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पटना : पलायन से गांवों में कम हुई पुरुष वोटरों की संख्या

Updated at : 30 Apr 2019 6:46 AM (IST)
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पटना : पलायन से गांवों में कम हुई पुरुष वोटरों की संख्या

वोट करने महिलाएं पहुंच रहीं बूथों पर, बिहार में अब तक हुए चुनाव में कम वोट पड़े हैं पटना : पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र यहां तक की असम और यूपी की तुलना में बिहार में अब तक हुए चार चरणों के चुनाव में सबसे कम वोट पड़े, तो इसका राज्य से लोगों का पलायन एक प्रमुख […]

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वोट करने महिलाएं पहुंच रहीं बूथों पर, बिहार में अब तक हुए चुनाव में कम वोट पड़े हैं
पटना : पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र यहां तक की असम और यूपी की तुलना में बिहार में अब तक हुए चार चरणों के चुनाव में सबसे कम वोट पड़े, तो इसका राज्य से लोगों का पलायन एक प्रमुख कारण है. राज्य से कम पढ़े-लिखे युवाओं से लेकर शिक्षित तबका भी पलायन कर रहा है. ऐसे में शहर और गांवों में वोट का प्रतिशत भले ही 2014 की तुलना में थोड़ा बढ़ गया हो, पर पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से बहुत पीछे रह गया है.
पहले चरण में बिहार में 53.06 प्रतिशत, दूसरे चरण में 62.53 प्रतिशत और तीसरे चरण में 60 प्रतिशत ही वोट गिरे. जबकि, बंगाल में पहले चरण में 81, दूसरे में 75.27 और तीसरे चरण में 79 प्रतिशत मतदान हुए हैं. इसी प्रकार महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ में भी बिहार की तुलना में अधिक वोट पड़े हैं. राज्य सरकार के आंकड़े बताते हैं कि अधिकतर जिलों में रोजगार व खेती का स्रोत कमा है. जिलों से 1995 के बाद से लगातार पलायन जारी है. 2011 की जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार से 44 लाख लोग दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं. बिहार आर्थिक अध्ययन संस्थान की शोध रिपोर्ट के अनुसार पलायन की दर सर्वाधिक अनुसूचित जाति एवं पिछड़ी जातियों में है.
12 प्रतिशत सवर्ण भी पलायन के शिकार हैं. इसके अलावा बिजनेस, पढ़ाई, नौकरी और जन्म के बाद दूसरे राज्यों में रहने वालों की संख्या भी लाखों में है, जो बिहार में पर्व, त्योहार में पहुंचते हैं, जिसका असर भी चुनाव के दौरान वोटिंग प्रतिशत पर पड़ता है. जनगणना की रिपोर्ट के अनुसार गांवों में पुरुषों की संख्या कम हुई है और महिलाओं की संख्या बढ़ी है.
पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से वोट देने में पीछे रह गये हैं हम
एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान के पूर्व निदेशक डाॅ डीएम दिवाकर कहते हैं, पलायन तो बिहार से लगातार जारी है. इसका असर वोट प्रतिशत पर भी पड़ा है. गांवों में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में कम है. इसलिए महिलाओं की लंबी कतार दिखती है. यदि दीवाली और छठ के समय चुनाव हो तो बिहार में भी वोट का प्रतिशत बढ़ जायेगा.
जनसंख्या घनत्व अधिक, प्रति व्यक्ति आय अन्य राज्यों की तुलना में चार गुना कम
बिहार में जनसंख्या घनत्व अधिक है और यहां प्रति व्यक्ति आय देश के अन्य राज्यों की तुलना में चार गुना कम है. उद्योग-धंधा कम होने से लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है. स्वास्थ्य, शिक्षा व तकनीक का अभाव पलायन के मुख्य कारण हैं.
1955 के बाद जब उद्योग शुरू हुआ, तब से पलायन का दौर शुरू हुआ. गांव के लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने और सरकार की योजनाओं की जानकारी के अभाव में गांव से लोग दूर होते गये. 1995 के बाद पलायन बिहार में और बढ़ गया.
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