घर में सिमटी हजारों की आबादी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मुजफ्फरपुर: रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण पूरा शहर जलमग्‍न हो गया है. साफ-सफाई भगवान भरोसे है. निचले इलाके के दर्जनों मोहल्ले में पानी जमा है. सही तरीके से सफाई नहीं होने के कारण आउटलेट व छोटे-छोटे पुल-पुलिया जाम हैं. इससे पानी की निकासी धीरे-धीरे हो रही है. कई आउटलेट से तो पानी निकासी भी बंद हो चुकी है.

शहर के 30 फीसदी इलाके का पानी सिकंदरपुर व चंदवारा स्लुइस गेट से होकर गंडक नदी में जाता है, लेकिन स्लुइस गेट के दोनों मुख्य नालों के कई जगहों पर जाम रहने व अतिक्रमण कर मकान बना लेने के कारण पानी की निकासी जिस रफ्तार से होनी चाहिए, उस रफ्तार से नहीं हो रही है. इससे चंदवारा, सिकंदरपुर, अखाड़ा घाट, बनारस बैंक चौक, कमरा मोहल्ला समेत दो दर्जन से अधिक मोहल्ले में बारिश का पानी जस का तस जमा है. हजारों की आबादी गंदगी व जलजमाव के बीच जीवन व्यतीत करने को मजबूर है. फिर भी नगर-निगम प्रशासन को कोई चिंता-फिक्र नहीं है.

कार छोड़ ऑटो की सवारी
वार्ड नंबर 48 के कन्हौली मठ, शक्ति नगर व शारदा नगर में रहने वाले लोग बेहाल हैं. यहां डेढ़ से दो फिट तक पानी जमा है. नाला की व्यवस्था नहीं है. स्कूल जाने वाले बच्चे तो परेशान हो ही रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी गाड़ी से ड्यूटी जाने वाले लोगों को हो रही है. कन्हौली मठ पोखर के समीप रहने वाले रेलवे इंजीनियर मुकुंद बिहारी की पत्नी अनामिका बुद्धनगरा केनरा बैंक में कार्यरत हैं. मुहल्ला में पानी लगे रहने के कारण वह गाड़ी छोड़ पैदल ऑटो की सवारी कर ड्यूटी करने को मजबूर हैं. इस तरह की समस्या मोहल्ले के करीब सभी परिवार के सदस्यों को ङोलना पड़ रहा है.

टापू बना गोबरसही का श्रमजीवी नगर : गोबरसही के श्रमजीवी नगर की स्थिति सबसे जुदा है. इस मोहल्ले में 50 से अधिक घर हैं. कई मकान निर्माणाधीन हैं. फिलहाल इस मोहल्ले को अलग से देखने पर पता चलता है कि यह किसी नदी के किनारे का मोहल्ला है. नाले व सड़क की व्यवस्था नहीं होने के कारण जलजमाव से पूरा मुहल्ला टापू बन गया है. लोगों का घर से निकलना दूभर है. रोजाना उपयोग में आने वाले समान व साग-सब्जी की खरीदारी भी बंद है. प्रशासन व सरकार को कोसते हुए लोग किसी तरह घर में समय काटने को मजबूर हैं.

न्यू कॉलोनी के दर्जनों घरों में घुसा पानी
मिठनपुरा के इंद्रपुरी व न्यू कॉलोनी के दर्जनों घरों में पानी घुस गया है. जबकि, दोनों मोहल्ले शहर के बीचो-बीच हैं. यहां प्रोफेसर से लेकर बैंक कर्मी तक के मकान हैं. इंद्रपुरी कॉलोनी में तो गल्र्स हॉस्टल भी कई हैं. काफी दिन पहले बने दर्जन भर से अधिक मकान सड़क से नीचे हो गये हैं, इससे पानी घुस गया है. ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले लोग प्रथम तल्ला पर रह रहे हैं. लोगों ने इसकी शिकायत कई बार स्थानीय वार्ड पार्षद से लेकर निगम प्रशासन से की है, लेकिन जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं हुई.

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