पटना : सेल्यूट और लेफ्ट-राइट करने से ज्यादा नहीं जानते निजी कंपनियों के गार्ड
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Sep 2018 8:08 AM
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अनुज शर्मा पटना : अपनी और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा एजेंसी की सेवा लेने वालों को यह खबर सोचने पर विवश कर देगी. राज्य की अधिकतर निजी सुरक्षा एजेंसी के गार्ड अनट्रेंड हैं. ट्रेनिंग के नाम पर उनको सेल्यूट मारना और लेफ्ट-राइट करने के अलावा कुछ नहीं आता. बड़ी और नामचीन […]
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अनुज शर्मा
पटना : अपनी और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा एजेंसी की सेवा लेने वालों को यह खबर सोचने पर विवश कर देगी. राज्य की अधिकतर निजी सुरक्षा एजेंसी के गार्ड अनट्रेंड हैं. ट्रेनिंग के नाम पर उनको सेल्यूट मारना और लेफ्ट-राइट करने के अलावा कुछ नहीं आता.
बड़ी और नामचीन सिक्योरिटी एजेंसियां भी इस सूची में शामिल हैं. गृह विभाग ने बिहार में कारोबार करने के लिए आवदेन करने वाली निजी सिक्योरिटी एजेंसियों की जांच कराई तो कई एजेंसियों का ट्रेनिंग सेंटर नहीं मिला. नियमानुसार लाइसेंस के लिए सिक्योरिटी एजेंसी के पास ट्रेनिंग सेंटर का होना सबसे बड़ी और अनिवार्य शर्त है.
निजी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बिहार फलता-फूलता बाजार बनता जा रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 325 से अधिक निजी सुरक्षा एजेंसियां कारोबार कर रही हैं. इनमें 50 एजेंसियों को 12 मार्च 18 से 09 सितंबर 18 के बीच में नया लाइसेंस जारी हुआ है. निजी सिक्योरिटी एजेंसी की ‘प्रभात खबर’ ने पड़ताल की तो सालों से काम कर रहे कुछ गार्डों ने ट्रेनिंग के बारे में बताया कि एक-दो एजेंसी में ही नियुक्ति के दौरान ट्रेनिंग मिलती है.
सिक्योरिटी गार्ड को विस्फोटक की पहचान होनी चाहिए
निजी सुरक्षा एजेंसी अपने गार्ड को क्या ट्रेनिंग देगी सरकार ने इसका भी नियम बनाया है. प्रत्येक गार्ड को कम से कम 20 कार्य दिवसों में 100 घंटे की क्लास और 60 घंटे क्षेत्र प्रशिक्षण देना अनिवार्य है. उसे प्राथमिक उपचार और परिचय पत्र, पासपोर्ट, समार्ट कार्ड सहित पहचानपत्रों की जांच करना आना चाहिए. अंग्रेजी वर्णमाला आती हाे. बैज देखकर पुलिस और सैन्य अधिकारियों की रैंक एवं उन्नत विस्फोटक साधनों की पहचान रखता हो. बख्तरबंद वाहन चला सके.
गृह विभाग ने करायी जांच तो खुल गयी पोल
निजी सुरक्षा एजेंसियों की जांच के नाम पर खानापूरी
निजी सुरक्षा एजेंसियों की नियमित जांच करने का प्राविधान है. अधिकारी इसका पूरी ईमानदारी से पालन नहीं कर रहे हैं. सरकार के विशेष सचिव ने 11 अगस्त 2018 को राज्य के सभी एसएसपी/ एसपी को पत्र लिखा था. स्पष्ट आदेश था कि राज्य में पंजीकृत निजी सुरक्षा एजेंसियों की साल में दो बार जांच की जायेगी. यह जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी करेंगे. प्रत्येक वर्ष 31 जनवरी और 31 जुलाई तक नियमित से विभाग को रिपोर्ट भेज दी जायेगी.
40 फीसदी तक वेतन अपनी जेब में रख लेती हैं कंपनियां
सिक्योरिटी कंपनी अपने गार्ड को वेतन-सुविधा देने में मनमानी कर रही हैं. छोटी-बड़ी सभी कंपनी गार्ड का 40 फीसदी तक वेतन अपनी जेब में रख लेती हैं. काम भी आठ जी जगह 12 घंटे तक ले रही है. पटना में ही गनमैन को भी 17 हजार रुपये से अधिक नहीं मिल रहे. एक दिन छुट्टी करने पर वेतन काट लिया जाता है. सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार देश की सबसे बड़ी सरकारी बैंक में सुरक्षा देने वाली कंपनी बैंक से प्रति माह प्रति गार्ड 23749 रुपये लेती है.
इसके विपरीत गार्ड को वेतन के रूप में 15700 रुपये देती है. दो हजार रुपये पीएफ और एक हजार रुपये ईएसआई के लिए देती है. एक स्कूल आठ घंटा काम करने वाले गार्ड के लिए प्रतिमाह 13 हजार रुपये का भुगतान कर रहा है लेकिन कंपनी उस गार्ड से 12 घंटे काम लेकर 10 रुपये वेतन दे रही है.
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