नीतीश ने चौथी बार संभाली बिहार की कमान, 22 को किया कैबिनेट में शामिल

पटनाः पद छोडने के नौ महीने बाद जनता दल (यू)के नेता नीतीश कुमार ने आज बिहार के मुख्यमंत्री पद की फिर से शपथ ली जिससे बिहार में पिछले कई दिनों से सत्ता संघर्ष को लेकर चल रही राजनीतिक नौटंकी का पटाक्षेप हो गया. राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने राजभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में 63 […]
पटनाः पद छोडने के नौ महीने बाद जनता दल (यू)के नेता नीतीश कुमार ने आज बिहार के मुख्यमंत्री पद की फिर से शपथ ली जिससे बिहार में पिछले कई दिनों से सत्ता संघर्ष को लेकर चल रही राजनीतिक नौटंकी का पटाक्षेप हो गया.
राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने राजभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में 63 वर्षीय नीतीश को पद की शपथ दिलाई जिसमें जीतनराम मांझी भी शामिल हुए. मांझी ने पार्टी नेतृत्व के आदेशों की अवहेलना करते हुए नीतीश के लिए पद छोडने से इंकार कर दिया था और बिहार पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक ड्रामेबाजी का अखाडा बना हुआ था.
नीतीश के अलावा तीन महिलाओं सहित 22 मंत्रियों को भी शपथ दिलाई गई. र्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौडा सहित कई मुख्यमंत्रियों — ममता बनजी (श्चिम बंगाल) अखिलेश यादव (त्तर प्रदेश) तरुण गोगोई (असम)और आईएनएलडी नेता अभय चौटाला भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए.
जिन मंत्रियों ने पद की शपथ ली- विजय कुमार चौधरी, विजेन्द्र प्रसाद यादव, रमई राम, दामोदर राउत, नरेन्द्र नारायण यादव, पी. के. शाही, श्याम रजक, अवधेश कुशवाहा, लेसी सिंह, दुलाल चंद गोस्वामी, राजीव रंजन उर्फ लल्लन सिंह, श्रवण कुमार, रामलषण राम रमन, रामधनी सिंह, जय कुमार सिंह, मनोज कुमार सिंह, जावेद इकबाल अंसारी, बीमा भारती, रंजू गीता, वैद्यनाथ सहनी, विनोद सिंह यादव और नौशाद आलम शामिल हैं.
इन 22 मंत्रियों में से 20 ने मांझी सरकार से इस्तीफा दे दिया था जबकि दो अन्य पी. के. शाही और राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री मांझी ने बर्खास्त कर दिया था.आज के शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही 63 वर्षीय नीतीश फिर से मुख्यमंत्री पद पर आरुढ हो गए हैं जो उन्होंने लोकसभा चुनावों में हार के बाद 17 मई 2014 को छोड दिया था. अपने विधायकों के विरोध के बावजूद पद छोडने के बाद नीतीश ने 20 मई 2014 को मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था.
लेकिन निर्णय के आठ महीने के अंदर ही मांझी एवं जद यू के मंत्रियों एवं विधायकों के एक धडे की तरफ से हो रहे विरोध को देखते हुए नीतीश को अपनी योजना में बदलाव लाना पडा. भाजपा ने इस मतभेद का फायदा उठाया और मांझी को समर्थन दे दिया. लेकिन मांझी ने विश्वास मत का सामना करने से पहले ही गत शुक्रवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया.
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