अधूरी योजनाओं के कारण विकास में पिछड़ा खड़गपुर

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सिंघुवारिणी : व जालकुंड जलाशय योजना एवं बरियारपुर का अधुरा ओवर ब्रिज प्रतिनिधि , हवेली खड़गपुर वर्ष 1992 में खड़गपुर को अनुमंडल का दर्जा मिला. लोगों में उम्मीद की किरण जगी कि अब विकास के मामले में यह क्षेत्र पिछड़ेगा नहीं. कई योजनाओं का शुभारंभ किया गया. लेकिन ये क्या आधी-अधूरी योजना के कारण खड़गपुर […]

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सिंघुवारिणी : व जालकुंड जलाशय योजना एवं बरियारपुर का अधुरा ओवर ब्रिज प्रतिनिधि , हवेली खड़गपुर वर्ष 1992 में खड़गपुर को अनुमंडल का दर्जा मिला. लोगों में उम्मीद की किरण जगी कि अब विकास के मामले में यह क्षेत्र पिछड़ेगा नहीं. कई योजनाओं का शुभारंभ किया गया. लेकिन ये क्या आधी-अधूरी योजना के कारण खड़गपुर विकास के मामले में काफी पिछड़ गया.

हाल यह हो गया कि खड़गपुर से कोई बड़ी गाड़ी भी मुंगेर नहीं जा पाती. तुलनात्मक दृष्टिकोण से अगर देखे तो खड़गपुर को अनुमंडल बनने के कई वर्ष बाद तारापुर अनुमंडल बना

. उसने विकास की नयी कहानी लिखना प्रारंभ कर दिया. लेकिन खड़गपुर विकास के मामलों में पिछड़ता चला गया. 7-8 वर्ष से जहां बरियारपुर रेलवे ओवरब्रिज का कार्य बंद है. वहीं खैरा और नगर क्षेत्र के लिए पेयजलापूर्ति योजना अधूरी पड़ी हुई है. सिंघुवारिणी व जालकुंड जलाशय योजना भी अधर में लटक गया. परिसीमन में खड़गपुर विधानसभा का अस्तित्व भी समाप्त हो गया. जिसके कारण विकास का कार्य मंथर हो गया.

वर्ष 2005 के बाद नक्सल वारदात की कई बड़ी घटनाओं ने खड़गपुर के विकास में रोड़े अटका दिये. खड़पुल झील, ऋषिकुंड, जालकुड, भीमबांध जैसे पिकनिक स्पॉट भी पर्यटन के विकास की राह ताक रहा है. बरियारपुर रेलवे ओवरब्रिज खड़गपुर के विकास पर अगर सबसे गहरा आघात किसी ने पहुंचाया है तो वह है बरियारपुर रेलवे ओवरब्रिज. खड़गपुर सीमा से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस पुल से अगर सबसे ज्यादा नुकसान किसी को पहुंचा है तो तो वह खड़गपुर. आठ वर्षों से ओवर ब्रिज का कार्य बंद पड़ा हुआ है जिसके कारण बड़े वाहनों का आवागमन ही ठप हो गया. माल का आयात-निर्यात भी बंद हो गया.

मुंगेर से खड़गपुर का संपर्क भंग हो गया. जिसके कारण खड़गपुर विकास में पिछड़ गया.पेयजलापूर्ति योजना खैरा गांव और नगर पंचायत क्षेत्र के लिये खड़गपुर झील स्थित 25 करोड़ 27 लाख की लागत से पेयजलापूर्ति योजना प्रारंभ किया गया. जो अधर में लटक गया. इससे पूर्व भी 1995 के करीब लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योजना के तहत कार्य प्रारंभ हुआ.लेकिन करोड़ों की पाइप बर्बाद चली गयी. महकोला और कैथी के समीप किये गये बोरिंग अब भी अधूरा पड़ा हुआ है. सिंघुवारिणी व जालकुंड परियोजना सिंचाई के लिये सिंधुवारिणी जलाशय योजना की शुरुआत की गयी थी. उसकी रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया और योजना अधूरी रह गयी. इसी प्रकार स्थित जालकुंड जलाशय योजना का भी हुआ.

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