उद्यान महाविद्यालय नूरसराय को भूमि का अभाव, परेशानी

Updated at : 29 Apr 2015 11:19 PM (IST)
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उद्यान महाविद्यालय नूरसराय को भूमि का अभाव, परेशानी

उच्च पैदावार वाले गरमा मौसम के हाइब्रिड टमाटर पर यहां अनुसंधान किया जा रहा अनुसंधान कार्य के लिए कम पड़ रही भूमि अत्याधुनिक भवन का शीघ्र होगा उद्घाटन, विद्यार्थियों व किसानों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं 32 कृषि वैज्ञानिक नियुक्त 77 हेक्टेयर भूमि पर पान की खेती बिहारशरीफ/नूरसराय : नालंदा जिले का गौरव व उत्तर भारत […]

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उच्च पैदावार वाले गरमा मौसम के हाइब्रिड टमाटर पर यहां अनुसंधान किया जा रहा
अनुसंधान कार्य के लिए कम पड़ रही भूमि
अत्याधुनिक भवन का शीघ्र होगा उद्घाटन, विद्यार्थियों व किसानों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
32 कृषि वैज्ञानिक नियुक्त
77 हेक्टेयर भूमि पर पान की खेती
बिहारशरीफ/नूरसराय : नालंदा जिले का गौरव व उत्तर भारत का इकलौता उद्यान महाविद्यालय नूरसराय में भूमि के अभाव में कई जरूरी अनुसंधान कार्य लंबित पड़े हैं. महाविद्यालय के पास वर्तमान में महज छह एकड़ भूमि है, जबकि महाविद्यालय को अनुसंधान कार्य तथा कृषि के लिए लगभग सौ एकड़ भूमि की आवश्यकता है. प्राचार्य समेत यहां कुल 32 कृषि वैज्ञानिक नियुक्त हैं, जिनके द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुसंधान कार्य भी किया जाता है.
कृषि वैज्ञानिक डॉ विनोद कुमार ने बताया कि यहां विभिन्न प्रकार के फलों तथा सब्जियों के उन्नत प्रभेद का उत्पादन किया जाता है. उद्यान महाविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बिना बीज का खीरा तथा बैंगनी रंग के शिमला मिर्च के बीच का उत्पादन किया गया है. स्थानीय स्तर पर खीरे तथा मिर्च की अच्छी मांग है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में उच्च पैदावार वाले गरमा मौसम के हाइब्रिड टमाटर पर यहां अनुसंधान किया जा रहा है.
उम्मीद है कि शीघ्र ही इसमें सफलता मिल जायेगी. हाइब्रिड फलों तथा सब्जियों का उत्पादन किसानों के लिए मुनाफे की खेती होती है. इसलिए स्थानीय स्तर पर महाविद्यालय द्वारा विभिन्न गांवों में कृषि पाठशाला का आयोजन कर उन्हें उन्नत कृषि का गुरू सिखाया जाता है. उन्नत प्रभेद के पौधों के बीच भी किसानों को नि:शुल्क दिये जाते हैं.उद्यान महाविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दर्जनों प्रकार के फल-फूल तथा सब्जियों पर अनुसंधान किया जाता है. हाइब्रिड बीज तैयार करने के विभिन्न चरणों में विभिन्न पौधों तथा बीजों को कई जगह पॉली हाउस का भी निर्माण किया जाता है.
इन सब प्रक्रियाओं के लिए काफी भूमि की जरूरत पड़ती है. उद्यान महाविद्यालय के पास महज छह एकड़ भूमि रहने के कारण कई महत्वपूर्ण अनुसंधान लंबित है. इससे जहां महाविद्यालय अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति करने से वंचित हो रहा है, वहीं देश के किसानों को भी इससे पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है.
पान व औषधीय पौधों पर किया जा रहा अनुसंधान:0
दिन प्रति दिन किसानों के कम होते जोत तथा पारंपरिक कृषि से पर्याप्त मुनाफा नहीं मिलने के कारण किसानों को पान की खेती तथा औषधीय पौधों के उत्पादन के लिए भी महाविद्यालय द्वारा किसानों को प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया जाता है.
उद्यान महाविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक प्रो. आशीष रंजन ने बताया कि वर्तमान में जिले के इस्लामपुर तथा राजगीर प्रखंडों के लगभग 77 हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि पर पान की खेती की जा रही है. जिले के किसानों को औषधीय पौधों की खेती की जानकारी देकर उन्हें इसे अपनाने के लिए प्रात्साहित किया जा रहा है. आने वाले दिनों में महाविद्यालय द्वारा कई प्रकार के हाइब्रिड फल फूल तथा सब्जियों के बीजों का उत्पादन शुरू किया जायेगा.
महाविद्यालय में मौजूद सुविधाएं
महाविद्यालय का पुराना प्रशासनिक भवन छोटा है. क्लास रूम भी साधारण ढंग से बने हैं. महाविद्यालय का हाल की में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिकीकरण किया गया है.
इसके तहत लगभग 14.5 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक प्रशासनिक भवन, वर्ग कक्ष, प्रयोगशाला तथा सभाकक्ष का निर्माण कराया गया है. इसके इंटीरियर डेकोरेशन पर लगभग चार करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं. इस भवन का उद्घाटन शीघ्र ही मुख्यमंत्री द्वारा किया जाना है.
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