पटना : लाल ईंट बंद हुई तो कैसे होगी मांग की पूर्ति
Updated at : 05 Apr 2019 5:35 AM (IST)
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना पर निर्माताओं में आक्रोश पटना : बिहार ईंट निर्माता संघ ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की उस अधिसूचना पर आपत्ति जतायी है. इसमें कोयला या लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत संयंत्र से 300 किमी के भीतर किसी भी लाल ईंट भट्ठा नहीं चलाये […]
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना पर निर्माताओं में आक्रोश
पटना : बिहार ईंट निर्माता संघ ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की उस अधिसूचना पर आपत्ति जतायी है. इसमें कोयला या लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत संयंत्र से 300 किमी के भीतर किसी भी लाल ईंट भट्ठा नहीं चलाये जाने की बात कही गयी है.
संघ के कार्यकारी अध्यक्ष मुरारी कुमार मन्नू ने कहा कि यदि राज्य में उपलब्ध फ्लाइ एश की पूरी मात्रा का उपयोग केवल ईंट बनाने के लिए ही हो तो भी इससे राज्य में ईंटों की वार्षिक आवश्यकता का केवल 15 फीसदी ही पूरा किया जा सकता है. मिट्टी की लाल ईंट बनाने वाले भट्ठों को बंद करने पर राज्य में ईंटों की आवश्यकता कहां से पूरी होगी.
प्रेस काॅफ्रेंस में मन्नू ने कहा कि अगर पौंड एश एवं बॉटम एश का उपयोग ईंट बनाने के लिए किया जाये तो 2-3 साल में पौंड एश का भंडार समाप्त हो जायेगा. उस वक्त लाल ईंट बनाने वाले भट्ठे भी बंद हो जाने पर मांग की पूर्ति कैसे होगी. तीन साल बाद जब पौंड एश का भंडार समाप्त हो जायेगा तो इसके माध्यम से ईंट बनाने को लेकर लगाये गये प्लांट व मशीनरी में हुए निवेश का क्या होगा? मन्नू ने बताया कि राज्य में मिट्ठी से बनी लाल ईंट के उत्पादन के लिए 6500 भट्ठे संचालित हैं.
अनुमान के मुताबिक एक ईंट भट्ठे की वार्षिक उत्पादन क्षमता 30 लाख ईंट प्रतिवर्ष की दर से 6500 भट्ठों से करीब 2000 करोड़ ईंट का प्रतिवर्ष उत्पादन है. वहीं, केंद्रीय विद्युत प्राधिकारण के मुताबिक वर्ष 2017-18 में बिहार में फ्लाइ एश का सालाना उत्पादन 73.8 लाख टन था. एक ईंट के लिए 1.4 किग्रा फ्लाइ एश चाहिए. ऐसे में उपलब्ध फ्लाइ एश से 300 करोड़ ईंट ही बन सकती है.
ताप विद्युत संयंत्र से 300 किमी के भीतर लाल ईंट भट्ठा नहीं चलेगा
पौंड एश व बौटम एश भी सीमित : मन्नू ने बताया कि एनटीपीसी के अनुसार राज्य में 28 फरवरी तक 731.2 लाख टन पौंड एश, जबकि 7.37 लाख टन बॉटम एश उपलब्ध है. बावजूद पूरी मात्रा का उपयोग ईंट बनाने में हो तो इससे करीब पांच हजार करोड़ ईंट बनेगी, जो राज्य के ईंट की आवश्यकता को 2.5 वर्ष तक ही पूरा कर सकती है. प्रेस काॅफ्रेंस में संघ के उपाध्यक्ष प्रभात चंद्र, संजय, संजीव कुमार, सत्यानंद, आमिर निषाद मौजूद थे.
मजदूरों को लाभ मिले, ईंट निर्माता भी भयमुक्त काम कर सकें : संघ
श्रम संसाधन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में बिहार ईंट निर्माता संघ के विभिन्न मुद्दों पर गुरुवार को बैठक हुई. बैठक में बिहार ईट निर्माता संघ द्वारा बताया गया कि ईंट निर्माण में श्रमिकों के द्वारा अग्रिम राशि का लेन-देन श्रमिक-मालिक समझौता के अनुसार किया जाता है, लेकिन इस परंपरागत व्यवस्था के कारण ईंट भट्टा मालिक को बंधुआ मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत फंसने की आशंका रहती है.
मजदूरों के लिए ऐसी व्यवस्था बने, जहां मजदूरों को उनकी समस्याओं में अग्रिम का लाभ भी दिया जा सके और ईंट निर्माता भी भय मुक्त रहें. एटक के महासचिव चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि यदि ईंट निर्माता अपने भट्टे पर कार्य करने वाले श्रमिकों का निबंधन निर्माण कामगार के रूप में कराएं और उनके पैसे खाते में जमा कराये तो अधिकतर समस्याओं का समाधान हो जायेगा.
बैठक में के. सेंथिल कुमार, विशेष सचिव, वीरेंद्र कुमार, संयुक्त श्रमायुक्त, रोहित राज सिंह, प्रधान सचिव के सचिव के अतिरिक्त विभिन्न प्रमंडलों के उप श्रमायुक्त एवं सहायक श्रमायुक्त भी उपस्थित थे. बैठक में विभिन्न केंद्रीय श्रम संगठनों के प्रतिनिधि, आर.एन. ठाकुर, गजनफर नबाब एवं बिहार ईंट निर्माता संघ के प्रतिनिधि के साथ ईंट निर्माण में संलग्न श्रमिक भी उपस्थित थे.
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