पटना : परिसीमन के बाद 33 सीटों पर महिलाओं का नहीं हुआ प्रतिनिधित्व

Updated at : 10 Apr 2019 5:20 AM (IST)
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पटना : परिसीमन के बाद 33 सीटों पर महिलाओं का नहीं हुआ प्रतिनिधित्व

प्रमोद झा पूर्व के चुनावों में महिलाओं ने दिखाया था दम, पहले चुनाव में भागलपुर साउथ से सुषमा सेन हुई थीं िवजय पटना : परिसीमन के बाद हुए दो लोकसभा चुनावों में राज्य की 33 सीटों पर एक भी महिला उम्मीदवार नहीं जीत पायी है. 2009 में उजियारपुर से अश्वमेघ देवी, आरा से मीना सिंह, […]

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प्रमोद झा

पूर्व के चुनावों में महिलाओं ने दिखाया था दम, पहले चुनाव में भागलपुर साउथ से सुषमा सेन हुई थीं िवजय

पटना : परिसीमन के बाद हुए दो लोकसभा चुनावों में राज्य की 33 सीटों पर एक भी महिला उम्मीदवार नहीं जीत पायी है. 2009 में उजियारपुर से अश्वमेघ देवी, आरा से मीना सिंह, सासाराम सुरक्षित से मीरा कुमार व शिवहर सीट पर रमा देवी जीतीं. 2014 में मुंगेर से वीणा देवी, शिवहर से रमा देवी व सुपौल से रंजीत रंजन सफल रहीं. पूर्व के लोकसभा चुनावों में महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया था. महिलाएं चुनाव में न केवल हिस्सा लीं, बल्कि पूरी मुस्तैदी से चुनाव लड़ कर फतह हासिल कीं.

1952 के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2014 तक 22 लोकसभा क्षेत्रों का महिलाओं ने किसी न किसी लोकसभा चुनाव में प्रतिनिधित्व किया. संयुक्त बिहार में पहले लोकसभा चुनाव में भागलपुर साउथ से सुषमा सेन के जीतने के बाद भागलपुर से पिछले लोकसभा चुनाव तक एक भी महिलाएं नहीं जीतीं. वहीं 1951 में पटना पूर्व से तारकेश्वरी सिन्हा व 1962 में पटना से रामदुलारी सिन्हा के बाद कोई महिला प्रतिनिधित्व नहीं रहा.

शुरू से रही भागीदारी: पहले लोकसभा चुनाव से ही महिलाएं अपनी भागीदारी दिखाती रही हैं. पहला लोकसभा चुनाव जीतकर 24 महिलाएं बतौर सांसद संसद पहुंची थीं. संयुक्त बिहार से दो महिलाएं संसद पहुंचीं.

इसमें पटना पूर्व से तारकेश्वरी सिन्हा व भागलपुर साउथ से सुषमा सेन सांसद बनी थीं. तारकेश्वरी सिन्हा इसके बाद 1957, 1962 व 1967 में लगातार तीन बार कांग्रेस के टिकट पर बाढ़ से विजयी रहीं. वह नेहरू के कैबिनेट में 1958 से 1964 तक वित्त राज्य मंत्री रहीं.

1957 के दूसरे लोकसभा चुनाव में बांका से शंकुतला देवी, बाढ़ से तारकेश्वरी सिन्हा व नवादा से सत्यभामा देवी तीनों कांग्रेस से चुनाव जीतीं. 1962 में बांका, पटना व बाढ़ के अलावा औरंगाबाद से ललिता राज्य लक्ष्मी, जहानाबाद से सत्यभामा देवी सफल रहीं. महिला उम्मीदवारों के लिए 1977 का लोकसभा चुनाव ठीक नहीं रहा. उसमें नौ महिलाओं में एक भी नहीं जीत पायीं.

इन क्षेत्रों का महिलाओं ने किया है प्रतिनिधित्व

महिलाओं ने अब तक इन लोकसभा क्षेत्रों का अलग-अलग चुनाव में प्रतिनिधित्व किया है.इसमें वैशाली से किशोरी सिन्हा, उषा सिंह व लवली आनंद, पूर्णिया से माधुरी सिंह, सुपौल व सहरसा से रंजीत रंजन, शिवहर से रामदुलारी सिंह व रमा देवी, मोतिहारी से प्रभावती गुप्ता व रमा देवी, बांका से शंकुतला देवी, मनोरमा सिंह व पुतुल िसंह, बेगूसराय से कृष्णा शाही, महाराजगंज से गिरिजा देवी, गया से भगवती देवी, बिक्रमगंज से कांति सिंह सफल रहीं. नवादा सुरक्षित से मालती देवी, खगड़िया से रेणु कुमारी, औरंगाबाद से श्यामा सिंह, आरा से कांति सिंह प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.

परिसीमन के बाद प्रतिनिधित्व नहीं

परिसीमन के बाद 2009 व 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्राें में महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं हुआ. इसमें वाल्मीकिनगर, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, महाराजगंज, बक्सर, मधुबनी, झंझारपुर, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर, खगड़िया, मधेपुरा, दरभंगा, गोपालगंज सुरक्षित, सीवान, छपरा, हाजीपुर, समस्तीपुर सुरक्षित, बेगूसराय, नवादा, नालंदा, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया सुरक्षित, काराकाट, पाटलिपुत्र, पटना साहिब व जमुई सुरक्षित क्षेत्र शामिल हैं.

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