गांवों काे नहीं मिला कोड, आवेदन हुए रद्द

Updated at : 26 Jun 2019 3:56 AM (IST)
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गांवों काे नहीं मिला कोड, आवेदन हुए रद्द

पटना : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में लोकल गर्वनेंस डायरेक्टरी में गांवों का कोड (एलजी कोड) नहीं मिलने से किसानों को आवेदन करने में परेशानी हो रही है. बड़ी संख्या में किसानों का आवेदन रद्दे हो गये हैं.बताया जा रहा है कि एलजी कोड के अभाव में हजारों गांवों के किसान आवेदन नहीं कर […]

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पटना : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में लोकल गर्वनेंस डायरेक्टरी में गांवों का कोड (एलजी कोड) नहीं मिलने से किसानों को आवेदन करने में परेशानी हो रही है. बड़ी संख्या में किसानों का आवेदन रद्दे हो गये हैं.बताया जा रहा है कि एलजी कोड के अभाव में हजारों गांवों के किसान आवेदन नहीं कर पा रहे हैं.

इसके चलते आवेदन की गति धीमी है. इधर, कृषि विभाग ने इस परेशानी को दूर करने के लिए पंचायती राज विभाग को पत्र भेजा है. पंचायती राज विभाग जिला, प्रखंड, पंचायत और गांवों का एक कोड तय करता है. विभाग इसे समय- समय पर अपडेट करता है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में आवेदन के समय गांव का नंबर देना होता है.

विभागीय सूत्रों के अनुसार किसान जब आवेदन करते हैं, तो उन्हें अपने गांव का कोड नहीं मिल पाता है. इसके चलते आवेदन नहीं हो पाता है. ऐसे गांवो की संख्या हजारों में है. एलजी कोड के नहीं रहने से करीब 60 से 65 हजार आवेदन केंद्र सरकार ने रिजेक्ट कर दिया है. अब तक राज्य में 43 लाख से अधिक किसानों ने इस योजना में आवेदन किया है. इसमें 23 लाख
से अधिक आवेदन योजना के पोर्टल पर अपडेट कर दिया गया है. कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि इस तरह का मामला आया है. इसके लिए पंचायती राज विभाग को पत्र लिखा गया है. जल्द ही इस समस्या दूर कर ली जायेगी.
क्या है एलजी कोड
लोकल गवर्नेंस डायरेक्टरी में सभी जिला, पंचायत और गांव का एक कोड होता है. किसानों को कोड नहीं मिलने से अन्य का विकल्प दिया गया था. लेकिन, केंद्र सरकार की योजना में अन्य विकल्प स्वीकार नहीं किये जा रहे हैं.
पशु तस्करों के खिलाफ सरकार करेगी कड़ी कार्रवाई : प्रेम कुमार
पटना. पशु एवं मत्स्य संसाधन सह कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कहा है कि पशुओं की तस्करी करने वालों के
खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी. पटना और गया की सड़कों पर यत्र-तत्र घूमने वाली गायों को गोशाला में रखने पर होने वाला खर्च राज्य सरकार उठायेगी. चालू वित्तीय वर्ष में सरकार इस पर 1.10 करोड़ खर्च करेगी.पशु तस्करी के क्रम में पकड़े गये पशुओं के रखरखाव, पशु दवा एवं चारा–दाना हेतु 85 लाख का प्रावधान किया गया है. इस राशि से अर्न्तराष्ट्रीय सीमा वाले सात जिले पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज एवं अर्न्तराज्यीय सीमा वाले 15 जिले पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर, सारण, सीवान तथा गोपालगंज को प्रति जिला एक लाख व शेष 16 जिलों को प्रति जिला 25 हजार की दर से राशि िमलेगी.
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