कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन ने बिहार में शुरू किया बाल तस्करी विरोधी अभियान

Updated at : 11 Aug 2020 9:49 PM (IST)
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कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन ने बिहार में शुरू किया बाल तस्करी विरोधी अभियान

पटना : नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के फाउंडेशन द्वारा मंगलवार को बिहार में बाल तस्करी के खिलाफ एक अभियान शुरू किया गया. फाउंडेशन का दावा है कि राज्य इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक है और हाल के दिनों में प्रवासी मजदूरों की भारी आमद से इसमें और भी तेजी आ सकती है.

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पटना : नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के फाउंडेशन द्वारा मंगलवार को बिहार में बाल तस्करी के खिलाफ एक अभियान शुरू किया गया. फाउंडेशन का दावा है कि राज्य इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक है और हाल के दिनों में प्रवासी मजदूरों की भारी आमद से इसमें और भी तेजी आ सकती है.

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) द्वारा आयोजित एक वेबिनार के माध्यम से “मुक्ति कारवां” नामक अभियान शुरू किया गया. फाउंडेशन ने बाल तस्करों के चंगुल से बचकर आए 50 युवाओं को भी अपने साथ जोड़ा है. केएफएससी के कार्यकारी निदेशक (अभियान) बिधान चंद्र सिंह ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कम से कम दो हजार युवा स्वयंसेवकों को प्रेरित करने का लक्ष्य है और हमारा यह अभियान राज्य के उत्तरी और उत्तर-पूर्वी भागों में 10 जिलों पर ध्यान केंद्रित करेगा जो बाल तस्करी के लिए विशेष रूप से जाने जाते रहे हैं.

उन्होंने कहा कि उनके कार्यकर्ता साइकिल से 10,000 गांवों को कवर करेंगे और 10 लाख लोगों तक पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि बिहार में बाल तस्करी की घटनाओं में वृद्धि हुई है. 2017 में राजस्थान और कर्नाटक के बाद तीसरे स्थान पर रहने वाले बिहार में बाल तस्करी के 395 मामले प्रकाश में आए थे और एक साल बाद बाल तस्करी के 539 मामलों के साथ यह शीर्ष स्थान पर पहुंच गया.

सिंह ने चिंता जताते हुए कहा, “केएफएससी द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह भी पाया गया है कि दिल्ली में बचपन बचाओ आंदोलन द्वारा मुक्त कराए गए कुल बाल श्रमिकों में से आधे से अधिक यानी 54 प्रतिशत बिहार से हैं.” राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) की अध्यक्ष प्रमिला कुमार प्रजापति ने कहा, “संकट के इस समय में, बाल तस्कर बहुत सक्रिय हैं और सबसे गरीब परिवारों के बच्चों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. मैं ऐसे बच्चों के माता-पिता तक पहुंचने की कोशिश कर रही हूं और उन्हें ऐसे जाल में फंसने के खतरों के बारे में समझाती हूं.’

आईएएस अधिकारी एन विजयलक्ष्मी ने वेबिनार को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने हाल ही में सत्यार्थी से मुलाकात की और बाल श्रम और बाल तस्करी के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने मुक्ति कारवां अभियान बिहार में शुरू किए जाने का स्वागत करते हुए कहा, “बहुत काम किया गया है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. जब तक हम माता-पिता के बीच गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी को कम नहीं करते हैं, तब तक हम समस्या की जड़ों पर प्रहार नहीं कर सकते.”

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एसएलएसए) के सचिव सुनील दत्त मिश्रा ने कहा, “हम बाल श्रम उन्मूलन के लिए एससीपीसीआर, एसएलएसए, गैर सरकारी संगठनों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय के आधार पर एक कुशल प्रणाली बनाना चाहते हैं. हमें उम्मीद है कि मुक्ति कारवां इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी.’

वेबिनार में भाग लेने वाले अन्य लोगों में कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान, जदयू नेता रंजू गीता के अलावा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष व्यास जी और बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकारी निदेशक धनंजय तिंगल शामिल थे.

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