बैलगाड़ी से निकलते थे चुनाव प्रचार में डॉ रामसुभग

Updated at : 31 Mar 2019 4:06 AM (IST)
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बैलगाड़ी से निकलते थे चुनाव प्रचार में डॉ रामसुभग

मृत्युंजय सिंह, बक्सर : कतांत्रिक मूल्यों के पुरोधा देश के पहले विपक्षी नेता डॉ रामसुभग सिंह अपने बक्सर संसदीय क्षेत्र में बैलगाड़ी से चुनाव अभियान में निकलते थे. वे इस दौरान बैलगाड़ी पर एक सप्ताह का राशन-पानी भी लेकर चलते थे. रात में जिस गांव में रुकते थे, तो लोग आटा, प्याज व जरूरी सामान […]

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मृत्युंजय सिंह, बक्सर : कतांत्रिक मूल्यों के पुरोधा देश के पहले विपक्षी नेता डॉ रामसुभग सिंह अपने बक्सर संसदीय क्षेत्र में बैलगाड़ी से चुनाव अभियान में निकलते थे. वे इस दौरान बैलगाड़ी पर एक सप्ताह का राशन-पानी भी लेकर चलते थे.

रात में जिस गांव में रुकते थे, तो लोग आटा, प्याज व जरूरी सामान उपलब्ध कराते थे. वे बक्सर लोकसभा सीट से 1967 में निर्वाचित हुए. कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़कर बिहार के विकास के लिए गंगा नदी पर बक्सर में पुल का निर्माण करवाये.
1969 के राष्ट्रपति के चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कांग्रेस उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी का प्रस्तावक होने के बावजूद विपक्ष के उम्मीदवार डॉ वीवी गिरी के पक्ष में अभियान छेड़ दिया. राष्ट्रपति के चुनाव के बाद कांग्रेस का विभाजन हो गया. मगर डॉ साहब अवसरवादी नेता नहीं थे.
उन्होंने विपक्ष में रहने का निर्णय लेकर भारतीय राजनीति में अनुकरणीय मिसाल पेश किया. इस हैसियत से भारतीय संसदीय इतिहास में डॉक्टर साहब लोकसभा में मान्यता प्राप्त विपक्षी दल के प्रथम नेता बने. इसके बाद वे दूसरी बार फिर 1969 के बक्सर लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की.
कृषि मंत्री रहते हुए शुरू करायी कृषि विज्ञान की पढ़ाई
1962 में पंडित नेहरू के नेतृत्व में उन्हें देश का कृषि मंत्री का दायित्व सौंपा गया. कृषि मंत्री की हैसियत से डॉक्टर साहब ने कृषि शिक्षा के महत्व को स्वीकार किया. उन्होंने परंपरागत कॉलेजों में कृषि विज्ञान की पढ़ाई की अनुमति दिलवायी. डॉक्टर साहब ने लघु व मध्यम सिंचाई योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को उपलब्ध करायी.
कृषि के औजारों व उपकरणों को सत्ता व सुलभ दर पर उपलब्ध कराने के लिए आरा में जापानी फॉर्म की स्थापना की. तत्कालीन समय में सघन कृषि कार्यक्रम आइएडीपी के अधीन बिहार का एकमात्र जिला शाहाबाद ही था.
…कृषि विकास के लिए आवागमन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उनके प्रयास से आरा-मोहनियां राष्ट्रीय पथ की योजना स्वीकृत की गयी. कृषि मंत्री के अलावा वे देश के रेलमंत्री व डाकघर मंत्री भी रहे.
राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित हो चुके हैं डॉ रामसुभग : आरा के निकट खजुरियां गांव में जुलाई 1917 में उनका जन्म हुआ था. काशी विद्यापीठ वाराणसी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल करने वाले डॉक्टर साहब अपने जीवन के अंतिम समय में उन्होंने अपने को राजनीति से अलग रखा. 63 की आयु में 16 दिसंबर, 1980 को दिल्ली में उनका निधन हो गया. डॉ रामसुभग सिंह ने चार बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया.
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