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सब्जियों संग घर पहुंच रही गंभीर बीमारियां, रहें सतर्क

Updated at : 20 Oct 2018 1:31 AM (IST)
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सब्जियों संग घर पहुंच रही गंभीर बीमारियां, रहें सतर्क

पूर्णिया : बढ़ती महंगाई के कारण जेब से बगाबत कर लोग बढ़ी कीमतों पर सब्जियां खरीद कर घर लाते हैं.अफसोस इस बात का है कि जो सब्जी हम घर ला रहे हैं. वह किसी भी कीमत पर सेहत के अनुकूल नहीं है. ऐसा इसलिए है कि बेमौसम हरी सब्जियों का मिलना. जाहिर है कि इन […]

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पूर्णिया : बढ़ती महंगाई के कारण जेब से बगाबत कर लोग बढ़ी कीमतों पर सब्जियां खरीद कर घर लाते हैं.अफसोस इस बात का है कि जो सब्जी हम घर ला रहे हैं. वह किसी भी कीमत पर सेहत के अनुकूल नहीं है. ऐसा इसलिए है कि बेमौसम हरी सब्जियों का मिलना. जाहिर है कि इन सब्जियों को तैयार करने में भारी मात्रा में खाद व रसायन का प्रयोग किया गया ही होगा.

वहीं दूसरी तरफ सब्जी विक्रेता भी सब्जी को जरूरत से ज्यादा ताजा दिखाने के लिए भी सब्जियों पर रंग व केमिकल का प्रयोग कर रहे है. दोनों ही सूरत में आम लोग हरी साक-सब्जियों के रूप में खतरनाक रसायन भी खा रहे हैं. रोजाना अपने डाइट में खतरनाक रसायन को जाने-अनजाने में सेवन करने से कई गंभीर बीमारियों को न्योता दिया जा रहा है. चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों लीवर में संक्रमण, गुर्दा, डाइविटीज, हर्ट समस्या आदि बीमारी इन्हीं रसायन की उपज है.

बाजारों में बेमौसम सब्जियों का बढ़ा चलन. शहर के सबसे बड़े सब्जी मंडी खुश्कीबाग, हरदा आदि मंडियों में अगस्त माह से ही बंदगोभी, फूल गोभी, टमाटर, हरा धनिया, बरबट्टी, बैगन आदि मिलने शुरू हो जाते हैं. यहां से तमाम प्रकार की सब्जियां कोसी, सीमांचल सहित पूर्वोत्तर राज्यों में भी जाता है.

बाजारों में बेमौसम आने वाले सब्जियों के विषय में किसी ने नहीं सोचा कि ठंडे मौसम में होने वाली सब्जियां गर्मी व बरसात के मौसम में कैसे उपलब्ध हो रहा है.सब्जी किसानों की माने तो रसायन व खाद का प्रयोग करके ऐसे सब्जियों को जून व जुलाई में ही लगा दिया जाता है.जिससे अगस्त माह के अंत तक रसायन युक्त सब्जियां बाजार की शोभा बन जाती है. लोग खुशी खुशी इसे खरीद कर घर ले जाते हैं.

सब्जियों में हो रहा है ऑक्सीटोसिन का प्रयोग. सब्जियों को जरुरत से ज्यादा ताजा साबित करने के लिए रंगों का प्रयोग किया जाता है. वहीं खेतों में ही सब्जियों को वजनी बनाने के लिए धड़ल्ले से ऑक्सीटोसिन का प्रयोग किया जाता है.इस इंजेक्शन को देने के बाद लौकी, कदिमा, घेउरा, खीरा आदि सब्जी का आकार कई गुणा अधिक बड़ा हो जाता है.

जिसे बेच कर किसान के साथ साथ विक्रेता भी माला माल होता है.इन सब्जियों की पहचान यह है कि यदि इन सब्जियों को एक दिन बाद बनाया जाये तो यह अपने वास्तविक स्वरूप में आ जाता है.पूर्णिया के किसी भी मंडियों से घरों में जाने वाली सब्जियों के साथ ऐसा मामला अक्सर देखने को मिलता है.

सब्जियों की कहानी उपभोक्ताओं की जुबानी. शहर के भट्ठा बाजार निवासी अंकु कुमार ने बताया कि उसके घर में सभी शाकाहारी है.इसलिए उसके घर में हरी सब्जियों को प्रमुखता दिया जाता है.लेकिन उसके पिता पिछले कुछ दिनों से गुर्दा रोग से ग्रसित है.खुश्कीबाग मंडी में सब्जी के लिए पहुंची गृहिणी प्रीति देवी हरी सब्जियों को खरीदने से पहले कई बारीकियों को परख कर सब्जियां खरीद रही थी.उन्हें लौकी वाले लौकी लेने की जिद कर रहे थे.लेकिन वह लौकी को नकार कर चली गयी.

उसने बताया कि पिछले हफ्ते वह दो लौकी ले कर गयी थी.एक लौकी को वह उसी दिन बना ली.दूसरी लौकी,जिसका वजन लगभग ढाई किलो के आस पास था.उसका वजन घट कर दूसरे दिन आधा किलो के आस पास हो गया.जिससे वह हैरत में पड़ गयी.उसी दिन से वह लौकी से तौबा कर ली.ऐसे कई लोगों ने सब्जी के विषय में अपने अनुभव बताये.

डॉक्टरों की राय. डॉ गौतम सरीन ने बताया कि शहर के जाने माने फिजिशियन केमिकल युक्त सब्जियों का सेवन करने से हमारी किडनी पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है.जिसके कारण हमारी किडनी भी फेल हो सकती है.केमिकल युक्त सब्जियों का सेवन करने से हमें कैंसर की संभावना छह गुना अधिक बढ़ जाता है, जो हमारे लिए काफी घातक सिद्ध हो सकता है.

इसमे प्रोस्टेट कैंसर, मस्तिष्क कैंसर,बड़ी आंत कैंसर हो सकता है.ऐसे सब्जी का सेवन करने से पेट खराब हो जाता है, जिसके कारण हमें उल्टी, दस्त, एसिडिटी का सामना करना पड़ता है.जब भी गर्भवती महिला केमिकल युक्त सब्जियों का अधिक सेवन करती हैं, तो इसका असर उसके होने वाले बच्चे पर पड़ता है.जिसके कारण बच्चा जन्म के समय ही अपंगता में पैदा होता है.केमिकल युक्त सब्जियों का अधिक सेवन करने से हमें फेफड़ों संबंधी बीमारी का सामना करना पड़ सकता है, जिसके कारण हमें सांस लेने और छोड़ने में काफी परेशानी हो सकती है.

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