नहीं बदली लत, 2006 से अब तक 23 घूसखोर जा चुके हैं जेल

Published at :04 Apr 2018 5:48 AM (IST)
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नहीं बदली लत, 2006 से अब तक 23 घूसखोर जा चुके हैं जेल

निगरानी के हाथों पकड़ा गया राजस्व कर्मचारी का विवादों से है पुराना नाता पहले दरिगांव पंचायत के प्रभार में गांववालों से हो चुकी थी कई बार झड़प सासाराम नगर : जिले में वर्ष 2006 से अब तक 23 घुसखोरों को निगरानी टीम पकड़ चुकी है. इसमें जनप्रतिनिधि व छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक […]

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निगरानी के हाथों पकड़ा गया राजस्व कर्मचारी का विवादों से है पुराना नाता

पहले दरिगांव पंचायत के प्रभार में गांववालों से हो चुकी थी कई बार झड़प
सासाराम नगर : जिले में वर्ष 2006 से अब तक 23 घुसखोरों को निगरानी टीम पकड़ चुकी है. इसमें जनप्रतिनिधि व छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक शामिल है. एक वर्ष के बाद घुसखोर राजस्व कर्मचारी निगरानी का शिकार बना है. 7 अप्रैल, 2017 को पीएचईडी के कैशियर शारदा चौधरी को निगरानी टीम 27 हजार रुपये घुस लेते कार्यालय से ही गिरफ्तार की थी. निगरानी के हाथों पकड़ा गया राजस्व कर्मचारी पुरंजय ओझा का विवादों से पुराना नाता रहा है.
शातिर दिमाग राजस्व कर्मचारी अपने अधिकारी से बेहतर संबंध बना कर रखता है और उसी संबंध का फायदा उठा खुलेआम लोगों से घुस लेता था. जानकारों का कहना है कि इस घटना से पहले राजस्व कर्मचारी को दरिगांव पंचायत का प्रभार मिला था. जहां रिश्वत मांगने को लेकर कई बार ग्रामीणों के साथ झड़प हुई थी. ग्रामीणों के शिकायत पर कर्मचारी को वहां से दो माह पहले हटा कर बेलाढ़ी व करसेरुआं पंचायत का प्रभार दिया गया था. प्रभार मिलते ही कर्मचारी फजलगंज में अपना निजी कार्यालय खोल मनमानी करने लगा.
जिले में शिक्षा विभाग का लिपिक बना था पहला शिकार
2 नवंबर, 2006 को निगरानी की टीम शिक्षा विभाग के लिपिक संतोष कुमार को चार हजार पांच सौ रुपये घुस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार की थी. लिपिक जिले में निगरानी का पहला शिकार बना था. इसी वर्ष 21 दिसंबर को सप्लाई इंस्पेक्टर राजेश कुमार चार हजार घुस लेते पकड़े गये. वर्ष 2008 में तीन सितंबर को दिनारा के बीसीओ रामनरेश प्रसाद आठ हजार घुस लेते पकड़े गये थे. इसके बाद जिले में घुसखोरों की फेहरिस्त लंबी होती चली गयी. वर्ष 2009 में 24 मार्च को सासाराम अंचल के राजस्व कर्मचारी अच्युतानंद सिंह आठ हजार घुस लेते पकड़ा गया था. 6 मई, 2009 को इसी अंचल कार्यालय का राजस्व कर्मचारी रामनाथ उपाध्याय 16 हजार रुपये घुस लेते पकड़ा गया. 24 जून, 2009 को दिनारा के बीसीओ वंशनारायण प्रसाद चार हजार रुपये घुस लेते पकड़ा गया.
14 जुलाई, 2009 को सिंचाई विभाग के कर्मी सूर्यदेव प्रसाद 10 हजार रुपये घुस लेते पकड़ा गया. वर्ष 2010 में 15 अप्रैल को कृषि विभाग के सहायक मिथिलेश कुमार सिन्हा पंद्रह हजार घुस लेते पकड़ा गया. 28 अप्रैल, 2010 को संजु देवी सरपंच व विजयमल सिंह उप सरपंच सिवोबहार पंचायत सूर्यपुरा के 25 हजार घुस लेते पकड़े गये. 20 जुलाई, 2010 शिवसागर बीडीओ तीन हजार घुस लेते गिरफ्तार हुए थे. 2 नवंबर, 2010 वसीम राजा शिक्षक उर्दू मध्य विद्यालय शेख बहुआरा चार हजार घुस लेते पकड़ा गया. 6 जून, 2011 चकबंदी कार्यालय डेहरी के अमीन रामकृष्ण मिश्रा पांच हजार घुस लेते पकड़ा गया. तीन जनवरी, 2012 को जिला अंकेक्षण पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार व लिपिक राधेश्याम प्रसाद 12 हजार घुस लेते पकड़े गये. 21 फरवरी 2013 को सिविल सर्जन कार्यालय के प्रधान लिपिक श्रीभगवान सिंह 25 हजार रुपये घुस लेते पकड़े गये. 30 अप्रैल, 2013 पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक अजय कुमार सिन्हा डेढ़ लाख रुपये घुस लेते पकड़े गये. 26 अगस्त, 2014 चकबंदी कार्यालय सासाराम के अमीन महेश पासवान पांच हजार रुपये घुस लेते पकड़े गये. 12 फरवरी, 2015 को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी प्रवेश पासवान व उनका स्टेनो राजीव रंजन दूबे 20 हजार रुपये घुस लेते पकड़े गये. 3 मार्च, 2015 को धान क्रय केंद्र प्रभारी दिलीप कुमार तीन हजार रुपये घुस लेते पकड़े गये. 24 मार्च, 2015 को सिविल सर्जन डाॅ अशोक कुमार सिंह एक लाख घुस लेते गिरफ्तार हुए थे. 15 दिसंबर, 2015 प्रभारी सिविल सर्जन डाॅ जयशंकर प्रसाद 80 हजार रुपये घुस लेते पकड़े गये. 24 सितंबर, 2016 को डेहरी के बीईओ उमाशंकर सिंह आठ हजार रुपये घुस लेते पकड़े गये. इसके अलावा अन्य जांच एजेंसियों ने अधिकारियों व कर्मचारियों को घुस लेते गिरफ्तार किया है. जिसमें आरपीएफ इंस्पेक्टर एसी सिन्हा, प्रधान डाकघर के लिपिक विश्वनाथ सिंह, नगर पार्षद डेहरी के लिपिक कृष्णदेव पासवान, नासरीगंज के सीडीपीओ कार्यालय के लिपिक विनय कुमार श्रीवास्तव, आईटीआर्इ डेहरी के शिक्षक वृजनंदन सिंह, उमाकांत सिंह व श्रीकांत सिंह इनकम टैक्स कार्यालय के सहायक राम नारायण सिंह शामिल है.
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