हत्या के मामले में एक को आजीवन कारावास

Published at :21 Apr 2016 8:07 AM (IST)
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हत्या के मामले में एक को आजीवन कारावास

साक्ष्य के अभाव में दो बरी सासाराम (कोर्ट) : चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उमाशंकर द्विवेदी की अदालत ने हत्या के एक मामले में दोषी पाते हुए मुजफ्फरपुर जिले के पारू थाने के कटारू निवासी अखिलेश कुमार को आजीवन कारावास के साथ 25 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनायी है. वहीं, न्यायालय द्वारा […]

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साक्ष्य के अभाव में दो बरी
सासाराम (कोर्ट) : चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उमाशंकर द्विवेदी की अदालत ने हत्या के एक मामले में दोषी पाते हुए मुजफ्फरपुर जिले के पारू थाने के कटारू निवासी अखिलेश कुमार को आजीवन कारावास के साथ 25 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनायी है.
वहीं, न्यायालय द्वारा साक्ष्य के अभाव में गया जिले के डुमरिया थाने के बेनी सागर गांव के रामवरण कुमार तथा मुजफ्फरपुर जिले के हथौड़ी थाने के नरमा गांव निवासी कृष्ण कुमार दीपक को बरी कर दिया. अपर लोक अभियोजन अशोक कुमार के अनुसार, दावथ थाने के परसिया खुर्द निवासी आरती देवी ने प्राथमिकी दर्ज करायी थी, जिसमें कहा गया था कि उनके पति विनोद चौधरी टावर लगाने का काम करते थे. इसी सिलसिले में 20 सितंबर, 2011 को बलिया गये थे व वहां से मुजफ्फरपुर पहुंचने की सूचना अपनी पत्नी को दी. अगले दिन उसने अपने भाई के नंबर पर फोन कर पत्नी को एक खाते में 50 हजार रुपये डालने की बातें कहीं. रुपये डालने के बाद भी वापस नहीं आये. काफी खोजबीन के बाद 10 अक्तूबर, 2011 को फोन नंबर का जिक्र करते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी गयी.
जांच के क्रम में अखिलेश कुमार, राम वरण कुमार व कृष्ण कुमार पर पुलिस द्वारा अनुसंधान के बाद आरोपपत्र समर्पित किया गया. मृतक विनोद चौधरी का शव 22 सितंबर, 2011 को मुजफ्फरपुर जिले के पारू थाने के पंदे व चक भरत पट्टी के बीच सड़क के किनारे झाड़ी से बोरे में बंद बरामद किया गया था. इसको लेकर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. शव की पहचान बाद में हुई. सत्र वाद संख्या 218/2012 द्वारा न्यायालय में विचारण हुआ. विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से छह गवाहों की गवाही करायी गयी.
अंत में न्यायालय द्वारा रामवरण कुमार व कृष्ण कुमार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया. वहीं, अखिलेश कुमार को धारा 302 में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास के साथ 20 हजार रुपये अर्थ दंड व धारा 201 में दोषी पाते हुए पांच साल के कारावास के साथ पांच हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनायी है. अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी. सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी
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