पटना : सरकारी केंद्र पर धान बेचने में किसानों की कम दिलचस्पी

Updated at : 16 Jul 2019 9:05 AM (IST)
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पटना : सरकारी केंद्र पर धान बेचने में किसानों की कम दिलचस्पी

धान खरीदने वाली समितियों की संख्या भी घट रही, लक्ष्य के अनुरूप धान की नहीं हो रही सरकारी खरीद पटना : सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचने में किसानों की दिलचस्पी कम होती जा रही है. बाजार से कम भाव, देर से भुगतान और जरूरत के समय बाजार में बिक जाने की सुविधा से किसान […]

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धान खरीदने वाली समितियों की संख्या भी घट रही, लक्ष्य के अनुरूप धान की नहीं हो रही सरकारी खरीद

पटना : सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचने में किसानों की दिलचस्पी कम होती जा रही है. बाजार से कम भाव, देर से भुगतान और जरूरत के समय बाजार में बिक जाने की सुविधा से किसान अब सरकारी खरीद केंद्रों पर जाने से बचने लगे हैं.

पिछले पांच सालों में देखा जाये तो लक्ष्य के अनुरूप कभी भी धान खरीद सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं हो पायी है. 2014-15 में लक्ष्य का 79.20 फीसदी धान की खरीद हुई थी, यह अब घटकर 47.20 प्रतिशत तक पहुंच गया है.

हालांकि, 2018-19 में साल 2017-18 की तुलना में अधिक धान की खरीद हुई है.

सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने में तो किसानों की कोई खास दिलचस्पी ही नहीं है. धान खरीद करने वाली समितियों की संख्या भी लगातार घट रही है. 2014-15 में 6377 समितियों ने धान खरीदी थी, जबकि 2018-19 में 5019 समितियों ने धान खरीदी. पिछले पांच वित्तीय वर्ष 2014-15 से सरकार हर साल 30 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य तय करती है, लेकिन किसी भी साल लक्ष्य पूरा नहीं होता है.

साल 2014-15 में लक्ष्य 30 लाख टन की जगह 19.01 लाख टन की खरीद हुई. साल 2017-18 में तो यह घटकर 11.84 लाख टन पहुंच गया. साल 2018-19 में थोड़ा सुधार हुआ और यह 14.16 लाख टन पहुंचा. साल 2015-16 में 18.23, 2016-17 में 18.42 लाख टन धान की खरीद हुई. 2014-15 में 2.17 लाख किसानों ने धान बेचा था. 2017-18 में यह घटकर 1.63 लाख पर पहुंच गया था. 2018-19 में 2.10 लाख किसानों ने सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचा.

भुगतान में देरी से किसानों को हो रही दिक्कत

धान बेचने की जटिल प्रक्रिया और भुगतान में देरी के कारण 2017-18 में किसानों ने कम मात्रा में सरकारी केंद्रों पर धान बेचने की कोशिश की. हालांकि, 2018-19 में भुगतान की प्रक्रिया में सुधार के बाद स्थिति में सुधार हुआ. 2018-19 में रैयती किसान से कुल खरीद का 66 फीसदी और गैर रैयत किसानों से 34 फीसदी धान खरीदा गया.

इस साल दो लाख 10 हजार 028 किसानों में से एक लाख 21 हजार 816 रैयती किसान और 88 हजार 212 गैर रैयती किसानों से धान की खरीद की गयी. इस साल खरीदी गयी धान की कीमत 2478 करोड़ से अधिक थी. इसका शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया. सहकारिता मंत्री राणा रणधीर ने कहा कि 2017-18 में किसान कम संख्या में धान बेचने सरकारी केंद्र पर आये थे, लेकिन भुगतान में तेजी के कारण 2018-19 में संख्या बढ़ी है.

6.30 लाख हेक्टेयर में हुई रोपनी

पटना : आर्दा व पुनर्वसु में अच्छी बारिश होने से राज्य में धान की रोपनी में तेजी आयी है. 20 जुलाई से पुष्य नक्षत्र शुरू हो रहा है. राज्य में 15 जुलाई तक लक्ष्य 33 लाख हेक्टेयर की जगह 6.30 लाख हेक्टेयर से अधिक में रोपनी हो चुकी है. 14 जुलाई से मौसम के मिजाज में भी परिवर्तन आया है. 15 जुलाई को सामान्य से तीन फीसदी अधिक बारिश हुई. राज्य के बड़े हिस्से में बाढ़ भी आयी हुई है. कृषि विभाग इसको लेकर भी सचेत है.

जुलाई में अब तक अच्छी बारिश होने से लक्ष्य 3.30 लाख हेक्टेयर की जगह 309911 हेक्टेयर में धान के बिचड़े की बुआई हो चुकी है. कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब बिचड़े की कमी नहीं रहेगी.

राज्य में एक से 15 जुलाई के बीच 73 फीसदी अधिक बारिश हुई. सामान्य 174.4 की जगह 302.3 एमएम बारिश हुई. 14 जुलाई को 12.8 एमएम की जगह 22.8 एमएम बारिश हुई. यह सामान्य से 78 फीसदी अधिक है. 15 जुलाई को 11.8 एमएम की जगह 12.2 एमएम बारिश हुई. इधर, राज्य के बड़े हिस्से में बाढ़ के कारण कृषि कार्य ठप हो गया है. विभाग का इस पर भी नजर है. अभी बहुत नुकसान की संभावना नहीं है.

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