहर्ता ओमप्रकाश पाल रो पड़े. डीटीओ ने कहा कि अविनाश बाबू व उनका र्क्वाटर एक ही बिल्डिंग में है. रोजाना बात होती थी. जब भी मैं उन्हें उदास देखता था. बातचीत कर उन्हें सामान्य कर देता था. उम्र में हमसे बहुत छोटे थे.
हमेशा छोटे भाई की तरह स्नेह देता था. आत्महत्या जैसा कदम उन्होंने कैसे उठाया, समझ से परे है. वहीं, अपर समाहर्ता ने कहा कि सबसे पहले खाना बनानेवाली सुनीता ने उन्हें सूचना दी थी. जानकारी होते ही वह डीटीओ साहब के पास गये. हम दोनों खिड़की से देखे कि अविनाश बाबू फर्श पर पड़े थे. हम कभी सोचे भी नहीं थे कि वह ऐसा कदम भी उठा सकते हैं. अनुमंडल पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार ने कहा कि डीएसओ से रोज बातें होती थीं. अस्वस्थ्य रहने के कारण उदास व खोये से रहते थे. शांत स्वभाव के डीएसओ द्वारा इस तरह प्राणघातक कदम उठाना शव देखने के बाद विश्वास नहीं हो रहा है कि अब अविनाश कुमार हमारे बीच नहीं है.
डीएसओ कार्यालय के प्रधान लिपिक लखन बाबू ने कहा कि तीन मार्च 2014 को जिले में योगदान किये थे. तब से मैं उनके नजदीक था. चूंकि बड़ा बाबू होने के कारण मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह से जानता था. काम का कोई बोझ नहीं था. चूंकि सभी अधिकारी बीमारी के कारण उन से सहयोगात्मक रवैया रखते थे. हाल के दिनों में कुछ ज्यादा तनाव में थे.
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