कैंसर का इलाज कराने सार्क देशों से भी आते हैं मरीज

Updated at : 30 Oct 2019 6:33 AM (IST)
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कैंसर का इलाज कराने सार्क देशों से भी आते हैं मरीज

पटना : पीएमसीएच का रेडियोथेरेपी विभाग देश में सबसे पहले स्थापित होने वाले कैंसर संस्थानों में से एक है. यहां अभी भी देश के विभिन्न राज्यों से मरीज आते हैं. यही नहीं सार्क देशों में शामिल नेपाल, बांग्लादेश व मालदीव से भी आर्थिक रूप से कमजोर कैंसर मरीज यहां इलाज को आते हैं. क्योंकि यहां […]

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पटना : पीएमसीएच का रेडियोथेरेपी विभाग देश में सबसे पहले स्थापित होने वाले कैंसर संस्थानों में से एक है. यहां अभी भी देश के विभिन्न राज्यों से मरीज आते हैं. यही नहीं सार्क देशों में शामिल नेपाल, बांग्लादेश व मालदीव से भी आर्थिक रूप से कमजोर कैंसर मरीज यहां इलाज को आते हैं.

क्योंकि यहां कंसल्टेशन से लेकर रहने, भोजन व इलाज की सुविधा बिल्कुल मुफ्त में मिलती है. देश के सबसे सस्ते अस्पताल में भी कैंसर की सेंकाई न्यूनतम 50 से 60 हजार रुपये में होती है. जबकि यहां केवल दवाई का ही खर्च देना पड़ता है.
1928 में लॉर्ड इरविन ने स्थापित किया था कैंसर संस्थान
राज्य में कैंसर मरीजों की सेंकाई को शुरू करने का श्रेय कर्नल वावघन को जाता है. उन्होंने ही 1913 में 10 ग्राम रेडियम रेडियोथेरेपी के लिए रांची में लाये थे. इंस्टीट्यूट की स्थापना पहले रांची में हुई थी लेकिन, कैंसर मरीजों की सहूलियत के लिए 1928 में इसे पटना में शिफ्ट कर दिया गया. पटना मेडिकल कॉलेज व अस्पताल को रेडियम इंस्टीट्यूट के नाम से भी जाना जाता था.
1928 में तत्कालीन वायसराय सर लार्ड इरविन के पटना दौरे के समय इसकी विधिवत स्थापना हुई थी. उस समारोह में रेडियम इंस्टीट्यूट के भवन के लिए दरभंगा के महाराजा कुमार विश्वेश्वर सिंह ने 50 हजार और महाराजाधिराज बहादुर सर रामेश्वर सिंह ने एक लाख रुपये का दान दिया था. नये भवन में 1931 से यह विभाग चल रहा है. विभाग में आठ केबिन समेत 48 कैंसर मरीजों के लिए बेड उपलब्ध है.
29 करोड़ से आधुनिकीकरण का है प्रस्ताव
विभाग को आधुनिक बनाने के लिए 29 करोड़ रुपये से आधुनिकीकरण का प्रस्ताव तैयार किया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति व्यक्त कर दी है. इस राशि से यहां ब्रेकीथेरेपी मशीन से लेकर इलेक्ट्रोन किरणों वाली लीनियर एक्सीलेटर मशीन लगायी जायेगी.
ब्रेकीथेरेपी मशीन की लागत लगभग चार करोड़ रुपये की है, इस मशीन में बीच के हिस्से में सेंकाई होती है. वहीं 18 करोड़ रुपये की लागत वाली लीनियर एक्सीलेटर मशीन से इलेक्ट्रॉन रेज से कैंसर की पहचान हो सकेगी. अभी यहां दो आधुनिक कोबाल्ट मशीन है, जिससे कैंसर मरीजों की सेंकाई की जाती है.
पीएमसीएच के कैंसर विभाग में मरीजों के कंसल्टेशन से लेकर इलाज तक बिल्कुल मुफ्त में किया जाता है. इस कारण देश के विभिन्न राज्यों के साथ सार्क देशों से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. यहां आधुनिकीकरण के तहत मशीनों को लगने के बाद इलाज में और भी सुविधाएं मिल जायेगी.
-डॉ पीएन पंडित, विभागाध्यक्ष, रेडियोथेरेपी, पीएमसीएच
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