जिले में पंचाने सहित प्रमुख नदियों का जल स्तर बढ़ा
Updated at : 18 Jul 2015 11:58 PM (IST)
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बिहारशरीफ : पिछले तीन दिनों में हुई बारिश के कारण जिले की प्रमुख नदियों के जल स्तर में वृद्धि होने लगी है. पिछले साल बिहारशरीफ व रहुई प्रखंड में तबाही मचाने वाली पंचाने नदी जल स्तर में वृद्धि होने का सिलसिला भी जारी है. हालांकि अब तक कहीं से खतरे के निशान से ऊपर जाने […]
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बिहारशरीफ : पिछले तीन दिनों में हुई बारिश के कारण जिले की प्रमुख नदियों के जल स्तर में वृद्धि होने लगी है. पिछले साल बिहारशरीफ व रहुई प्रखंड में तबाही मचाने वाली पंचाने नदी जल स्तर में वृद्धि होने का सिलसिला भी जारी है.
हालांकि अब तक कहीं से खतरे के निशान से ऊपर जाने की सूचना नहीं है. सकरी,जिराइन, गोइठवा,पैमार सहित जिले की अधिकांश नदियों के जल स्तर में वृद्धि से खास कर निचले इलाके के लोग सहमे हुए हैं. पंचाने नदी का पानी वियावानी, सोहसराय अड्डा पर सहित कई स्थानों पर स्थित पुल व सड़कों के ऊपर तक पहुंच गया है.
अगर जल स्तर में इसी रफ्तार से बढ़ोतरी होती रही तो बिहारशरीफ,रहुई, अस्थावां व सरमेरा प्रखंड में बाढ़ की स्थिति बन सकती है. तटबंधों एवं जमींदारी बांधों के मजबूती करण व पिछले साल बाढ़ में हुए कटाव की मरम्मती का कार्य मॉनसून शुरू होने के बाद प्रारंभ होने से अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है. जिन तटबंधों व बांधों का कार्य वर्षा शुरू होने के बाद पूर्ण किया भी गया है, उसकी मजबूती पर लोगों को संदेह है.
ऐसे में अगर जल स्तर में इसी तरह वृद्धि होती रही तो बाढ़ आने पर स्थिति और भी गंभीर हो सकती है. जिला प्रशासन वैसे तो संभावित बाढ़ से बचाव व राहत कार्य के लिए अपनी ओर से पूरी तैयारी कर रखी है. परंतु तटबंध या जमींदारी बांध के कमजोर रहने के कारण आने वाली बाढ़ से होने वाली बरबादी को रोक पाना संभव नहीं होगा.
पिछले वर्ष पंचाने नदी की बाढ़ में तीन पक्के मकान सहित सैकड़ों कच्चे मकान व हजारों एकड़ में लगी फसल के नुकसान के साथ ही करीब दो दर्जन से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. बाढ़ के कारण हजारों लोग बाढ़ के पानी से घिर गये थे, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रशासन को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा था.
बाढ़ के कहर से प्रभावित क्षेत्रों में करीब एक माह तक राहत अभियान चलाया गया था. प्रभावित क्षेत्रों के लोग आज भी पिछले साल की बाढ़ के मंजर को याद कर सिहर उठते हैं. लोगों का कहना है कि सरकार या प्रशासन बाढ़ आने के बाद राहत व बचाव के प्रति जितना गंभीर रहती है. अगर बाढ़ रोकने के लिए उतनी ही गंभीरता दिखाती तो इसकी पुनरावृत्ति ही नहीं हो.
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