कोसी पर हाइडैम बनाने के लिए नेपाल तैयार

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : नेपाल सरकार कोसी नदी पर हाइडैम बनाने के लिए तैयार हो गयी है. इस संबंध में जल्द ही भारत और नेपाल के बीच विस्तार से बातचीत कर योजना को अंतिम रूप दिया जायेगा. एक दिन के दौरे पर पटना आये केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने यह जानकारी दी है.

उन्होंने कहा कि कोसी नदी पर हाइडैम बनाने को लेकर पिछले दिनों उन्होंने नेपाल सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों से बातचीत की थी. उन्होंने इस पर सहमति जतायी है. इस डैम के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात हुई है. बिहार के लिए वरदान साबित होने वाले इस हाइडैम के बनने से राज्य को बाढ़ से राहत मिलेगी, सिंचाई सुविधाओं का विकास होगा और करीब पांच हजार मेगावाट पनबिजली का उत्पादन हो सकेगा.
दरअसल, गंगा बाढ़ नियंत्रण पर्षद (जीएफसीसी) ने 1986 में ही नेपाल में कोसी और उसकी सहायक नदियों के साथ वराह क्षेत्र में डैम बनाने की अनुशंसा की थी. साथ ही बागमती नदी पर नेपाल के नूनथोर में जलाशय, गंडक नदी पर नेपाल में तीन डैम और कमला बलान पर नेपाल के शीशापानी में बहुद्देशीय जलाशय निर्माण की भी अनुशंसा की थी.
भारत-नेपाल के बीच प्रधानमंत्री स्तर पर थी सहमति
1991 में भारत-नेपाल के बीच प्रधानमंत्री स्तर पर सहमति के बाद सप्तकोशी बांध परियोजना के लिए भारत-नेपाल संयुक्त विशेषज्ञ दल गठित किया गया. इस दल ने योजना का प्रारंभिक प्रतिवेदन तैयार किया. इस पर दोनों सरकारों की सहमति हुई. इसके अनुसार सप्तकोशी बांध जलाशय योजना से सिंचाई, बाढ़ प्रबंधन, पनबिजली उत्पादन के साथ-साथ नौ-परिवहन का लाभ दोनों देशों को प्राप्त होना था. इसके बाद कई बैठकें हुईं. भारत सरकार ने डीपीआर बनाने के लिए राशि स्वीकृत की, लेकिन डीपीआर नहीं बन सकी.
बिहार को बाढ़ से मिलेगी राहत, सिंचाई सुविधाओं का होगा विकास व पांच हजार मेगावाट पनबिजली का हो सकता है उत्पादन
ऐसे बढ़ी बात
भारत सरकार ने अप्रैल 1972 में जीएफसीसी का गठन किया, लेकिन उसे भी हाइडैम बनाने का सुझाव देने में 14 साल लग गये.
पहली बैठक 1991 में भारत-नेपाल के बीच प्रधानमंत्री स्तर पर हुई. इसमें सहमति बनी.
दूसरी बैठक भारत-नेपाल सचिव स्तरीय जल संसाधन संबंधी संयुक्त समिति की काठमांडू में सात और आठ अक्तूबर 2004 को हुई.
अबतक करीब 20 उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं.
हाल ही में जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने भी हाइडैम बनाने का मुद्दा उठाया था.
योजना में क्या था
भारत-नेपाल के बीच सहमति के बाद सप्तकोसी नदी पर वराह में 269 मीटर
ऊंचा और कुरुले के पास 49 मीटर ऊंचा बांध बनना था. वहीं कोसी नदी पर चतरा में एक बराज, डायवर्सन टनल बनाये जाने का प्रस्ताव था. इसके साथ ही भारत में 9.76 लाख हेक्टेयर और नेपाल में 5.46 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधाओं का विकास होना था. वहीं अधिकतम डिस्चार्ज को एक तिहाई कम करना था.
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