पटना: चर्चित अलकतरा घोटाला में ट्रांसपोर्टर ने कबूला जुर्म, सजा के साथ 29 लाख जुर्माना

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सांकेतिक तस्वीर. AI Generated

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चर्चित अलकतरा घोटाला मामले में ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह को पटना की विशेष अदालत ने 1 साल 4 महीने की जेल और 29 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. जानिए घोटाले का पूरा विवरण.

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Patna News: बिहार के बहुचर्चित अलकतरा घोटाले से जुड़े एक मामले में आरोपित ट्रांसपोर्टर द्वारा अपराध कबूल किए जाने के बाद पटना की विशेष अदालत ने उसे एक वर्ष, चार माह और 18 दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने उस पर 29 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. पटना स्थित सीबीआई की विशेष अदालत संख्या दो के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह उर्फ डी एन सिंह द्वारा दाखिल दोष स्वीकारोक्ति आवेदन पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया.

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जुर्माना जमा करने पर मामला निष्पादित

अदालत ने आरोपित का बयान दर्ज कर उसे भारतीय दंड विधान (आईपीसी) की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत दोषी ठहराया. कारावास की सजा को आरोपित द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि में समायोजित कर दिया गया. वहीं, दोषी ट्रांसपोर्टर द्वारा 29 लाख रुपये का जुर्माना अदालत में जमा कराने के उपरांत उसके खिलाफ चल रहे इस मुकदमे को विधिवत निष्पादित कर दिया गया.

पूर्व मंत्री इलियास हुसैन पर अंतिम बहस जारी

इसी मुकदमे में नामजद अन्य मुख्य आरोपितों—तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन और तत्कालीन डायरेक्टर (परचेज एंड ट्रांसपोर्ट) केदार पासवान के खिलाफ अदालत में अंतिम बहस की प्रक्रिया जारी है. मामले के विशेष लोक अभियोजक राकेश दुबे ने जानकारी दी कि वर्ष 1994 में आपराधिक षड्यंत्र के तहत बरौनी रिफाइनरी से 494.68 मीट्रिक टन अलकतरा जमुई पथ निर्माण प्रमंडल भेजने के लिए उठाया गया था, जिसकी कीमत 28.43 लाख रुपये थी, लेकिन इसे रास्ते से ही गायब कर दिया गया था.

सीबीआई जांच में शामिल थे छह नाम

मूल रूप से वर्ष 1996 में बरौनी थाने में दर्ज इस मामले की जांच पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने 1997 में अपने हाथ में ली थी. जांचोपरांत सीबीआई ने छह आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिनमें तिरुपति ट्रांसपोर्ट के मालिक डीएन सिंह, तत्कालीन मंत्री, निदेशक सहित डीएन बैठा, मुजतबा अहमद और मदन मोहन प्रसाद शामिल थे. सुनवाई के दौरान तीन आरोपितों का निधन हो चुका है, जबकि पूर्व मंत्री और तत्कालीन निदेशक पर अंतिम फैसला आना बाकी है.

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