कोर्ट की फटकार पर 38 साल बाद खुली दारोगा की घूसखोरी की फाइल

Updated at : 06 Dec 2016 4:52 AM (IST)
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कोर्ट की फटकार पर 38 साल बाद खुली दारोगा की घूसखोरी की फाइल

मुजफ्फरपुर : विजिलेंस विभाग की कार्यशैली को लेकर उतर बिहार विशेष निगरानी अदालत में कई मामले अटके पड़े हैं. कोर्ट के सख्त रवैये से वर्षों से पड़े मामले का खुलासा हो रहा है. विजिलेंस अधिकारियों के टाल-मटोल रवैये के कारण पारू के थानेदार बच्चा सिंह पर लगे घूस का मामला भी लंबित पड़ा है. कोर्ट […]

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मुजफ्फरपुर : विजिलेंस विभाग की कार्यशैली को लेकर उतर बिहार विशेष निगरानी अदालत में कई मामले अटके पड़े हैं. कोर्ट के सख्त रवैये से वर्षों से पड़े मामले का खुलासा हो रहा है. विजिलेंस अधिकारियों के टाल-मटोल रवैये के कारण पारू के थानेदार बच्चा सिंह पर लगे घूस का मामला भी लंबित पड़ा है. कोर्ट की सख्ती से 38 साल बाद इस मामले का खुलासा हुआ है. इस मामले में अधिकारियों ने अभी तक अंतिम प्रपत्र दाखिल नहीं किया है. न्यायालय ने इसे गंभीरता से लिया है और निगरानी एसपी से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है.

बंदूक के लाइसेंस के लिए मांगी थी घूस
मामला 38 वर्ष पहले 1978 का है. पारू के गोपालपुर निवासी अवधेश कुमार सिंह बिहार सैन्य पुलिस-14 में कार्यरत थे. उन्हें बंदूक का लाइसेंस लेना था. आवेदन करने के बाद वे पारू के तत्कालीन थानाध्यक्ष बच्चा सिंह के पास गये. बच्चा सिंह बंदूक लाइसेंस के प्रतिवेदन की अनुशंसा के लिए उनसे दो सौ रुपये की घूस मांगी थी.
निगरानी एसपी से की लिखित शिकायत
दारोगा के इस रवैये से आहत अवधेश प्रसाद सिंह 7 जून 1978 को इसकी लिखित शिकायत पटना स्थित निगरानी एसपी से की. उनके शिकायती आवेदन के सत्यापन के लिए निगरानी एसपी ने 8 जून 1978 को टीम का गठन कर दिया. मामले की जांच का जिम्मा निगरानी के दारोगा जसवंत सहाय अंबष्ट को दिया. 9 जून 1978 को निगरानी दारोगा पारू पहुंच गये. 10 जून 1978 की सुबह अवधेश प्रसाद सिंह के साथ पारू थाना पहुंचे और थानेदार बच्चा सिंह से मुलाकात की. मुलाकात के दौरान थानेदार ने लाइसेंस की रिपोर्ट करने के एवज में दो सौ रुपये घूस की बात दोहरायी. अवधेश ने जब उनसे विभागीय कर्मचारी होने की बात कही तो डेढ़ सौ से कम में काम नहीं होने की बात कही.
निगरानी ने दर्ज किया मुकदमा
मामले के सत्यापन के बाद निगरानी दारोगा जशवंत सहाय अम्बष्ट अपनी जांच रिपोर्ट एसपी को सौंप दी. उनके रिपोर्ट के आधार पर 12 जून 1978 को निगरानी थाने में बच्चा सिंह के विरुद्ध कांड दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
कोर्ट ने निगरानी एसपी से 25 फरवरी तक मांगा जवाब : न्यायालय में इस मामले की सुनवाई होती रही. सुनवाई के दौरान न्यायालय निगरानी एसपी से लगातार कांड के प्रगति प्रतिवेदन की मांग करता रहा, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने कांड के प्रगति प्रतिवेदन, आरोप पत्र या अंतिम प्रपत्र नहीं दिया. सोमवार को विशेष कोर्ट ने निगरानी एसपी से 25 फरवरी 2015 तक जवाब मांगा है.
इधर, पुलिस पदाधिकारियों ने बताया कि बच्चा सिंह पारू से स्थानांतरण होकर कई जिलों में तैनात रहे और तरक्की भी पाते रहे. अब वे रिटायर होकर विभाग से अपने सारे लाभ लेकर घर जा चुके है.
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