पांच घंटे तक जाम रहा एनएच 31

Updated at : 12 Jun 2016 1:32 AM (IST)
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पांच घंटे तक जाम रहा एनएच 31

आक्रोश. मुखिया की हत्या के विरोध में गांव में दहशत व्याप्त शव के साथ ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन शाम ढलते ही घरों में दुबक जाते हैं ग्रामीण एनएच जाम से वाहनों की लगी लंबी कतार बिहारशरीफ : हरनौत प्रखंड के कोलावां पंचायत की नवनिर्वाचित मुखिया हसनपुर गांव की पूनम देवी की हत्या के विरोध में […]

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आक्रोश. मुखिया की हत्या के विरोध में गांव में दहशत व्याप्त

शव के साथ ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
शाम ढलते ही घरों में दुबक जाते हैं ग्रामीण
एनएच जाम से वाहनों की लगी लंबी कतार
बिहारशरीफ : हरनौत प्रखंड के कोलावां पंचायत की नवनिर्वाचित मुखिया हसनपुर गांव की पूनम देवी की हत्या के विरोध में शुक्रवार की देर रात्रि में ग्रामीणों ने चंडी मोड़ के पास एनएच को जाम कर दिया. शव को पोस्टमार्टम करा कर ग्रामीणों को जब मृतका मुखिया का शव सुपुर्द किया गया, तो ग्रामीण बिहारशरीफ सदर अस्पताल से रात्रि में ही शव लेकर हरनौत पहुंचे. ग्रामीणों ने शव को चंडी मोड़ के पास एनएच-31 पर रख कर करीब पांच घंटे तक जाम कर दिया.
इससे एनएच 31 पर जाम होने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गयी. ग्रामीण महिला मुखिया के हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी एवं कोलावां पंचायत को अनारक्षित महिला की जगह अनारक्षित अन्य करने की मांग कर रहे थे. स्थानीय पुलिस द्वारा जाम हटाने की काफी मशक्कत किये जाने के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली. ग्रामीण अपनी जिद पर अड़े रहे और जाम को जारी रखा. शुक्रवार की रात्रि में करीब डेढ़ बजे जिला पदाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीण जाम हटाने पर राजी हुए और तब जाकर वाहनों का परिचालन फिर से शुरू हुआ.
कोलावां में फिर स्थापित हुआ पुलिस पिकेट : कोलावां में पूर्व में हुए कई हत्याकांडों को देखते हुए वहां पुलिस पिकेट की स्थापना की गयी थी, जिसे हटा लिया गया था. पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष ने बताया कि कोलावां में फिर से पुलिस पिकेट स्थापित कर दिया गया है और पुलिस पिकेट काम भी करने लगा है.
गांव में दहशत का माहौल : मुखिया हत्याकांड के बाद से गांव में दहशत का माहौल कायम है. शाम ढलते ही गांव के लोग घरों में दुबक जा रहे हैं. गांव के अधिकांश पुरुष पलायन कर गये हैं और जो गांव में बचे हैं वो भी सहमे-सहमे हैं.
पुलिस पिकेट में भी लगायी गयी थी आग : कोलावां में खूनी संघर्ष को रोकने के लिए पुलिस पिकेट की स्थापना तो की, गयी मगर खूनी संघर्ष का अंत नहीं हुआ. पिछले पंचायत चुनाव के दौरान जब पिकेट की पुलिस चुनाव ड्यूटी में गयी थी तब पुलिस पिकेट में सोये गांव के ही दो लोगों की हत्या कर दी गयी थी. इसके अलावा करीब डेढ़ वर्ष पूर्व पुलिस पिकेट में आग भी लगा दी गयी थी.
कोलावां में दो दशकों से चल रहा खूनी संघर्ष
हरनौत प्रखंड के कोलावां गांव में पिछले दो दशकों से खूनी संघर्ष चल रहा है. अब तक करीब तीन दर्जन लोग इस खूनी संघर्ष की भेंट चढ़ चुके हैं. आज से करीब दो दशक पूर्व एक युवती से छेड़खानी से शुरू हुआ खूनी संघर्ष अब तक जारी है. दो गुटों में चल रहे इस खूनी खेल के एक गुट का नेतृत्व अनिल सिंह व उसका भाई पप्पू सिंह करते हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व मनोज सिंह करते हैं. वहीं कोलावां गांव में खूनी संघर्ष का विकृत चेहरा यह है कि गांव की तीन दर्जन महिलाएं विधवा की जिंदगी जीने को मजबूर हैं. दो गुटों के इस खूनी संघर्ष का परिणाम यह है कि गांव की करीब 80 फीसदी के एक ही जाति विशेष के लोग पलायन कर चुके हैं.
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