दियारा में अब भी फंसे हैं सैकड़ों परिवार

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Aug 2016 4:32 AM

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आफत. गंगा का जलस्तर स्थिर, बाढ़ प्रभािवतों में दहशत, न खुद खाने व न ही मवेशी के चारे का है इंतजाम पिछले 24 घंटे से गंगा का जलस्तर स्थिर है, लेकिन बाढ़ की तबाही अब भी बरकरार है़ जिले के सदर प्रखंड, बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा, हवेली खड़गपुर तथा असरगंज प्रखंड के साथ-साथ मुंगेर शहरी क्षेत्र […]

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आफत. गंगा का जलस्तर स्थिर, बाढ़ प्रभािवतों में दहशत, न खुद खाने व न ही मवेशी के चारे का है इंतजाम
पिछले 24 घंटे से गंगा का जलस्तर स्थिर है, लेकिन बाढ़ की तबाही अब भी बरकरार है़ जिले के सदर प्रखंड, बरियारपुर,
जमालपुर, धरहरा, हवेली खड़गपुर तथा असरगंज प्रखंड के साथ-साथ मुंगेर शहरी क्षेत्र का आठ वार्ड का दर्जनों मुहल्ले बाढ़ की त्रासदी झेल रहे. लोग अपना जान बचाने के साथ-साथ अपने मवेशियों व घरेलू सामानों को बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं. दियारा क्षेत्र में अब भी सैकड़ों परिवार बाढ़ के बीच फंसे हैं. दर्जनों घर तो गंगा के तेज बहाव के साथ ही बह गये, जिसका कोई अता-पता भी नहीं है़
मुंगेर : बाढ़ की विनाशकारी लीला ने इस बार जिले में भयावह स्थिति उत्पन्न कर दी है़ मुंगेर नगर निगम क्षेत्र के आठ वार्ड सहित सदर प्रखंड, बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा, हवेली खड़गपुर तथा असरगंज में बाढ़ तबाही मचा रही है़ बाढ़ की विभिषिका ने पीड़ित परिवारों का न सिर्फ सुख-चैन छिन लिया है, बल्कि बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया है़ वहीं मवेशियों के समक्ष भी भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गयी है़ चारा नहीं मिलने के कारण मवेशियों के हाड़ निकलने लगे हैं. वहीं जिला प्रशासन पशुचारा के नाम पर केवल आश्वासन दे रही है.
यूं तो गंगा का जलस्तर खतरा के निशान को पार करने के पूर्व ही जिलाधिकारी ने जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया था. ताकि लोग समय से अपना घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जायें. किंतु दियारा क्षेत्र के लोग गंगा पुत्र के नाम से जाने जाते हैं और वे कई बार बाढ़ की विभिषिका देख चुके हैं. इसलिए वे अंतिम समय तक घरबार छोड़ने को तैयार नहीं होते. मुंगेर में जब गंगा खतरे के निशान से 82 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. तब भी कुतलुपुर, जाफरनगर, टीकारामपुर, तारापुर दियारा, हरिणमार, झौवाबहियार सहित अन्य स्थानों पर हजारों परिवार घर में रखे सामानों की चिंता के कारण घर छोड़ने को तैयार नहीं. कोई पड़ोसी के छत पर तो कोई ऊंचा मचान बना कर दियारा में ही डेरा डाले हुए हैं.
पीड़ितों के बीच दवाओं का वितरण
पिछले चार दिनों से राहत शिविर में दवा उपलब्ध नहीं रहने के कारण बाढ़ पीड़ित परिवारों को भारी परेशानी हो रही थी़ जिसे प्रभात खबर ने बुधवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया़ खबर पर संज्ञान लेते हुए जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा विभिन्न राहत शिविरों में बुधवार को कैंप लगा कर पीड़ित मरीजों के बीच आवश्यक दवाओं का वितरण किया गया, जिससे पीड़ित परिवारों को काफी राहत मिली़
प्रशासनिक स्तर पर खोले गये 49 राहत शिविर
बाढ़ की विभिषिका से लोगों को राहत उपलब्ध कराने खासकर भोजन व पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिले के बाढ़ प्रभावित पांच प्रखंडों में कुल 49 बाढ़ राहत शिविर खोले गये हैं. जिसमें सर्वाधिक मुंगेर सदर प्रखंड में 18, धरहरा में 13, बरियारपुर में 11, जमालपुर में 3 एवं हवेल खड़गपुर प्रखंड में 4 राहत शिविर कार्य कर रहे.
जिला पदाधिकारी उदय कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के राहत शिविरों में मध्याह्न भोजन के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की गयी है. शिक्षा विभाग के अधिकारी व शिक्षक को इस कार्य में लगाये गये हैं. साथ ही बाढ़ राहत शिविरों की व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए पांचों प्रखंड में अपर समाहर्ता एवं वरीय उपसमाहर्ता स्तर के अधिकारी को प्रभारी बनाया गया है. इसके तहत अमजद अली को मुंगेर सदर, जैनेंद्र कुमार को जमालपुर, अखिलेश कुमार झा को धरहरा व बरियारपुर तथा खड़गपुर के अनुमंडल पदाधिकारी वसीम अहमद खड़गपुर के वरीय प्रभार में रहेंगे.
बच्चों के लिए हुई दूध की व्यवस्था : प्रशासन द्वारा राहत शिविरों में रहने वाले बच्चों व धातृ महिलाओं के लिए दूध की व्यवस्था की है. ताकि बच्चे व धातृ माताओं को उसके शारीरिक पौष्टिकता की पूर्ति की जा सके. इसके साथ ही राहत केंद्रों में मेडिकेयर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गयी है. अबतक जिले में 309 लोगों का इलाज किया गया है. 28 हजार लोगों को दिया जा रहा भोजन : जिला प्रशासन द्वारा राहत शिविरों के माध्यम से लगभग 28 हजारों लोगों को तैयार भोजन दिया जा रहा है. इसके साथ ही अबतक 64 क्विंटल चूरा व 62 क्विंटल गुड़ का वितरण किया गया है.
अपना पेट काट, मां बच्चों का रख रहीं ख्याल
प्रशासनिक स्तर पर विभिन्न राहत शिविरों में उपलब्ध कराये जा रहे भोजन बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के फोरन साबित हो रही है़ दियारा व ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं, जिनका खुराक शहरी लोगों के मुताबिक थोड़ा अधिक होता है़ यही कारण है कि राहत शिविर में मौजूद लोगों में सैकड़ों लोग भोजन से वंचित रह जाते हैं. किंतु मां तो मां होती है, वह अपने बच्चों को भूखे कैसे देख सकती है़
राहत शिविर में जो भोजन दिया जाता है उसे बचाकर अपने बच्चे को खिलाती है. यदि शिविर में भोजन नहीं मिल पाया तो वे अपना निजी चूल्हा जला कर बच्चों का पेट भरने में लगी हुई है़
शौचालय व पेयजल की होने लगी परेशानी
गांव हो या शहर जहां भी बाढ़ का पानी फैला हुआ है वहां लोगों के बीच शौचालय व पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गयी है़ शौचालय के टंकी में बाढ़ का पानी भर जाने के कारण लोगों का शौचालय पूरी तरह फेल हो चुका है़ ऐसे में लोगों को शौच के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है़ वहीं यदि पेयजल की बात की जाये तो बाढ़ प्रभावित इलाके में जितने भी पेयजल के श्रोत हैं, वे सबके सब दूषित हो चुके हैं.
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