गेसिंग का धंधा परवान पर, कंगाल हो रहे लोग
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 May 2016 5:34 AM
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मुंगेर : शहर के विभिन्न स्थानों पर इन दिनों गेसिंग का धंधा परवान पर है. इस धंधे में जहां गरीब परिवार उजड़ रहा है वहीं चंद मुट्ठी भर लोग मालोमाल हो रहे हैं. जबकि इस धंधे पर नकेल कसने में मुंगेर पुलिस पूरी तरह विफल है. दर्जनों स्थानों पर चल रहा गेसिंग शहर के गुलजार […]
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मुंगेर : शहर के विभिन्न स्थानों पर इन दिनों गेसिंग का धंधा परवान पर है. इस धंधे में जहां गरीब परिवार उजड़ रहा है वहीं चंद मुट्ठी भर लोग मालोमाल हो रहे हैं. जबकि इस धंधे पर नकेल कसने में मुंगेर पुलिस पूरी तरह विफल है.
दर्जनों स्थानों पर चल रहा गेसिंग
शहर के गुलजार पोखर, दीनदयाल चौक के समीप, पूरबसराय, पुरानीगंज, 2 नंबर गुमटी (काली स्थान), मोगल बाजार शिव मंदिर, रायसर सहित दर्जनों स्थानों पर इन दिनों गेसिंग का धंधा जोरों पर है. चाय-पान की दुकान पर भी इस धंधे में शामिल लोगों को देखा जा सकता है.
पुलिस की मिलीभगत से चल रहा कारोबार
यह कारोबार पुलिस की मिलीभगत से संचालित हो रहा है. इसके बदले में एजेंट द्वारा पुलिस को राशि का भी भुगतान किया जाता है. जिसके कारण गेसिंग खेलाने वाले एजेंट द्वारा बेखौफ होकर इस धंधे किया जा रहा.
रिजल्ट जानने को बेताब रहते हैं जुआरी
जुआरी घंटे-आधे घंटे में रिजल्ट जानने को बेताब रहते हैं कि 0-9 तक के अंक में कौन अंक खेला. इस धंधा में माहिर लोग अपने अनुमान के अनुसार 0-9 अंक में किसी एक अंक पर पैसा लगाते हैं. यदि उस व्यक्ति द्वारा लगाया गया अंक फंस जाता है तो उसके बदले में उसे प्रति टिकट 100 रुपये मिलता है. इस प्रकार लोग एक बार में दो-चार नंबर पर लगभग 50-100 टिकट तक खेलते हैं. कोई जुआरी तो 500 टिकट खरीदते हैं. एक टिकट का मूल्य 12 रुपये में फुल एवं 6 रुपये में हाफ है.
एजेंट के पास रहती है सूची
गेसिंग का खेल सुबह 6 से प्रारंभ होता है जो शाम 6 बजे तक चलता है. प्रत्येक 20-20 मिनट पर इसका रिजल्ट निकलता है. इस धंधा को खेलाने वाले एजेंट के पास घंटा दर घंटा की सूची रहती है. जिसे देख कर जुआरी अनुमान लगा कर नंबर लेते हैं. कभी कभार तो एजेंट द्वारा ही निश्चित कर दिया जाता है कि इस समय में कौन सा नंबर खेलेगा. उस पर भी लोग नंबर लगा देते हैं.
कोडिंग शब्द का होता है इस्तेमाल
एजेंट द्वारा अक्षर को कोडिंग बर्ड के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इस धंधे से जुड़े लोगों को पता चल जाता है कि एजेंट या जुआरी क्या कहना चाह रहा है. इसमें 2 को बत्तख, 3 को तिरशूल, 4 को बाउंड्री, 5 को कांग्रेस, 6 को छक्का, 7 को हॉकी, 8 को डमरू, 9 को नहला कोडिंग शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. इतना ही एजेंट मोटर साइकिल एवं पैदल चलते-फिरते लोगों का नंबर लिख लेता है. इस धंधा में न सिर्फ अमीर बल्कि गरीब तबके के लोग भी शामिल हैं. रिक्शा चालक के साथ ही युवा वर्ग भी दिन भर में दो-चार टिकट खेल लेते हैं.
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