23 जुलाई से चातुर्मास, 19 नवंबर से शुभ काम

Updated at : 05 Jul 2018 5:09 AM (IST)
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23 जुलाई से चातुर्मास, 19 नवंबर से शुभ काम

मुजफ्फरपुर : हरिशायनी एकादशी शुरू होने के साथ 23 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ हो जायेगा. इसमें शुभ काम नहीं होंगे. यह 18 नवंबर तक रहेगा. 19 नवंबर को देवोत्थान एकादशी से शुभ काम शुरू होगा, लेकिन देवगुरु बृहस्पति के अस्त होने के कारण विवाह का मुहूर्त नहीं है. बृहस्पति का उदय सात दिसंबर को होगा. […]

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मुजफ्फरपुर : हरिशायनी एकादशी शुरू होने के साथ 23 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ हो जायेगा. इसमें शुभ काम नहीं होंगे. यह 18 नवंबर तक रहेगा. 19 नवंबर को देवोत्थान एकादशी से शुभ काम शुरू होगा, लेकिन देवगुरु बृहस्पति के अस्त होने के कारण विवाह का मुहूर्त नहीं है. बृहस्पति का उदय सात दिसंबर को होगा. इसके बाद मांगलिक कार्य शुरू होंगे. दिसंबर में विवाह के लिए पांच लग्न हैं. इसके बाद खरमास शुरू हो जायेगा.

27 जुलाई को गुरुपूर्णिमा व चंद्रगहण: आषाढ़ मास की पूर्णिमा पर 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनायी जायेगी. इसी दिन चंद्रग्रहण भी है. ज्योतिषाचार्य पं. प्रभात मिश्र कहते हैं कि इस दिन चांद 52 मिनट तक तांबे के रंग जैसा नारंगी या गहरा लाल रंग का दिखाई देगा. इस साल का यह दूसरा चंंद्रगहण है. ग्रहण से मोक्षकाल तक इसका समय 3 घंटे 54 मिनट 33 सेकेंड का रहेगा. इस चंद्रग्रहण को सदी का सबसे बड़ा चंद्रग्रहण माना जा रहा है.
पं. मिश्र के अनुसार खग्रास चंद्र ग्रहण का सूतक 27 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ हो जायेगा. बाल, वृद्ध व रोगियों के लिए इसे एक प्रहर पूर्व यानी रात्रि 8 बजकर 54 मिनट से माना जाना चाहिए. ग्रहण का स्पर्श यानी ग्रहण काल रात्रि 11 बजकर 54 मिनट पर प्रारंभ होगा. रात्रि 1 बजकर 52 मिनट पर पूर्ण ग्रहण व रात्रि 3 बजकर 49 मिनट पर इसका मोक्षकाल रहेगा.
बृहस्पति के उदय के बाद सात दिसंबर से शुरू होगा लग्न
चार मास तक विश्राम करते हैं भगवान
आषाढ़ की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं. मान्यता है कि इस दिन से पूरे चार माह तक भगवान विष्णु सहित अन्य देवता क्षीर सागर में जा कर सो जाते हैं. कार्तिक मास के देवोत्थान एकादशी के दिन ये जगते हैं. इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है. चार महीने की अवधि में पूजा-पाठ तो किया जाता है, लेकिन शुभ कार्यों में शादी, मुंडन व नामाकरण संस्कार नहीं किये जाते हैं.
ग्रहण का समय
सूतक का प्रारंभ काल 2.54 बजे दिन से
ग्रहण स्पर्श रात 11.54 बजे
ग्रहण खग्रास रात 1. 00 बजे
ग्रहण का मध्य रात 1.51 बजे
खग्रास समाप्ति रात 2.43 बजे
ग्रहण का मोक्ष सुबह 3.49 बजे
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