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बुडको ने जलजमाव हटाने में जलाया 6.5 करोड़ का डीजल

Updated at : 17 Oct 2019 7:20 AM (IST)
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बुडको ने जलजमाव हटाने में जलाया 6.5 करोड़ का डीजल

पटना : बुडको ने पटना में हुए जल जमाव को हटाने के लिए करीब छह दिन में साढ़े छह करोड़ का डीजल जला दिया है. यह आंकड़ा सिर्फ बुडको की तरफ से चलाये जाने वाले पंप का है. इसके अलावा नगर निगम ने पानी सूखाने के लिए अलग से डीजल पर पैसे खर्च किये हैं.इतना […]

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पटना : बुडको ने पटना में हुए जल जमाव को हटाने के लिए करीब छह दिन में साढ़े छह करोड़ का डीजल जला दिया है. यह आंकड़ा सिर्फ बुडको की तरफ से चलाये जाने वाले पंप का है. इसके अलावा नगर निगम ने पानी सूखाने के लिए अलग से डीजल पर पैसे खर्च किये हैं.इतना खर्च होने के बाद भी कई इलाकों से अभी तक पानी नहीं निकला है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बाइपास पर मौजूद एक नामी पेट्रोल पंप से डीजल खरीद की जिम्मेदारी तय हुई थी. उस पंप से हकीकत में सौ रुपये का डीजल खरीदा जाता था, लेकिन बिल पांच सौ का लिया जाता था. बुडको ने अभी तक इस पंप का लाखों रुपये का बकाया भी रखा हुआ है.

डीपीआर के आधे-अधूरे काम के बदले बुडको ने मैनहट को कर दिया 14 करोड़ का पेमेंट : राजधानी में जल निकासी को लेकर आधे अधूरे तैयार डीपीआर करने वाली कंपनी मैनहट्टन को बुडको ने करीब 14 करोड़ रुपये का पेमेंट कर दिया गया. यह पेमेंट एक बार में नहीं, बल्कि कई चरणों में कंपनी को किया गया है.
नोएडा के पते पर रजिस्टर्ड इस कंपनी का पटना में न कोई कार्यालय है और न ही कोई बैंक एकाउंट. इस वजह से इसके नयी दिल्ली के बीकेएस मार्ग स्थित सिटी बैंक की शाखा में मौजूद एकाउंट में अधिकांश पैसे का पेमेंट हुआ है. इसी क्रम में 27 नवंबर 2017 को कंपनी की इसी खाता में दो करोड़ 68 लाख रुपये का पेमेंट एक बार में किया गया था. अन्य राशि अलग-अलग बार में पेमेंट की गयी है.
मैनहट कंपनी की डीपीआर की मॉनीटरिंग करने के लिए बुडको ने डीएचवी नामक कंपनी के साथ दो साल का एकरारनामा किया था. इस कंपनी ने इस डीपीआर पर कई गंभीर आपत्तियां उठायी थी, लेकिन इस रिपोर्ट पर बिना कार्रवाई किये ही इसे बुडको के तत्कालीन प्रमुख अधिकारियों ने दबा कर रख दिया.
इसमें विशेषज्ञों ने यह उल्लेखित किया गया था कि पटना के कई मोहल्लों खासकर अधिक जलजमाव वाले इलाकों की टोपोलॉजी का बिना समुचित तरीके से अध्ययन किये ही इसे तैयार कर लिया गया है. जानकार बतााते हैं, नालों की डिजाइन तैयार करने में ‘ग्रैवेटी फ्लो’ का ध्यान नहीं रखा गया था, जिससे नालों से पानी का सही तरीके से निकलना कभी संभव ही नहीं हो पायेगा.
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