बिहारियों में कुछ बातें ऐसी हैं, जो किसी और में नहीं : डीआइजी शालीन

Published at :09 Jan 2017 6:42 AM (IST)
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बिहारियों में कुछ बातें ऐसी हैं, जो किसी और में नहीं : डीआइजी शालीन

सौभाग्यशाली हूं कि सिखों और बिहारियों के बीच पुल बनने का मौका मिला : शालीन, डीआइजी, पटना गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के मौके पर देश-दुनिया से आये लाखों सिख श्रद्धालुओं को बेहतर सुरक्षा, सहयोग और माहौल उपलब्ध कराने में बिहार के जिन वरिष्ठ अधिकारियों का योगदान रहा, उनमें पंजाबी मूल के […]

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सौभाग्यशाली हूं कि सिखों और बिहारियों के बीच पुल बनने का मौका मिला : शालीन, डीआइजी, पटना
गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के मौके पर देश-दुनिया से आये लाखों सिख श्रद्धालुओं को बेहतर सुरक्षा, सहयोग और माहौल उपलब्ध कराने में बिहार के जिन वरिष्ठ अधिकारियों का योगदान रहा, उनमें पंजाबी मूल के बिहार कैडर के आइपीएस अधिकारी शालीन भी हैं. पटना रेंज के डीआइजी शालीन ने न सिर्फ सिखों और बिहारियों के बीच मेल-जोल बढ़ाने के लिए एक पुल का काम किया, बल्कि बिहार और बिहारियों के बारे में बाहरी लोगों के बीच फैली बहुत-सी भ्रांतियों को दूर भी किया. शालीन छात्र जीवन से अपने बिहारी मित्रों से प्रभावित रहे हैं. प्रभात खबर के ब्यूरो प्रमुख मिथिलेश से खास बातचीत में उन्होंने बिहारियों के बारे में अपने दिली उद्गार खुलकर साझा किये. पेश हैं मुख्य अंश.
बिहारियों से मेरा नाता करीब दो दशक पुराना है. आइआइटी रुड़की में इंजीनियरिंग के दौरान बहुत से बिहारी भी मेरे साथ पढ़ते थे. वहां मैं पढ़ने में एक साधारण विद्यार्थी था. कह सकते हैं कि पढ़ने-लिखने से मेरा वास्ता कम ही था. तब मैं यूं ही घूमने-फिरनेवाला छात्र था. उन दिनों आइआइटी रूड़की कैंपस में छात्र राज्यों के खेमे में बटे थे. मुझे लगा कि बिहारी कुछ अलग किस्म के लोग हैं, तेज-कमजोर सबको साथ लेकर चलनेवाले और खासकर मित्रता को लेकर सबसे संजीदा. मैं बिहारी खेमे के साथ आ गया. फाइनल इयर में आने पर अविनाश नाम के बिहारी छात्र के साथ में मित्रता हो गयी. फिर हमारा 10-12 लड़कों का ग्रुप बन गया. कॉलेज से निकल जाने पर भी इस ग्रुप के लड़कों के बीच दोस्ती बनी रही.
बाद में इस ग्रुप के कुछ लड़कों ने नौकरी छोड़ कर दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं भी यूपीएससी की परीक्षा पास कर पाऊंगा, लेकिन मेरे बिहारी मित्रों को लगता था कि मैं कर सकता हूं. उनकी जिद के चलते मैं भी उन्हीं के पास पहुंच गया.
अविनाश और उसके दोस्तों के कमरे में ही रहा. किसी ने कभी यह नहीं कहा कि मैं फ्री में उसके कमरे में पड़ा हुआ हूं या उसे मेंस देना है और वह डिस्टर्ब हो रहा है. मैं एक महीने से अधिक समय तक उनके साथ रह लेता था, लेकिन उन्होंने कभी किराये में हिस्सा नहीं मांगा. मुझे किसी अपने की तरह साथ रखा, बहुत सहयोग किया. जब यूपीएससी का रिजल्ट आया, तो सिर्फ मेरा आइपीएस में चयन हुआ, लेकिन अविनाश और मेरे सारे बिहारी दोस्त बहुत खुश हुए कि उनके बीच से कोई तो चुना गया. उनकी यह भावना देख कर मैं हैरान था. मैंने महसूस किया कि बिहारी यदि किसी को अपना मित्र बनाते हैं तो उसके लिए कुछ भी झेल लेने को तैयार रहते हैं.
मुझे बिहार कैडर आवंटित हुआ. बिहार में काम के दौरान भी मेरा अनुभव अविस्मरणीय रहा है.यहां भावना को लोग समझते हैं. मैंने बहुत सख्ती से नौकरी की है, लेकिन यहां मेरे कामों को जितनी सराहना मिली है, वह किसी भी रिवॉर्ड से सौ गुना-हजार गुना है.
क्षेत्रीय संकीर्णता की भावना से ऊपर हैं बिहारी :बिहार के लोगों में जातिवाद की भावना को लेकर दूसरे प्रदेशों में तरह-तरह की बातें सुनने को मिलती है, लेकिन मैंने देखा कि जातिवाद की भावना सभी प्रदेशों में है. हां, बिहार के लोग इसे दूसरों की तरह इस भावना को छिपाते नहीं, इस पर खुल कर बोलते हैं. लेकिन, बिहारियों की सोच में क्षेत्रीयता या संकीर्णता की भावना नहीं है. यहां के लोग किसी भी मुद्दे पर देश की तरह सोचते हैं, राष्ट्रीयता की भावना से भरे हैं. आप पंजाब और हरियाणा को देखिए, वहां के लोग पानी को लेकर किस प्रकार आपस में लड़ने के लिए तैयार रहते हैं. कावेरी जल को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के लोग आपस में भिड़ रहे हैं.
तमिलनाडु में बसें जला दी गयीं. ऐसी संकीर्ण क्षेत्रीयता की भावना बिहार के लोग में नहीं दिखती. यहां के लोगों को यूपी और बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों को देख कर जलन नहीं होती. हमारे दोस्त बताते थे कि पंजाब में जब भाखड़ा नंगल डैम बना, तो उसकी चर्चा उसके दादा करते थे. देश में कहीं भी बड़ा काम हो, यहां के लोग खुश होते थे. उसे यह नहीं लगता कि बिहार में यह नहीं है. उसकी सोच राष्ट्रीय स्तर की होती है. ऐसी भावना दूसरे प्रदेशों में कम ही दिखती है. इस देश को एक बने रहना है, तो बिहारियों की इस भावना को पूरे देश में फैलाना होगा.
बिहारियों का संस्कार ऐसा है, जो और कहीं नहीं : बिहार बदल रहा है, बिहार की छवि बदल रही है. मुझे यहां के बारे में नैसर्गिक तरीके से गर्व होता है. न सिर्फ बिहार का इतिहास, बल्कि बिहारियों का संस्कार भी अद्भुत है, जो और कहीं नहीं दिखता. बिहारी युवा अपने पिता और बड़े भाई के सामने सिगरेट भी नहीं पीता. यह संस्कार सब जगह नहीं दिखता.
एक बिहारी शहर में भले ही किराये के कमरे में रहता है, लेकिन वह अपने साथ खुद के बच्चों के अलावा भतीजा-भतीजी और भगिना-भगिनी को भी उसी तरह रखता-पढ़ाता है. नौकरी भले साधारण सी हो, लेकिन वह भाई और बहन के बच्चों को, यहां तक कि गांव के बच्चों को भी साथ रख कर उसकी उसी तरह परवाह करता है, जैसे अपने बच्चों की करता है. खास बात यह कि बिहारी इन बातों का कोई अहसान भी नहीं लेता, इसे तो वह अपनी ड्यूटी समझता है. यह सब चीजें किसी दूसरी जगह नहीं दिखती. हमें बिहारियों के इन गुणों पर गर्व करना चाहिए.
बिहारियों को सिर्फ भावनात्मक तरीके से जीता जा सकता है : बिहारियों में एक और खास बात है. उन्हें कोई भी शास्त्रार्थ से नहीं हरा सकता. बिहारी बड़े जिज्ञासु होते हैं. लेकिन, भावना से उनका दिल जीता जा सकता है. गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व की तैयारियों के दौरान मैंने अपने इसी अनुभव का सहारा लिया और पुलिसवालों को भावनात्मक तरीके से समझाया कि प्रकाश पर्व उनकी ड्यूटी और मेहमान नवाजी की परीक्षा है. फिर क्या था, बिहार के पुुलिसवाले दिन रात जग कर पटना में संगतों की सेवा में जुटे रहे. विनम्रता के साथ उनकी सुरक्षा और सहयोग के लिए हर पल तैयार और सजग रहे. पुलिसवालों ने इतना अच्छा काम किया कि मैं तो उनका ऋणी हो गया हूं. मैं तो पंजाब का रहनेवाला हूं.
मैं वहां की संस्कृति को जानता हूं. लेकिन, यहां नौकरी करते-करते अब बिहारी भी बन गया हूं. पूरे आयोजन के दौरान मैं सिर्फ पुल का काम करता रहा. बिहारियों और पंजाबियों के बारे में एक-दूसरे के मन में फैली भ्रांतियों को दूर किया.
अब भी आ रहे हैं रोज सैकड़ों इमेल और फोन कॉल : प्रकाश पर्व के बहाने पहली बार बिहार आये हजारों लोग बिहारियों की मेजबानी देख कर चकित हुए. अब भी रोज सैकड़ों इमेल और फोन कॉल आ रहे हैं. बाहर से आये लोग हैरान हैं कि पुलिस का इतना सज्जन चेहरा भी होता है. मैं जवाब में उन्हें बिहारी लोगों की खासियतों के बारे में बताता हूं. मुझे लगता है कि अगर वह किसी बिहारी को करीब से जानते होते तो उन्हें बिल्कुल हैरानी नहीं होती. सम्मान और सद्भाव तो बिहार के लोगों की आदत में शुमार है. बिहार और बिहारियों पर मुझे गर्व है.
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