पटना : दलित और अतिपिछड़े वोटरों पर है सबकी नजर, 2014 में यह थी स्थिति

Updated at : 03 Sep 2018 7:12 AM (IST)
विज्ञापन
पटना : दलित और अतिपिछड़े वोटरों पर है सबकी नजर, 2014 में यह थी स्थिति

पटना : लोकसभा के अगामी चुनाव में इस बार भी दलित और पचपनिया के नाम से जानी जाने वाली अतिपिछड़ी जातियों के वोट पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी. उम्मीदवारों के चयन में भी इन दोनों समूहों को तरजीह मिलेगी. रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की ‘खीर’ में पंचमेवा संबंधी बयान के बाद यह साफ […]

विज्ञापन
पटना : लोकसभा के अगामी चुनाव में इस बार भी दलित और पचपनिया के नाम से जानी जाने वाली अतिपिछड़ी जातियों के वोट पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी.
उम्मीदवारों के चयन में भी इन दोनों समूहों को तरजीह मिलेगी. रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की ‘खीर’ में पंचमेवा संबंधी बयान के बाद यह साफ हो गया है कि भाजपा गठबंधन हो या विपक्ष का खेमा, चुनाव में विकास के तमाम दावों के बीच जातीय समीकरण ही टिकट बंटवारे का मुख्य आधार बनेगा़.
2014 के लोकसभा चुनाव में भी अतिपिछड़ी जातियों और दलित वोटों पर सभी दलों का फोकस था. उस चुनाव में सर्वाधिक जदयू ने आधे दर्जन सीटों पर अतिपिछड़ी जाति के नेताओं को उम्मीदवार बनाया था.
राजद और उसकी सहयोगी पार्टियों ने तीन और भाजपा की सहयोगी पार्टियों ने चार अतिपिछड़ी जाति के उम्मीदवार उतारे थे. नवंबर 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में भी सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति थी. जदयू का फोकस अतिपिछड़ी जातियों पर तो राजद ने मुस्लिम और यादव उम्मीदवारों को तरजीह दी थी. कांग्रेस के सामने सवर्ण मतदाताओं को करीब लाने का टास्क था.
पर सामाजिक समीकरणों को साधने में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियां पिछड़ गयीं. महागठबंधन को भारी सीटें मिलीं और भाजपा 56 पर सिमट गयी. जानकार बताते हैं कि कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल के इलाके में पचपनिया की पहचान वाली अतिपिछड़ी जातियों के वोट बैंक उम्मीदवारों के हार-जीत में मुख्य भूमिका निभाते रहे हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू को जो दो सीटें मिली थीं. उसमें एक पूर्णिया की सीट थी. यहां पार्टी उम्मीदवार संतोष कुशवाहा ने भारी मतों से जीत हासिल की थी. सुपौल की सीट पर जीत तो कांग्रेस उम्मीदवार रंजीता रंजन को मिली. मधेपुरा में जदयू के तत्कालीन उम्मीदवार शरद यादव दूसरे स्थान पर थे.
2014 में यह थी स्थिति
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और जदयू ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. जदयू ने छह अति पिछड़ों के अलावा सात यादव, छह कुशवाहा, दो वैश्य और 10 सवर्ण उम्मीदवार उतारे थे. पार्टी ने पांच सीटों पर मुसलिम उम्मीदवार भी दिया था. इसी प्रकार महादलित तबके से पांच और दलित वर्ग से एक उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा गया़ था.
जदयू ने कुशवाहा बिरादरी को भी छह सीटें दी थीं. मध्य बिहार, पुराना शाहाबाद और सारण व चंपारण के इलाके में भी अति पिछड़ी जातियां और दलित वर्ग के वोट डालने की प्रकृति ‘थोक भाव’ वाली रही है. रालोसपा कोटे की दो सीटें काराकाट और सीतामढ़ी में अति पिछड़ी जातियों के वोट की भूमिका थी.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन